
स्टावेंजरः भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंद ने शानदार वापसी करते हुए प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस 2026 का खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया। वह इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतिम और 10वें राउंड में उन्होंने जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर यह उपलब्धि हासिल की।
टूर्नामेंट के आखिरी दिन प्रज्ञानानंद के सामने जीत दर्ज करने की चुनौती थी। अंतिम राउंड से पहले अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो 15.5 अंकों के साथ शीर्ष पर थे। हालांकि, उनका मुकाबला फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ ड्रॉ रहा और फैसला आर्मागेडन टाईब्रेकर में गया। वेस्ली सो ने टाईब्रेकर जीत लिया, लेकिन उन्हें केवल 1.5 अंक मिले। इस तरह उनके कुल 17 अंक हुए और प्रज्ञानानंद के लिए खिताब जीतने का रास्ता खुल गया।
सफेद मोहरों से खेलते हुए प्रज्ञानानंद ने मिडिल गेम में कीमर की गलतियों का फायदा उठाया और 45वीं चाल में मुकाबला जीत लिया। इस जीत के साथ उन्होंने कुल 18 अंक हासिल किए और एक अंक की बढ़त से चैंपियन बने। उनके खाते में पांच जीत, दो हार और दो ड्रॉ रहे। दोनों ड्रॉ मुकाबलों के बाद खेले गए आर्मागेडन गेम में भी उन्होंने जीत दर्ज कर अतिरिक्त अंक हासिल किए।
वेस्ली सो 17 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि अलीरेजा फिरोजा 15.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन ने अंतिम दौर में मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश को हराया, लेकिन वह खिताब की दौड़ में पीछे रह गए। कार्लसन 13 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे। विंसेंट कीमर 11 अंकों के साथ पांचवें और गुकेश आठ अंकों के साथ छठे तथा अंतिम स्थान पर रहे।
नॉर्वे चेस 2026: ओपन वर्ग की अंतिम अंक तालिका
| रैंक | खिलाड़ी | देश | अंक |
|---|---|---|---|
| 1 | आर. प्रज्ञानानंद | भारत | 18 |
| 2 | वेस्ली सो | अमेरिका | 17 |
| 3 | अलीरेजा फिरोजा | फ्रांस | 15.5 |
| 4 | मैग्नस कार्लसन | नॉर्वे | 13 |
| 5 | विंसेंट कीमर | जर्मनी | 11 |
| 6 | डी. गुकेश | भारत | 8 |
कार्लसन को दो बार हराकर रचा इतिहास
प्रज्ञानानंद की यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में उनका प्रदर्शन साधारण रहा था। छठे राउंड के बाद वह अंक तालिका में सबसे नीचे थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने लगातार चार मुकाबले जीतकर शानदार वापसी की।
इस दौरान उन्होंने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और सात बार के नॉर्वे चेस चैंपियन मैग्नस कार्लसन को दो बार क्लासिकल मुकाबलों में हराया। इसके साथ ही वह एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार हराने वाले भारत के दूसरे खिलाड़ी बन गए। इससे पहले विश्वनाथन आनंद ने 2007 के लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कार्लसन को लगातार दो बार मात दी थी।
लगातार चार मैच जीतने का उनका कारनामा भी बेहद खास रहा। 2021 में कार्लसन के बाद वह नॉर्वे चेस में लगातार चार मुकाबले जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने।
आनंद और गुकेश भी नहीं जीत सके थे यह खिताब
प्रज्ञानानंद ने वह उपलब्धि हासिल कर ली, जो भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद भी नहीं कर पाए थे। मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश भी अब तक नॉर्वे चेस का खिताब नहीं जीत सके हैं।
2013 में शुरू हुए इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार किसी भारतीय खिलाड़ी ने ट्रॉफी अपने नाम की है। यह प्रज्ञानानंद की नॉर्वे चेस में दूसरी भागीदारी थी और उन्होंने इसे यादगार बना दिया।
1 जून को जारी ताजा विश्व रैंकिंग में प्रज्ञानानंद 16वें स्थान पर खिसक गए थे। हालांकि, नॉर्वे चेस में उनके शानदार प्रदर्शन ने सभी आलोचनाओं का जवाब दे दिया और वह सीधे चैंपियन बनकर उभरे।
महिला वर्ग में बिबिसारा आसाउबायेवा बनीं चैंपियन
महिला वर्ग में कजाकिस्तान की बिबिसारा आसाउबायेवा ने 16.5 अंकों के साथ खिताब जीता। चीन की झू जिनेर 16 अंकों के साथ दूसरे और यूक्रेन की अन्ना मुजिचुक 15 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
भारतीय खिलाड़ियों में दिव्या देशमुख 10 अंकों के साथ पांचवें और कोनेरू हम्पी नौ अंकों के साथ छठे स्थान पर रहीं।
क्या है नॉर्वे चेस का आर्मागेडन फॉर्मेट?
नॉर्वे चेस दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और रोमांचक शतरंज टूर्नामेंटों में गिना जाता है। इस वर्ष टूर्नामेंट 25 मई से 5 जून तक आयोजित किया गया। ओपन और महिला दोनों वर्गों में छह-छह खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और सभी ने एक-दूसरे के खिलाफ दो-दो मुकाबले खेले।
इस प्रतियोगिता की सबसे खास बात इसका आर्मागेडन फॉर्मेट है। अगर क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ हो जाता है तो विजेता तय करने के लिए तुरंत आर्मागेडन गेम खेला जाता है। इसमें सफेद मोहरों वाले खिलाड़ी को अधिक समय मिलता है, लेकिन जीत हासिल करना उसके लिए अनिवार्य होता है। यदि मुकाबला ड्रॉ रहता है तो काले मोहरों वाला खिलाड़ी विजेता माना जाता है और उसे अतिरिक्त अंक मिलता है। इससे हर राउंड का नतीजा निकलना सुनिश्चित होता है।
नॉर्वे चेस की अंक प्रणाली भी अलग है। क्लासिकल जीत पर तीन अंक मिलते हैं, जबकि ड्रॉ होने पर दोनों खिलाड़ियों को एक-एक अंक दिया जाता है। इसके बाद आर्मागेडन जीतने वाले खिलाड़ी को एक अतिरिक्त बोनस अंक मिलता है।
क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज में क्या अंतर है?
शतरंज में मुख्य रूप से क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज तीन प्रारूप होते हैं। क्लासिकल शतरंज में खिलाड़ियों को शुरुआती 40 चालें चलने के लिए 90 मिनट का समय मिलता है। यह सबसे लंबा और प्रतिष्ठित प्रारूप माना जाता है, जिसमें खिलाड़ियों की रणनीतिक क्षमता की वास्तविक परीक्षा होती है।
रैपिड शतरंज में प्रत्येक खिलाड़ी को 10 से 60 मिनट के बीच का समय मिलता है, जबकि ब्लिट्ज में सभी चालें 10 मिनट या उससे कम समय में पूरी करनी होती हैं। ब्लिट्ज फॉर्मेट बेहद तेज और रोमांचक माना जाता है।
यदि किसी नॉकआउट प्रतियोगिता में क्लासिकल मुकाबलों के बाद भी बराबरी रहती है तो विजेता तय करने के लिए रैपिड और उसके बाद ब्लिट्ज मुकाबले खेले जाते हैं।


