नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे भारत में इन दिनों भीषण गर्मी का कहर देखा जा रहा है। लोग गर्मी से राहत के लिए मानसून का इंतजार कर रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, केरल में मानसून गुरुवार (4 जून) को पहुंच चुका है। केरल में मानसून हालांकि आमतौर पर 1 जून के आसपास रहता है। हालांकि, इस साल यह 3 दिन बाद पहुंचा है। वहीं, आईएमडी के अनुसार यह पांच दिनों देरी से पहुंचा है।
दिल्ली-एनसीआर में भी हालांकि 4 जून को शाम तेज आंधी तूफान आया जिसके चलते करीब 400 पेड़ गिरे और यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान दीवारें गिरने की भी खबरें आईं। तेज आंधी-तूफान के चलते भले ही लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली लेकिन इससे व्यापक स्तर पर नुकसान भी हुआ।
दिल्ली-एनसीआर में कब तक पहुंचेगा मानसून?
मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून की दस्तक दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 25-30 जून के बीच होने की संभावना है। इस दौरान ही क्षेत्र में बारिश शुरू हो जाएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। दिल्ली से सटे इलाकों जैसे गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद में लोग भीषण गर्मी से बेहाल हैं। मानसून के दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पहुंचने के बाद अगले कुछ दिनों में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में दस्तक देगा।
मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून बंगाल की खाड़ी से होते हुए बिहार और फिर पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाद यह मध्य और फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहुंचेगा। ऐसे में अनुमानों के मुताबिक, अगले एक से दो हफ्तों में यूपी में मानसून पहुंचने की संभावना है।
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IMD के अनुमानों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में मानसून पूर्वी जिलों गोरखपुर, देवरिया, गाजीपुर, मऊ,आजमगढ़, मऊ, चंदौली में प्रवेश करेगा। इसके बाद मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों तक पहुंचेगा। मानसून से पहले कुछ इलाकों में प्री-मानसून भी देखने को मिल सकता है। इस दौरान छिटपुट बारिश, तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
केरल में मानसून की दस्तक
गौरतलब है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून आधिकारिक तौर पर 4 जून को केरल तट पर पहुंच गया। यह भारतीय मुख्य भूमि पर इसके सफल आगमन का संकेत है। हालांकि इस वर्ष मानसून सामान्य तिथि से तीन दिन विलंबित हुआ है, लेकिन पूरे देश में बारिश की उम्मीद से वातावरण उत्साहपूर्ण है।
आईएमडी ने कई प्रमुख वायुमंडलीय कारकों की पहचान की है जिनके चलते इस वर्ष मानसून के आगमन का मार्ग प्रशस्त हुआ। सबसे पहले हमने दक्षिणपूर्वी अरब सागर के ऊपर संवहनी बादलों में वृद्धि देखी गई। सरल शब्दों में कहें तो गर्म, नम हवा के ऊपर उठने से विशाल, ऊर्ध्वाधर बादल बने जो भारी वर्षा के मुख्य कारक हैं।
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इसके अलावा पश्चिम से बहने वाली तेज पश्चिमी हवाएं 20 से 25 समुद्री मील प्रति घंटे की गति से लगातार चल रही हैं। बताते चलें कि मानसून कोई स्थिर घटना नहीं है बल्कि एक विशाल, परिवर्तनशील मौसम प्रणाली है। यह पहले ही काफी बड़े क्षेत्र को कवर कर चुका है। इसमें संपूर्ण लक्षद्वीप द्वीप समूह, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्से और अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के बड़े-बड़े क्षेत्र शामिल हैं।
यह दक्षिणी प्रायद्वीप में आगे बढ़ रहा है और लगातार मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर अग्रसर हो रहा है।



