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गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर भारत का सख्त रुख, आगामी चुनाव पर जताया विरोध; बताया भारत का अभिन्न अंग

विदेश मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 1947 में जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण, वैध और अपरिवर्तनीय विलय हुआ था। इसलिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी क्षेत्र, जिनमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत के अभिन्न अंग हैं।

mea takes tough stand on Gilgit-Baltistan opposition to upcoming elections calls it an integral part of India, भारतीय विदेश मंत्रालय
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

नई दिल्लीः भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर सख्त रवैया अपनाया है। इन क्षेत्रों में तथाकथित विधानसभा चुनाव कराने की योजना पर शुक्रवार (5 जून) को कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्रशासित प्रदेश, जिनमें तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है। भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।

विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में एक बयान भी जारी किया। मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि भारत सरकार ने 7 जून 2026 को प्रस्तावित तथाकथित “गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा” के आम चुनावों को लेकर पाकिस्तान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत का कहना है कि यह क्षेत्र भारतीय भूभाग का हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध और बलपूर्वक कब्जा कर रखा है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 1947 में जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण, वैध और अपरिवर्तनीय विलय हुआ था। इसलिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी क्षेत्र, जिनमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत के अभिन्न अंग हैं।

भारत का यह बयान पाकिस्तान द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) की विधानसभा की सभी सीटों के लिए 27 जुलाई को मतदान कराने की घोषणा के बाद आया है।

भारत ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति बदलने के किसी भी प्रयास को वह पूरी तरह खारिज करता है। ऐसे कदम इस तथ्य को नहीं बदल सकते कि पाकिस्तान भारतीय क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा बनाए हुए है और उसे इन क्षेत्रों को खाली करना चाहिए।

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विदेश मंत्रालय ने कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले अन्य क्षेत्रों में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और लोगों की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध जैसे मूल मुद्दों को चुनावी प्रक्रिया के जरिए छिपाया नहीं जा सकता।

बयान में कहा गया, “भारत सरकार पाकिस्तान द्वारा अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के भौतिक या प्रशासनिक बदलाव के प्रयासों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करती है। ऐसे कदम इस सच्चाई को नहीं छिपा सकते कि पाकिस्तान भारतीय क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए है।”

PoK में मानवाधिकार उल्लंघन रोकने की रखी थी मांग

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी भारत ने पाकिस्तान से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन रोकने की मांग की थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने कहा था कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में लोग अपने मूल अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए खुलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तानी सेना और उसके समर्थक समूहों द्वारा उनका दमन किया जा रहा है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन, सैन्य दमन और प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन जारी है। भारत ने पाकिस्तान से इन गतिविधियों को तुरंत बंद करने की मांग की थी।

मंगलानंदन ने यह भी कहा था कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक चुनावों में लोगों की भागीदारी भारत के लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख भारत के अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्से हैं।

भारत का यह भी कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 1948 के प्रस्ताव में पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर से अपनी सेना और नागरिकों को हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन पाकिस्तान आज भी उस क्षेत्र के एक हिस्से पर अवैध कब्जा बनाए हुए है।

(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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