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सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद अभिजीत दिपके ने शुरू किया आमरण अनशन, विपक्ष ने क्या कहा?

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंग्मो भी अस्पताल में मौजूद हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी, परिवार और पिछले 20 दिनों से वांगचुक की निगरानी कर रहे डॉक्टरों की सहमति के बिना उन्हें मुंह या नस के जरिए कोई दवा या अन्य चिकित्सा प्रक्रिया न दी जाए।

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Split image: left side shows a man lying in bed with feet visible; right side shows a man with a microphone addressing a crowd on a stage as others applaud nearby.
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने नए सिरे से अनशन शुरू करने का ऐलान किया है। IANS

नई दिल्लीः 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस के अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अनशन शुरू करने का ऐलान किया है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ सीजेपी ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग उठाई है।

गौरतलब है वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस मेडिकल आधार पर सफदरजंग अस्पताल ले गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया और पुलिस के साथ हल्की धक्का-मुक्की भी हुई।

अभिजीत दिपके ने कहा- आंदोलन खत्म नहीं होगा

वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा, “आज से मैं अनशन पर बैठ रहा हूं। 20 जुलाई को संसद मार्च भी होगा और मेरा अनशन जारी रहेगा। सरकार यह सोच रही है कि सोनम सर को यहां से हटाकर आंदोलन खत्म कर देगी, लेकिन ऐसा नहीं होगा। आंदोलन जारी रहेगा।”

दिपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने वांगचुक को जबरन घसीटते हुए अस्पताल पहुंचाया और प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ भी मारपीट की गई और जंतर-मंतर जाने से रोका गया। उन्होंने कहा कि कई सांसदों और विधायकों को भी प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंचने दिया गया। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश, मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह और सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि वांगचुक फिलहाल चिकित्सकीय निगरानी में हैं।

पढ़ेंः सोनम वांगचुक को अस्पताल ले गई पुलिस, कहा-बिगड़ती तबीयत और हाईकोर्ट के आदेश पर उठाया कदम

पुलिस के अनुसार, हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को वांगचुक का नियमित मेडिकल परीक्षण कराने और जरूरत पड़ने पर इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। इसी के तहत उन्हें अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से सरकारी कार्य में बाधा न डालने और सहयोग करने की अपील भी की।

अस्पताल के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा

सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे थे। उनके साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के नेहा, आमीन और मनीष भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक का वजन करीब 9.5 किलोग्राम घट चुका है। वहीं, अनशन पर बैठीं नेहा को गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर का अत्यधिक कम होना) के कारण अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई है। आमीन और मनीष की तबीयत भी लगातार बिगड़ रही है।

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंग्मो भी अस्पताल में मौजूद हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी, परिवार और पिछले 20 दिनों से वांगचुक की निगरानी कर रहे डॉक्टरों की सहमति के बिना उन्हें मुंह या नस के जरिए कोई दवा या अन्य चिकित्सा प्रक्रिया न दी जाए। उन्होंने एक्स पर बताया कि वह अस्पताल में मौजूद हैं और वांगचुक की सेहत पर पूरी नजर रख रही हैं। डॉक्टरों के मुताबिक वांगचुक की सभी जरूरी स्वास्थ्य संकेत सामान्य हैं।

उधर, सफदरजंग अस्पताल के भीतर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि समर्थक अस्पताल के अंदर न पहुंच सकें। अस्पताल प्रशासन की सहायता के लिए पैरामेडिकल स्टाफ को भी तैनात किया गया है।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे “गुंडागर्दी” करार देते हुए कहा कि सरकार को वांगचुक की मांगें सुननी चाहिए थीं, न कि उन्हें जबरन अस्पताल ले जाना चाहिए था।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे व्यक्ति को जबरन हटाना लोकतंत्र और संविधान पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं कर रही।

समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का है। उन्होंने सरकार से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।

वहीं, नगीना से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार बताते हुए कहा कि पहले पूर्व सैनिकों और महिला पहलवानों के आंदोलनों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया गया था।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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