नई दिल्ली: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शुक्रवार (17 जुलाई) को जंतर-मंतर पर क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से मुलाकात की। उन्होंने वांगचुक से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया क्योंकि उनकी सेहत बिगड़ रही थी। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर शिक्षा सुधारों की मांगों पर बातचीत करने से इनकार करने का आरोप भी लगाया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की थी।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक NEET पेपर लीक विवाद समेत परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं।
सोनम वांगचुक से जंतर-मंतर मिलने पहुंचे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा
वांगचुक और प्रदर्शनकारियों से मिलने के बाद, खेड़ा ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना एक संवैधानिक अधिकार है और यह किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उन नागरिकों से बात करे जो अपनी बात मनवाने के लिए उपवास का सहारा लेते हैं।
खेड़ा ने X पर एक पोस्ट में कहा कि ” लोकतंत्र में, शांतिपूर्ण विरोध एक संवैधानिक अधिकार है। जब नागरिक अपनी बात रखने के लिए उपवास करते हैं तो सरकार का कर्तव्य है कि वह उनकी बात सुने – न कि नजरअंदाज करे। यही राजधर्म है। “
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार के रवैये की तुलना पिछली सरकारों के रवैये से करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1984 में और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने 2011 में मतभेदों के बावजूद प्रदर्शनकारियों से बातचीत की थी।
उन्होंने कहा कि ” श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने 1984 में यही किया था। डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने 2011 में यही किया था। वे समझते थे कि सरकार की पहली ज़िम्मेदारी बातचीत करना है, भले ही असहमति हो।”
सरकार ने लगाया आरोप
खेड़ा ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों की ओर से शिक्षा में सुधार की मांगों के प्रति “उदासीनता” का रवैया अपनाया है।
उन्होंने कहा कि ” हालांकि, इस सरकार ने उदासीनता का रास्ता चुना है। इसने शिक्षा में सुधार की मांगों पर बात करने से इनकार कर दिया है – चाहे ये मांगें देश भर में श्री राहुल गांधी और NSUI व IYC कार्यकर्ताओं ने उठाई हों या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने। ऐसी उदासीनता न केवल अहंकारपूर्ण है, बल्कि यह संवेदनहीन और लोकतंत्र के लिए पूरी तरह से अनुचित है। “
इस दौरान खेड़ा ने वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि भूख हड़ताल जारी रखने से ज्यादा जरूरी आंदोलन की लीडरशिप को बचाए रखना है।
उन्होंने कहा कि ” आज मैंने कांग्रेस पार्टी की ओर से जंतर-मंतर पर श्री सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनसे अपील की कि वे अपनी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अपना अनशन खत्म कर दें। अपने लोगों को खोने से आंदोलन मजबूत नहीं होता। हम आगे भी लड़ने के लिए जिंदा रहेंगे। “
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