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इंग्लैंड पर रोमांचक जीत के बाद अर्जेंटीना की टीम के जश्न पर क्यों हुआ विवाद? फीफा कर सकता है कार्रवाई

फॉकलैंड द्वीपों को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच दशकों पुराना संप्रभुता का विवाद है। फॉकलैंड दरअसल अर्जेंटीना के अटलांटिक तट के पास द्वीपों का एक समूह है, लेकिन यह एक ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र के रूप में काम करता है।

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Argentina Football
फोटो- IANS

फीफा विश्व कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में बुधवार देर रात इंग्लैंड को 2-1 से हराकर फाइनल में पहुंची अर्जेंटीना की टीम का जश्न विवादों में आ गया है। मैच के ठीक बाद टीम के कुछ खिलाड़ियों ने मैदान पर लास माल्विनास सन अर्जेंटीना (Las Malvinas Son Argentinas) लिखा हुआ बैनर लहराया। इस लाइन का मतलब है- ‘फॉकलैंड अर्जेंटीना का है।’

अर्जेंटीना के डिफेंडर लिसांड्रो मार्टिनेज और जियोवानी लो सेल्सो इंग्लैंड के खिलाफ रोमांचक मैच खत्म होने के बाद यह बैनर हाथ में लेकर समर्थकों की ओर मुस्कुराते हुए दिखाई दिए। बैनर पर लिखी बात उन दक्षिण अटलांटिक द्वीपों से जुड़ी है, जिन्हें ब्रिटेन फॉकलैंड आइलैंड्स और अर्जेंटीना इस्लास माल्विनास (Las Malvinas) के नाम से जानता है। इन पर किसका हक है, इसे लेकर लंबे समये से दोनों के बीच विवाद रहा है।

FIFA के नियमों का उल्लंघन!

माना जा रहा है कि अर्जेंटीना के खिलाड़ियों द्वारा मैदान पर वैश्विक राजनीतिक वाले विषय को छेड़ने को लेकर फीफा कार्रवाई कर सकता है। दरअसल, फीफा के स्टेडियम कोड ऑफ कंडक्ट के मुताबिक विश्व कप के दौरान स्टेडियम के अंदर किसी भी तरह के राजनीतिक, आपत्तिजनक या भेदभावपूर्ण संदेश वाले बैनर, झंडे, पोस्टर या अन्य सामग्री के प्रदर्शन की अनुमति नहीं है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह बैनर मैदान तक कैसे पहुंचा। मैच के तुरंत बाद FIFA की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। आशंका है कि यह बैनर कुछ दर्शक लेकर आए होंगे, जिससे यह खिलाड़ियों तक पहुंचा।

क्या है फॉकलैंड (माल्विनास) विवाद?

फॉकलैंड द्वीपों को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच दशकों पुराना संप्रभुता का विवाद है। फॉकलैंड दरअसल अर्जेंटीना के अटलांटिक तट के पास द्वीपों का एक समूह है, लेकिन यह एक ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र के रूप में काम करता है। यह मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में सबसे संवेदनशील विषयों में से एक माना जाता है। साल 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर कब्जा करने के लिए सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच करीब 10 सप्ताह तक युद्ध भी चला।

इस संघर्ष में 649 अर्जेंटीनी सैनिक और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे। आखिरकार ब्रिटेन ने दोबारा इन द्वीपों पर फिर से अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया।

अर्जेंटीना का दावा है कि उसे 1816 में स्पेन से स्वतंत्रता मिलने के बाद इन द्वीपों की संप्रभुता विरासत में मिली थी और ब्रिटेन ने 1833 में अवैध रूप से इन पर कब्जा कर लिया। ब्रिटेन इन द्वीपों का प्रशासन आज भी अपने नियंत्रण में रखता है।

इंग्लैंड और अर्जेंटीना की प्रतिद्वंद्वीता

दोनों टीमों में प्रतिद्वंद्वीता पुरानी रही है। हालांकि, बहुत कम मौकों पर ही दोनों टीमें आमने-सामने आई हैं। वर्ल्ड कप में दोनों टीमें 24 साल बाद एक-दूसरे के खिलाफ खेल रही थीं। यही नहीं, इससे पहले इंग्लैंज और अर्जेंटीना ने आखिरी बार एक फ्रेंडली मैच 2005 में खेला था। दिलचस्प ये भी है कि अपने देश अर्जेंटीना के लिए 200 से ज्यादा मैच खेल चुके लियोनेल मेसी ने भी पहली बार इंग्लैंड का सामना 2026 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में किया।

बहरहाल, बुधवार को टीम की सेमीफाइनल में जीत के बाद अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया विलारुएल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘फॉकलैंड अर्जेंटीना का है। उन्होंने स्टेडियम में इन्हें लाने पर रोक लगा दी और भूल गए कि ये हमारे खून और हमारे दिलों में बसे हैं।’

सेमीफाइनल से पहले भी अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया विलारुएल ने कहा था कि इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला सिर्फ एक फुटबॉल मैच नहीं है। उन्होंने कहा कि यह फॉकलैंड (माल्विनास) द्वीपों से जुड़ी भावनाओं, डिएगो माराडोना की विरासत और लियोनेल मेसी के आखिरी विश्व कप से भी जुड़ा है। उन्होंने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि अर्जेंटीना अपनी आखिरी सांस तक फॉकलैंड द्वीपों पर अपना दावा करता रहेगा और टीम को पूरे जोश के साथ खेलना चाहिए।

इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच इन्हीं पुराने राजनीतिक और ऐतिहासिक विवाद को देखते हुए यह सेमीफाइनल कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच खेला गया।

वैसे यह पहली बार नहीं है जब 2026 फीफा विश्व कप के दौरान ऐसे किसी राजनीतिक मुद्दे ने सुर्खियां बटोरी हों। इससे पहले ईरान के मैचों के दौरान कई ईरानी-अमेरिकी समर्थकों ने इस्लामी क्रांति से पहले वाला राष्ट्रीय झंडा लहराया था। इस झंडे को मौजूदा ईरानी सरकार के विरोध का प्रतीक माना जाता है। हालांकि इस पर फीफा की ओर से किसी हस्तक्षेप की जानकारी सामने नहीं आई है।

फाइनल में अर्जेंटीना और स्पेन की भिड़ंत

बहरहाल, इन विवादों के बीच मौजूदा विश्व चैम्पियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंच गया है। अटलांटा स्टेडियम में खेले गए दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को 2-1 से हराया।

अर्जेंटीना मैच में 85वें मिनट तक 1-0 से पिछड़ रहा था। हालांकि इसके बाद लियोनेल मेसी के दो शानदार असिस्ट की बदौलत अर्जेंटीना ने अगले 6 मिनट में दो गोल दागे और फाइनल का टिकट कटा लिया। 85वें मिनट में एंजो फर्नांडेज ने लियोनेल मेसी से मिले पास को गोल में तब्दील करते हुए अर्जेंटीना के खेमे को राहत की सांस दिलाई। इसके कुछ ही मिनट बाद मेसी द्वारा दिए गए एक और बेहतरीन पास को लाउतारो मार्टिनेज ने बिना कोई गलती किए हेडर शॉट से गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचाया।

सेमीफाइनल में हार के बाद अब इंग्लैंड तीसरे स्थान के लिए होने वाले मुकाबले में फ्रांस से भिड़ेगा। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के खिताबी मुकाबले में अब अर्जेंटीना का सामना स्पेन से होगा। स्पेन ने पहले सेमीफाइनल में फ्रांस को 2-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई है।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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