वेस्टइंडीज के महान ऑलराउंडर खिलाड़ी सर गारफील्ड सोबर्स का शुक्रवार (17 जुलाई) को निधन हो गया। 89 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से क्रिकेट जगत में शोक की लहर है। वेस्ट इंडीज क्रिकेट बोर्ड, जिसे क्रिकेट वेस्ट इंडीज (सीडब्ल्यूआई) के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पोस्ट के माध्यम से उनके निधन की पुष्टि की है।
क्रिकेट वेस्टइंडीज ने अपने एक्स पर लिखा, “एक शानदार पारी खत्म हो गई है। हमारे दिलों में, अभी और हमेशा के लिए, सर गारफील्ड सोबर्स।”
सर गारफील्ड सोबर्स का जन्म 28 जुलाई 1936 बारबडोस के ब्रिजटाउन में हुआ था। क्रिकेट के मैदान पर उन्होंने एक से एक कीर्तिमान रचे जो उन्हें दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में जगह दिलाता है।
बाएं हाथ के बेहतरीन बल्लेबाज होने के साथ-साथ सोबर्स बाएं हाथ के फास्ट-मीडियम गेंदबाज और स्पिनर के तौर पर भी उतने ही असरदार थे। वहीं, अपनी शानदार एथलेटिक क्षमता के कारण वे अपनी पीढ़ी के बेहतरीन फील्डरों में से एक माने जाते थे। उनकी इसी अद्भुत बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें एक ‘संपूर्ण क्रिकेटर’ के तौर पर वैश्विक पहचान दिलाई।
सर गारफील्ड सोबर्स बैटिंग, बॉलिंग में दिखाया करिश्मा
उन्होंने 16 साल की उम्र में फर्स्ट-क्लास और 18 साल की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया। सोबर्स ने 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ अपनी पहली टेस्ट सेंचुरी को 365 रन की पारी में बदलकर अपनी बैटिंग का हुनर दिखाया, जो उस समय एक रिकॉर्ड था।
1994 में ब्रायन लारा के 375 रन बनाने तक यह टेस्ट क्रिकेट में सबसे बड़ा स्कोर था और यह आज भी किसी खिलाड़ी की पहली टेस्ट सेंचुरी के तौर पर सबसे बड़ा स्कोर है।
इस पारी के साथ ही सोबर्स के शानदार दौर की शुरुआत हुई। उन्होंने इसके बाद की पांचों सीरीज में 500 से ज्यादा रन बनाए। इसमें उनके कवर-ड्राइव और हुक शॉट खास तौर पर शानदार थे।
इसके बाद 1958-59 के भारत दौरे पर सोबर्स ने तीन शतक लगाए और अगले साल इंग्लैंड के खिलाफ 101.28 की औसत से 709 रन बनाए। इस सीरीज में फ्रैंक वॉरेल के साथ 399 रनों की यादगार साझेदारी में उन्होंने 226 रन बनाए जो कुल साढ़े नौ घंटे तक चली।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चुनौती आई और सोबर्स ने फिर कमाल कर दिखाया। उन्होंने ब्रिस्बेन में हुए यादगार टेस्ट मैच (जो इतिहास का पहला टाई टेस्ट था) में 132 रन बनाए और फिर 1961 में SCG में जबरदस्त जवाबी हमला करते हुए 168 रन की पारी खेली। उनकी सबसे बेहतरीन बॉलिंग (6-73) भी ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ थी, जब उन्होंने 1968-69 में ब्रिस्बेन में बॉलिंग की शुरुआत की थी। खास बात यह है कि इस सीरीज में उनकी फिटनेस का भी जबरदस्त नमूना देखने को मिला क्योंकि उन्होंने उमस भरे मौसम में लगातार 22 ओवर (आठ-आठ गेंदों वाले) फेंके।
सोबर्स के सम्मान में दिया जाता है अवार्ड
पुरुषों के क्रिकेट में आईसीसी का सबसे बड़ा सालाना अवॉर्ड सर गारफील्ड सोबर्स अवॉर्ड उनके सम्मान में दिया जाता है और यह सभी फॉर्मेट में पुरुषों के इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे शानदार ओवरऑल परफॉर्मर को पहचान देता है।
1975 में क्रिकेट में उनकी सेवाओं के लिए उन्हें नाइटहुड की उपाधि दी गई थी। उनके निधन पर आईसीसी और बीसीसीआई ने दुख व्यक्त किया है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “खेल को गौरवान्वित करने वाले सबसे महान क्रिकेटरों में से एक, सर गारफील्ड सोबर्स का दुखद निधन हो गया है। हमारी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और वेस्टइंडीज क्रिकेट के साथ हैं। हम एक ‘आईसीसी हॉल ऑफ फेम’ क्रिकेटर को अलविदा कह रहे हैं।”
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भी सर गैरी सोबर्स को श्रद्धांजली दी है।
बीसीसीआई ने एक्स पर लिखा, “बीसीसीआई सर गारफील्ड सोबर्स के निधन पर दुख जताता है। वह खेल के एक सच्चे आइकॉन और क्रिकेट के सबसे महान ऑलराउंडरों में से एक थे। उनकी असाधारण उपलब्धियों, कैरेबियाई क्रिकेट पर उनके स्थायी प्रभाव और दुनिया भर के खेल में उनके योगदान ने एक ऐसी यादगार विरासत छोड़ी है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उनके परिवार, दोस्तों और दुनिया भर के क्रिकेट जगत के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।”
सोबर्स 1954 से लेकर 1974 तक वह वेस्टइंडीज क्रिकेट के सबसे बड़े और भरोसेमंद खिलाड़ी रहे। इस दौरान 93 टेस्ट मैचों की 160 पारियों में 26 शतक और 30 अर्धशतक लगाते हुए उन्होंने 8,032 रन बनाए थे। उनका सर्वाधिक स्कोर नाबाद 365 रन था। इसके अलावा 235 विकेट भी सोबर्स ने लिए थे। सोबर्स ने एक वनडे भी खेला था। इसमें उन्होंने 1 विकेट लिया था। सर गैरी सोबर्स को सर गारफील्ड सोबर्स के नाम से भी जाना जाता है।
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(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)



