Home विश्व अमेरिका-ईरान 60 दिन के संघर्ष विराम पर सहमत! खुल सकता है होर्मुज...

अमेरिका-ईरान 60 दिन के संघर्ष विराम पर सहमत! खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेटः रिपोर्ट

अमेरिकी वेबसाइट ‘एक्सियोस’ की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच ’60-डे डील’ (60 दिनों का संघर्ष विराम विस्तार) को लेकर मसौदा लगभग तैयार है।

0
iran-will-destroy-in-one-night-trump-threaten-after-rejection-of-ceasefire, ईरान, अमेरिका, डोनाल्ड ट्रंप
फोटोः आईएएनएस

वाशिंगटनः पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। लंबे टकराव के बाद अब अमेरिका और ईरान एक ऐतिहासिक और बड़े समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। अमेरिकी वेबसाइट ‘एक्सियोस’ की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच ’60-डे डील’ (60 दिनों का संघर्ष विराम विस्तार) को लेकर मसौदा लगभग तैयार है।

इस संभावित समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को दोबारा खोलने, ईरान को तेल बेचने की अनुमति देने और उसके परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति बन सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में इन संभावनाओं की ओर इशारा किया है, वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने भी सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि “एमओयू पर काम जारी है।”

क्या है प्रस्तावित ’60-डे डील’ का मसौदा?

एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, इस 60 दिनों की संघर्ष विराम अवधि के दौरान निम्नलिखित शर्तों पर काम हो सकता है:

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना: बिना किसी टोल शुल्क के इस संकरे समुद्री मार्ग को जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। ईरान उन समुद्री बारूदी सुरंगों (माइंस) को भी हटाने पर सहमत होगा जो उसने कथित तौर पर यहाँ बिछाई हैं।

प्रतिबंधों में ढील और तेल की बिक्री: इसके बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अपने प्रतिबंध हटाएगा और कुछ अन्य छूट देगा, जिससे ईरान स्वतंत्र रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल बेच सके। इसके साथ ही ईरान के फ्रीज (जमा) पड़े फंड्स को जारी करने पर भी बातचीत होगी।

परमाणु कार्यक्रम पर रोक: मसौदे के अनुसार, ईरान यह लिखित प्रतिबद्धता देगा कि वह कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। वह अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को सस्पेंड करने और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने पर बातचीत करने को तैयार है। ईरान ने मध्यस्थों के जरिए इस बात के मौखिक आश्वासन भी दिए हैं।

इजराइल-हिज्बुल्लाह संघर्ष पर विराम: इस समझौते के तहत इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच भी संघर्ष थमेगा। हालांकि, अगर हिज्बुल्लाह कोई हमला करता है, तो इजराइल को जवाबी कार्रवाई का अधिकार होगा। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, “अगर हिज्बुल्लाह शांत रहता है, तो इजराइल भी शांत रहेगा। इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की अपनी घरेलू राजनीतिक चिंताएं हैं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप को वैश्विक अर्थव्यवस्था के हितों को देखना है।”

ये भी पढ़ेंः व्हाइट हाउस के बाहर फिर गोलीबारी, मारा गया हमलावर; 10 पॉइंट्स में समझें क्या-क्या हुआ?

ईरानी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

एक तरफ जहाँ अमेरिकी मीडिया इस समझौते को अंतिम रूप में देख रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरानी नेतृत्व बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। शनिवार को तेहरान में पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के साथ हुई एक उच्च स्तरीय मुलाकात में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अपना रुख साफ किया।

राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार पेजेशकियन ने कहा, “वाशिंगटन द्वारा पूर्व में बार-बार समझौतों का उल्लंघन करने, बातचीत के दौरान भी ईरान पर हमले करने और हमारे शीर्ष अधिकारियों की टारगेटेड हत्याएं करने की वजह से ईरानी जनता में अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास है। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ अपने लोगों के कानूनी अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। अमेरिका के साथ हमारा पुराना कड़वा अनुभव हमें बेहद सावधानी बरतने के लिए मजबूर करता है।”

ईरान की ‘नो-कॉम्प्रोमाइज’ शर्तें

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ ने ईरानी वार्ता दल के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया है कि अगर वाशिंगटन लचीलापन नहीं दिखाता, तो यह शांति वार्ता विफल भी हो सकती है। ईरान ने बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए तीन बेहद सख्त और मुख्य शर्तें सामने रखी हैं-

  1. परमाणु कार्यक्रम पर तुरंत चर्चा नहीं: ईरान इस शुरुआती चरण में अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई सीधी चर्चा नहीं करेगा।
  2. फ्रीज संपत्ति की तुरंत वापसी: कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले अमेरिका द्वारा ब्लॉक की गई ईरान की संपत्ति को तुरंत बहाल किया जाए।
  3. होर्मुज पर संप्रभुता: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का प्रबंधन और नियंत्रण पूरी तरह से जारी रहेगा।

वार्ता की पृष्ठभूमि और व्हाइट हाउस का रुख

गौरतलब है कि ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच इस साल 28 फरवरी को एक भीषण संघर्ष की शुरुआत हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। इसके बाद 40 दिनों तक चली सीधी लड़ाई के बाद 8 अप्रैल को एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी।

इस युद्धविराम के बाद, दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों ने 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता का पहला दौर आयोजित किया था, जो बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हुआ था। तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच मध्यस्थों (जैसे पाकिस्तान और अन्य मित्र देशों) के जरिए कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया जा चुका है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, जब इस ’60-डे डील’ की रिपोर्ट को लेकर व्हाइट हाउस से संपर्क किया गया, तो उनकी तरफ से तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं दी गई। हालांकि, दोनों पक्षों के बयानों से साफ है कि अगर तेहरान और वाशिंगटन अपनी शर्तों पर एक बीच का रास्ता निकाल लेते हैं, तो दोनों देशों के रिश्तों को रीसेट होने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़ी राहत मिलने का यह सबसे बड़ा मौका होगा।

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version