तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार को ऐसा भूचाल आया जिसने दशकों पुराने द्रविड़ राजनीतिक समीकरणों को हिला दिया। महज 2 साल पहले बनी अभिनेता जोसेफ सी. विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
रुझानों और अब सामने आ रहे नतीजों के मुताबिक 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके 18 सीटें जीत चुकी है और 91 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, यानी पार्टी कुल 109 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े 118 से सिर्फ 9 सीट दूर है। यह प्रदर्शन इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि टीवीके ने बिना किसी बड़े गठबंधन के चुनाव मैदान में उतरकर यह बढ़त हासिल की है।
सत्तारूढ़ डीएमके को इस चुनाव में बड़ा झटका लगता दिख रहा है। पार्टी 8 सीटें जीतने के साथ 52 सीटों पर आगे है और कुल 60 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। वहीं एआईएडीएमके 3 सीटें जीत कर 42 सीटों पर आगे चल रही है। यानी पार्टी 45 सीटों पर बढ़त के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गई है।
अन्य दलों में पीएमके 5 सीटों, कांग्रेस 5 सीटों (1 जीती, 4 पर बढ़त), सीपीआई 3, आईयूएमएल 2, वीसीके 2, भाजपा 2 और सीपीआई(एम) 2 सीटों पर आगे चल रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर मौजूदा रुझान बरकरार रहते हैं तो तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बन सकती है। ऐसे में सरकार गठन के लिए विजय को छोटे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
बहुमत नहीं मिलने पर TVK के पास क्या होगा विकल्प?
मौजूदा रुझानों को देखते हुए सरकार गठन में डॉ. अंबुमणि रामदास की अगुवाई वाली पीएमके और कांग्रेस की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। पीएमके पांच सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, वहीं कांग्रेस भी पांच सीटों पर आगे चल रही है। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं तो त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनने पर ये किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी संकेत दिए हैं कि अगर टीवीके बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे रह जाती है, तो पार्टी समर्थन देने पर विचार कर सकती है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान ही लेगा।
टीवीके के राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के उभरने के बीच विजय के पिता और वरिष्ठ फिल्मकार एसए चंद्रशेखर ने भी कांग्रेस को खुलकर टीवीके के साथ आने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता से दूर रहने के कारण लगातार कमजोर होती गई है। अब वक्त आ गया है कि कांग्रेस अपनी खोई ताकत वापस हासिल करे और विजय उसे यह अवसर देने के लिए तैयार हैं।
याद हो कि विजय ने अपने पहले राज्यस्तरीय सम्मेलन में ही सहयोगी दलों के साथ सत्ता साझा करने का प्रस्ताव देकर राजनीतिक हलकों को चौंका दिया था। उस समय किसी बड़े दल ने उनकी पेशकश पर गंभीरता नहीं दिखाई थी, लेकिन अब बदले हुए चुनावी समीकरणों में वही विजय सरकार गठन की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।
राजनीतिक हलचल के बीच यह खबर भी सामने आई है कि टीवीके ने महाबलीपुरम में एक रिजॉर्ट बुक कराया है, जहां जीतने वाले विधायकों को रखा जा सकता है, ताकि संभावित जोड़-तोड़ की कोशिशों से बचा जा सके। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

