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केरल विधानसभा में पहली बार भाजपा के खाते में तीन सीटें, कहां-कहां मिली जीत?

केरल में 2016 में नेमोम विधानसभा सीट पर भाजपा को जीत मिली थी। हालांकि, 2021 के चुनाव में यह सीट भी हाथ से जाती रही। इस बार पार्टी को तीन सीटों पर जीत मिली है।

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में जबर्दस्त सफलता के बीच भाजपा के लिए केरल विधानसभा चुनाव से भी अच्छी खबर आई है। भाजपा ने केरल विधान सभा चुनाव-2026 में तीन सीटों पर जीत हासिल की है। केरल विधानसभा चुनाव में अपनी एकमात्र जीत के 10 साल बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर राज्य विधानसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी। पार्टी ने तिरुवनंतपुरम के नेमोम और कझाकूट्टम सहित कोल्लम के चट्टानूर से जीत हासिल की है।

केरल चुनाव में इस बार सत्ता परिवर्तन की लहर चली है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने राज्य में शानदार जीत दर्ज की और इस तरह 10 साल से चला आ रहा एलडीएफ का शासन खत्म हो गया है।

केरल में भाजपा के लिए तीन सीट

पिछले 12 सालों से केंद्र में मौजूद भाजपा की केरल में उपस्थिति नगण्य ही रही है। 2016 में नेमोम विधानसभा सीट पर भाजपा को जीत मिली थी। हालांकि, 2021 के चुनाव में यह सीट भी हाथ से जाती रही।

हालांकि, पार्टी के प्रमुख नेता राजीव चंद्रशेखर, जो दो साल पहले राज्य की राजधानी से लोकसभा चुनाव हार गए थे, इस बार नेमोम में जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं। उन्होंने मंत्री और सीपीआई (एम) के वी. शिवनकुट्टी को 3590 वोटों हराया। कांग्रेस नेता और पार्षद के.एस. सबरीनाधन तीसरे स्थान पर रहे।

ऐसे ही कझाक्कुट्टम में एक अन्य पूर्व केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन भी विजयी हुए। मुरलीधरन अपने प्रतिद्वद्वी कडाकमपल्ली सुरेंद्रन को 428 वोट से हराने में कामयाब रहे।

जबकि चट्टानूर में भाजपा उम्मीदवार बीबी गोपाकुमार ने कड़े मुकाबले में सीपीआई के आर रजेंद्रन को 4398 वोटों से हराया। यहां कांग्रेस के सूरज रावी तीसरे स्थान पर रहे। गोपाकुमार ने जीत के बाद इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित करते हुए कहा कि यह पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने कहा, ‘जैसा प्रधानमंत्री कहते हैं कि वे एक साधारण कार्यकर्ता हैं, वैसे ही मैं भी जनता के बीच एक कार्यकर्ता के रूप में काम करता रहूंगा।’

यह जीत सिर्फ आंकड़ों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है। चथन्नूर सीट पर भाजपा पिछले दो चुनावों में दूसरे स्थान पर रही थी, लेकिन इस बार उसने रणनीतिक बढ़त हासिल की।

गोपाकुमार का कांग्रेस से भाजपा में आना भी इस जीत में अहम कारक माना जा रहा है। इससे न सिर्फ एंटी-इंकम्बेंसी वोट एकजुट हुए, बल्कि यूडीएफ के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगी।

केरल चुनाव में क्या हुआ?

केरल में इस बार वाम मोर्चा वाले एलडीएफ की विदाई तय हो गई है। पिछले 10 साल से यह गठबंधन शासन में था। साल 2016 में पिनाराई विजयन के नेतृत्व में वाम मोर्चा सत्ता में लौटा था और 2021 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर परंपरा को तोड़ा। इससे वाम राजनीति को नई ऊर्जा के तौर पर देखा जा रहा था।

हालांकि, इस बार कहानी पलट गई है। केरल में कुल 140 विधानसभा सीटों में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) बहुमत हासिल कर रहा है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक यूडीएफ के खाते में 98 सीटें आ रही हैं। वहीं, एलडीएफ करीब 35 सीटों पर सिमटने जा रहा है।

यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल में BJP ने कैसे दिया ममता बनर्जी को झटका, ये हैं जीत की 5 बड़ी वजहें

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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