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केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व में यूडीएफ की बंपर वापसी, 5 प्वाइंट्स में समझिए सारा गणित

 केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व में यूडीएफ की वापसी संभावित है। वहीं, 2016 से सत्ता पर काबिज एलडीएफ काफी पीछे है।

Kerala Assembly Result: दक्षिणी राज्य केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को बंपर बढ़त हासिल है। अभी तक के रुझानों के मुताबिक, कांग्रेस को 63 सीटों पर बढ़त हासिल है। वहीं, उसकी सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को 22 सीटों पर बढ़त हासिल है।

वहीं गठबंधन में शामिल केरल कांग्रेस (KEC) को सात सीटों पर बढ़त हासिल है। इसके अलावा इस गठबंधन में रिवोल्यूशनरी मार्क्सवादी पार्टी भी शामिल है। ऐसे में 140 विधानसभा सीटों में गठबंधन बहुमत के जादुई आंकड़े के काफी आगे है।

एलडीएफ पिछड़ी, 10 साल बाद यूडीएफ की वापसी

भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को सिर्फ दो सीटों पर बढ़त मिली है। ऐसे में जानते हैं कि सत्तारूढ़ एलडीएफ सत्ता से कैसे बाहर हुई और क्या वे वजहें रहीं जिसके चलते यूडीएफ की 10 साल बाद सत्ता में वापसी होती दिख रही है।

वाम सरकार का वैचारिक परिवर्तन

केरलम में यूडीएफ की सत्ता में वापसी सिर्फ सत्ता-विरोधी लहर के चलते नहीं आई है बल्कि आम लोगों में वाम सरकार की पारंपरिक विचारधारा में बदलाव को लेकर भी एक धारणा बनी जिसके चलते 10 साल बाद एलडीएफ सत्ता से बाहर हो गई है। कांग्रेस और गठबंधन ने एलडीएफ को इस तरह से प्रस्तुत किया कि वह राजनैतिक रूप से अस्थिर है। गठबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि एलडीएफ उन्हीं भाषा और रणनीतियों को अपना रही है जिनका कभी विरोध किया था।

यह जमात-ए-इस्लामी के उस विवाद के दौरान विशेष रूप से देखा गया जब सीपीएम नेताओं ने संगठन ने कथित संबंधों को लेकर यूडीएफ पर हमला किया था जिसे विरोधियों ने खुले तौर पर सांप्रदायिक कहा।

राहुल-प्रियंका की अपील

केरलम में यूडीएफ की सत्ता में वापसी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का जनता से व्यक्तिगत जुड़ाव माना जा सकता है। खासकर वायनाड में भूस्खलन के बाद। इस क्षेत्र में सांसद प्रियंका ने कई बार मुआवजे का मुद्दा उठाया। इससे भी जनता का विश्वास हासिल हुआ।

वहीं, राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार के दौरान कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष रूप से बल दिया। इसमें वित्तीय सहायता और सामाजिक सुरक्षा उपायों के वादे भी शामिल थे। इसका उद्देश्य महिला वोटर्स के बीच पहुंच को बढ़ाना था।

अपने ही गढ़ में पिछड़ी एलडीएफ

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, एलडीएफ का किला अपने ही गढ़ में ढह गया है। पेरावूर और कन्नूर इलाकों में कांग्रेस को बढ़त हासिल है। ये क्षेत्र लेफ्ट का गढ़ मानी जाती रही हैं। हालांकि, धर्मदम सीट से मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने करीब 19 हजार वोटों से जीत दर्ज कर ली है।

सत्ता विरोधी लहर के चलते यूडीएफ को मिली बढ़त

राज्य में सत्ता विरोधी लहर का फायदा निश्चित तौर पर यूडीएफ को मिला है। केरलम में शासन व्यवस्था, आर्थिक तंगी और राजनैतिक अहम के आरोपों के चलते वोटर्स की धारणा बदली और वामपंथी दल पिछड़ गए। केरल के वोटिंग पैटर्न को देखें तो राज्य के वोटर्स ने हमेशा बदलाव को प्राथमिकता दी है। सरकारें यहां एक या दो कार्यकाल तक ही सिमट जाती हैं फिर वापसी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

एलडीएफ वैसे भी राज्य में 2016 से सत्ता पर काबिज है ऐसे में इस बार उसके लिए वापसी की राह काफी कठिन थी।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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