नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा जबर्दस्त सफलता हासिल करती नजर आ रही है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार दोपहर 3.15 तक रुझानों में BJP 194 सीटों पर आगे चल रही है। एक पर जीत हासिल कर चुकी है। वहीं, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस 100 सीटों से भी नीचे 91 पर आगे है। जबकि एक पर जीत मिली है। इस लिहाज से बंगाल में भाजपा का सरकार बनना लगभग तय हो चला है।
भाजपा की जीत का मतलब है कि बंगाल एक और बड़े राजनीतिक बदलाव को देखने जा रहा है। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की 15 साल की सत्ता समाप्त होने जा रही है और ये पहली बार है जब राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी। भाजपा की इस ऐतिहासिक को लेकर अब कई तरह के विश्लेषण आने वाले दिनों में होंगे। फिलहाल नजर डालते हैं वो 5 बड़ी नजर आ रही वजहों पर, जिसने बंगाल का रास्ता भाजपा के लिए खोला है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत की 5 बड़ी वजहें
- हिंदू वोट एकजुट करने में सफल रही भाजपा: जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी ने एक न्यूज चैनल एनडीटीवी से बयान में कहा कि ‘पूरा हिंदू एक वोट एकमुश्त हुआ। दीदी ने हिंदुओं पर बहुत अत्याचार किया और अब उन्हीं हिंदुओं ने ईवीएम के जरिए अपना जवाब दिया।’ यह बयान अपने आप में दर्शाता है कि भाजपा हिंदू वोटों को बहुत ज्यादा छिटकने नहीं देने के प्रयास में सफल रही। बंगाल में करीब 30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। तृणमूल की जीत में यह बड़ी भूमिका निभाता रहा है। हालांकि, इस बार हिंदू वोटों का एकजुट होना ममता बनर्जी के मुश्किल बन गया। भाजपा ने बांग्लादेशी घुसपैठ, अल्पसंख्यक तुष्टिकरण जैसे मुद्दे जोरशोर से उठाए और इसका उसे फायदा हुआ। दूसरी ओर अल्पसंख्यक वोटों के बंटने की भी बात आई है, और तृणमूल को नुकसान हुआ।
- महिला वोटों में सेंध: बंगाल में 2026 के चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन के पीछे एक प्रमुख कारण महिला मतदाताओं तक उसकी सफल पहुंच भी है। पार्टी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हमला किया और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए संदेशखाली और आरजी कर मामले जैसी घटनाओं का हवाला दिया। आरजी कर मामले की पीड़िता की मां को भी चुनावी मैदान में उतारा। महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता (3,000 रुपये प्रति माह) के साथ-साथ सुरक्षा का वादा करके भाजपा ने अपनी छवि को मजबूत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह सहित सभी बड़े नेताओं ने महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा पर जोर दिया। कल्याणकारी वादों को सुरक्षा के मजबूत संदेश के साथ जोड़कर, भाजपा का लक्ष्य महिला मतदाताओं के बीच टीएमसी के समर्थन को कम करना था, और इसमें पार्टी सफल रही।
- एंटी-इंकम्बेंसी को भुनाने में सफल: बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन का एक प्रमुख कारण ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ व्याप्त सत्ता विरोधी लहर का लाभ उठाने की उसकी क्षमता भी रही। पार्टी ने चुनाव प्रचार में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और टीएमसी के 15 सालों के शासन के दौरान व्याप्त असंतोष को प्रमुखता से जगह दी। खासकर कानून व्यवस्था भाजपा के चुनावी अभियान का बड़ा केंद्र बना। संदेशखाली और आरजी कर मामले जैसी घटनाओं का जिक्र कर भाजपा ने लगातार पुलिस व्यवस्था और महिला सुरक्षा में कथित विफलताओं को मुद्दा बनाया।
- विकास का मॉडल: भाजपा ने बंगाल में चुनावी कैंपेन में राज्य में अपने विकास के मॉडल को बार-बार रखा। दशकों पहले बंगाल देश और दुनिया में बड़े इंडस्ट्रियल हब के तौर पर जाना जाता था। हालांकि, इसमें समय के साथ गिरावट हुई। भाजपा ने इस मुद्दे को उठाया। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल शासनकाल में राज्य के औद्योगिक पतन की कड़ी आलोचना की और औद्योगिक विकास को बहाल करने के लिए एक नई योजनाएं लाने का वादा किया। उन्होंने विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए “डबल इंजन” वाली सरकार का आश्वासन दिया। यहां तक कि हुगली को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने की भी बात कही।
- ‘बाहरी’ वाले टैग को तोड़ने में कामयाब: ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने पिछले चुनाव और इस बार भी बाहरी बनाम बंगाली का मुद्दा खूब उछाला। भाजपा इस बार ऐसे नैरेटिव को अपने लिए ढालने में कामयाब रही। तृणमूल के आरोपों के जवाब में भाजपा ने खुद को बंगाल की संस्कृति और पहचान से जुड़ा हुआ बताया। इस रणनीति का एक अहम हिस्सा अमित शाह का ‘भूमिपुत्र’ वाला नारा था, जिन्होंने बार-बार कहा कि अगला मुख्यमंत्री बंगाल में जन्म लेने वाला नेता होगा जो राज्य की भाषा और संस्कृति से परिचित होगा। पार्टी ने सांस्कृतिक प्रतीकों का भी भरपूर इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री मोदी और अन्य नेताओं ने रैलियों में अक्सर ‘जय मां दुर्गा’ और ‘जय मां काली’ के नारे लगाए, जिससे हिंदुत्व के संदेश को बंगाली धार्मिक पहचान के साथ मिलाकर मतदाताओं से जुड़ाव स्थापित किया जा सके। इसके साथ ही, भाजपा ने स्थानीय मुद्दों को उठाया, राज्य के नेताओं को बढ़ावा दिया और बंगाली त्योहारों, रिवाजों में भाग लेकर अपनी ‘बंगाल सर्वोपरि’ छवि को मजबूत किया। यही वजह है कि कई भाजपा नेता मछली लेकर प्रचार करते तो कहीं माछ-भात भी खाते नजर आए। पीएम मोदी का झालमुड़ी वाला वीडियो भी खूब चर्चित रहा।
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