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खबरों से आगे: जम्मू-कश्मीर में जोर पकड़ रही नशे के खिलाफ लड़ाई, कई जिलों में कार्यक्रम

जम्मू-कश्मीर में नशे के खिलाफ अभियान के तहत कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की समन्वित कार्रवाई, निगरानी बढ़ाना और जन-जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं, ताकि ड्रग तस्करों और उनके नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

श्रीनगर में रविवार को आयोजित नशा-विरोधी रैली में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 30,000 से अधिक लोग शामिल हुए। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस मौके पर कहा कि नशे से जुड़े अपराध आतंकवाद जितने ही गंभीर हैं, क्योंकि ये युवाओं और समाज को तबाह कर देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर एकजुट होकर लड़ा जाए तो जम्मू-कश्मीर में नशा और नार्को- टेररिज्म को खत्म किया जा सकता है।

कश्मीर डिविजन में यह इस तरह की पहली रैली है और आने वाले दिनों में केंद्र शासित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में ऐसी रैलियां आयोजित किए जाने की संभावना है। जम्मू में पहली नशा-विरोधी रैली के बाद कठुआ, सांबा, उधमपुर और डोडा जिलों में भी इसी तरह की रैलियां आयोजित की जा चुकी हैं।

एलजी सिन्हा ने दोहराया कि प्रशासन केंद्र शासित प्रदेश में नशीले पदार्थों के खतरे को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। जम्मू-कश्मीर और उससे बाहर नशीले पदार्थों के तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा करते हुए उन्होंने नशीले पदार्थों के विशाल नेटवर्क को चलाने वाले बहुराज्यीय गिरोहों की कमर तोड़ने का भी संकल्प लिया।

एलजी सिन्हा के कार्यालय द्वारा नशे के खिलाफ 100 दिन का अभियान चलाया गया है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाना, ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करना और नार्को-टेररिज्म के उभरते खतरे का मुकाबला करना है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में ‘नशा मुक्त अभियान’ के पिछले 25 से अधिक दिनों के दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं। एलजी ने ड्रग तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस की नीति का स्पष्ट संदेश दिया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज के सभी वर्गों के समन्वय से नशे की सप्लाई चेन को तोड़ना होगा। साथ ही, उन्होंने सरकारी अस्पतालों में नशा-पीड़ितों के पुनर्वास की सुविधाएँ शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में पुनर्वास बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नशे के खिलाफ अभियान, एक साथ कई मोर्चों पर प्रयास

अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के तहत कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की समन्वित कार्रवाई, निगरानी बढ़ाना और जन-जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं, ताकि ड्रग तस्करों और उनके नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा स्थानीय समुदायों, स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी विभागों को भी इस अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि आने वाले दिनों में समाज से इस बुराई को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

एलजी सिन्हा ने कहा कि ड्रग्स के खतरे को खत्म करने के लिए अधिकारी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के अनुसार काम कर रहे हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि ड्रग कारोबार में शामिल लोगों की संपत्तियाँ जब्त की जाएंगी, वाहन सीज किए जाएंगे, इमारतें गिराई जाएंगी और बैंक खाते फ्रीज किए जाएंगे, इसके अलावा अन्य कार्रवाई भी की जाएगी।

एलजी ने नशे के दुरुपयोग से लड़ने में सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए युवाओं, नागरिक समाज के सदस्यों और सामुदायिक नेताओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने यह भी दोहराया कि ड्रग तस्करी और उससे जुड़ी गतिविधियों में शामिल लोगों के प्रति प्रशासन जीरो टॉलरेंस की नीति बनाए रखेगा।

एलजी ने कहा, ‘कुछ ड्रग तस्कर नशे के पैसे से नार्को पैलेस खड़े कर रहे हैं। बाद में इसी पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए किया जाता है। हम ऐसे नार्को पैलेस ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ड्रग्स बेचकर बनाई गई संपत्तियों पर कार्रवाई होगी। हम ऐसी संपत्तियों की जांच कर रहे हैं।’ गौरतलब है कि केंद्रशासित प्रदेश के विभिन्न जिलों में चिन्हित संपत्तियों को लगभग रोजाना ध्वस्त किया जा रहा है।

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एलजी ने कहा कि जो नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘ऐसे केंद्रों को बंद भी किया जा सकता है। इस बीच मैंने सरकारी अस्पतालों के ओपीडी और आईपीडी में नशामुक्ति और नशा-पीड़ितों के लिए पुनर्वास सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

100 दिन का एंटी-ड्रग ड्राइव

‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ के तहत 100 दिन का एंटी-ड्रग ड्राइव जारी है, जिसमें पदयात्राएं और रैलियां आयोजित की जा रही हैं। फिलहाल श्रीनगर में एक बड़ी मेगा पदयात्रा चल रही है। अब तक एलजी सिन्हा ने सभी जिला मुख्यालयों पर इन रैलियों का खुद नेतृत्व किया है। सिर्फ बातों तक सीमित न रहकर कई किलोमीटर पैदल चलकर, आम लोगों से संवाद कर और युवाओं से इस घातक नशे की लत से दूर रहने की अपील करते हुए वे इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

Man in an orange kurta waving at a crowd, surrounded by security and officials outdoors.
श्रीनगर में नशा मुक्त जम्मू कश्मीर पहल के तहत मेगा पदयात्रा में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा फोटो आईएएनएस

एलजी सिन्हा ने इससे पहले एक अन्य एंटी-ड्रग रैली में कहा था, ‘नशीली दवाओं के खिलाफ जंग में एकता हमारी ढाल होगी, संकल्प हमारा हथियार। आइए हम एक ऐसे जम्मू कश्मीर को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध हों जहां युवा स्वतंत्र भविष्य का निर्माण करें, परिवार एकजुट रहें, समुदाय मजबूत हों और आकांक्षाएं नए सिरे से जगे। हम अपने युवाओं और अपने भविष्य के लिए अडिग हैं।’

उन्होंने कहा कि नशे की समस्या के खिलाफ लड़ाई में सभी मतभेदों से ऊपर उठकर एकता की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘नागरिकों के रूप में हमें साथ खड़े होने, अपने सामाजिक दायित्व के तहत युवाओं को बचाने, परिवारों को मजबूत करने और समृद्धि सुनिश्चित करने का संकल्प लेना चाहिए।’

हजारों उत्साही स्थानीय लोग एलजी सिन्हा के नेतृत्व में रैलियों में शामिल हुए और नागरिकों से ‘नशा मुक्त जम्मू कश्मीर अभियान’ को मादक पदार्थों के खिलाफ एक साझा युद्ध के तौर पर देखने का आग्रह किया ताकि इस लड़ाई को निर्णायक रूप से जीता जा सके।

उन्होंने कहा, ‘जम्मू कश्मीर अब नए सिरे से ताकत के साथ उठ खड़ा हुआ है ताकि हमारे समाज को खोखला कर देने वाले नशीले पदार्थों के खतरे को खत्म किया जा सके। हम अपने युवाओं को इसके चंगुल से बचाने का संकल्प लेते हैं। मैं लोगों को आश्वस्त करता हूं कि हमारी जमीन की आत्मा को दबाया नहीं जा सकेगा। यह समाज के जागने, लड़ने और विजयी होने का समय है।’

नशे के खिलाफ साझा प्रयास का आह्वान

यह कहते हुए कि कोई भी एक अथॉरिटी अकेले मादक पदार्थों के खिलाफ इस लड़ाई को नहीं लड़ सकता, एलजी सिन्हा ने कहा कि इस मुद्दे को हर दिल में बैठाना होगा। उन्होंने कहा, ‘केंद्र शासित प्रदेश के हर गांव, बस्ती और शहर को प्रतिरोध का गढ़ बना दिया जाए; हर घर को सतर्क गढ़ के रूप में खड़ा किया जाए। मैं प्रत्येक निवासी से इस उद्देश्य में योद्धा बनकर शामिल होने का आह्वान करता हूं।’

समाज के हर वर्ग को नशा-मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान की भावना को अपनाना चाहिए, ताकि यह अभियान उस पहल के रूप में याद किया जाए जिसने केंद्रशासित प्रदेश को इस घातक अभिशाप से मुक्त कराया, जो दीमक की तरह समाज को भीतर से खोखला कर देता है। उन्होंने कहा, ‘हर परिवार को आगे आना होगा, ताकि इतिहास हमारे एकजुट संकल्प, एकजुट संघर्ष और एकजुट होकर मिली जीत को याद रखे, और आने वाली पीढ़ियों के लिए नशीले पदार्थों से मुक्त कल की विरासत छोड़ी जा सके, जो राष्ट्र निर्माण को समर्पित हो।’

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में समाज की सोच बदलनी होगी और नशे की लत में फंसे लोगों को अपराधी नहीं, बल्कि ऐसे पीड़ित के रूप में देखना होगा जो सहानुभूति के हकदार हैं। पुनर्वास के जरिए उनकी गरिमा बहाल कर उन्हें फिर से समाज की मुख्यधारा में जोड़ा जाना चाहिए।

एलजी सिन्हा ने कहा, ‘ड्रग-फ्री जम्मू-कश्मीर अभियान को सामूहिक ऊर्जा से आगे बढ़ाइए। जागरूकता को जवाबदेही में बदलिए, जनता की भागीदारी बढ़ाइए और इस लड़ाई में महिलाओं तथा युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित कीजिए।’

उन्होंने कहा कि नशे के खतरे के खिलाफ यह लड़ाई चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी और हर चरण में साहस और समर्पण की आवश्यकता होगी। एलजी सिन्हा ने बताया कि जागरूकता अभियानों के माध्यम से परिवारों को नशे की लत के लक्षणों और मादक पदार्थों के खतरों के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए, और उन्हें यह भी याद दिलाया जाना चाहिए कि यह खतरा कोई दूर की चीज नहीं, बल्कि हमारे बीच पहले से मौजूद है। नशे के खिलाफ चल रहे इस अभियान के तहत बाइक रैलियां, शिकारा रैलियां और खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं।

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सन्त कुमार शर्मा
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