पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की वोटिंग खत्म होते ही बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। वहीं इन सबके बीच बिहार सरकार ने राजधानी के प्रतिष्ठित संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम बदलकर अब आधिकारिक तौर पर पटना जू कर दिया है।
बिहार में 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, जबकि जनता दल यूनाइटेड के विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। अब सरकार के विस्तार को लेकर 3 मई और 6 मई और 8 मई की तारीख सबसे ज्यादा चर्चा में है।
बिहार में 36 मंत्रियों का है कोटा
बिहार में मुख्यमंत्री सहित कुल 36 मंत्रियों का कोटा है। सूत्रों की मानें तो एनडीए के सभी पांच दल के लिए फॉर्मूला तय हो चुका है। जदयू और भाजपा का कोटा बराबर-बराबर रहेगा। भाजपा से मुख्यमंत्री सहित 16 मंत्री तो जदयू से दोनों उपमुख्यमंत्री सहित 16 मंत्री रहेंगे।
यानी भाजपा से 15 और जदयू से 14 चेहरे भविष्य में मंत्री बनेंगे। इसके साथ ही पुराने फॉर्मूले के अनुसार चिराग पासवान की लोजपा रामविलास से दो मंत्री बनेंगे। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी (रालोमो) से एक और जीतन राम मांझी की पार्टी (हम) से एक मंत्री बनाया जाएगा।
जदयू में कोई विशेष बदलाव की संभावना नहीं है। ज्यादातर पुराने चेहरे कैबिनेट में रह सकते हैं। कुछ नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। भाजपा में भी कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है।
कैबिनेट में किसे-किसे मिल सकता है मौका?
जो संभावित चेहरे हैं उसमें जदयू से दोनों उपमुख्यमंत्री के आलावा श्रवण कुमार, लेशी सिंह, अशोक चौधरी, जमा खान, शीला मंडल, सुनील कुमार, मदन सहनी, रत्नेश सदा, भगवान सिंह कुशवाहा, जयंत राज, ये लोग मंत्री बन सकते हैं। ये सभी पहले भी मंत्री रहे हैं। दूसरी ओर चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत की टीम से आने वाले कुछ विधायक भी मंत्री बन सकते हैं। इसमें चेतन आनंद जैसे युवा चेहरों का भी नाम है।
भाजपा में पुराने चेहरे के साथ-साथ नए चेहरे को ज्यादा मौका मिलने का संकेत दिख रहा है। पार्टी जातीय संतुलन, अनुभव और युवा नेतृत्व को ध्यान में रखकर नाम तय कर सकती है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने संकेत दिया है कि मंत्रिमंडल संतुलित होगा और युवाओं व महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जो संभावित चेहरे हैं उनमें विजय सिन्हा, मंगल पांडेय, रामकृपाल यादव, श्रेयसी सिंह, लखेंद्र पासवान, रमा निषाद, प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, अरुण शंकर प्रसाद, संजय सिंह ‘टाइगर’ का नाम है।
आरएलएम से दीपक प्रकाश फिर से मंत्री बन सकते हैं। इसकी पूरी संभावना है। चिराग पासवान अपनी पार्टी से संजय पासवान और संजय सिंह को दोबारा मौका दे सकते हैं। जीतन राम मांझी की पार्टी हम (HAM) की ओर से संतोष सुमन का नाम लगभग तय है।
क्या चल रहा है बिहार भाजपा में
ऐसी खबरें चल रही है कि बिहार भाजपा के भीतर पुराने भाजपाई और नए भाजपाई के मनमुटाव को लेकर एक तनातनी का माहौल है। ऐसे में माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार में भाजपा किसी तरह का रिस्क नहीं लेने वाली है, जिससे पार्टी के भीतर किसी तरह की सुगबुगाहट हो। भाजपा फिलहाल बैलेंस पॉलिसी पर काम करती दिख रही है। यह भी माना जा रहा है कि नई सरकार में बोर्ड और निगमों, 20 सूत्री में भाजपा अपने उन नेताओं या विधायकों का एडजस्टमेंट कर सकती है, जिन्हें इस बार मंत्री पद मिलने के आसार न के बराबर हैं। भाजपा ऐसा कुछ नहीं करेगी जिससे एक भी नेता नाराज हो। वजह साफ है बिहार में नेता के नाराज होने का मतलब है उसकी जाति का नाराज होना, और भाजपा वोट बैंक की नाराजगी तो मोल नहीं लेना चाहेगी। लोग यह भी कह रहे हैं कि अरविंद शर्मा को एमएलसी के लिए नामित करना इसी कड़ी का हिस्सा है।
नाम बदलने की परंपरा की शुरुआत
पार्टी के भीतर पार्टी की खबरों के बीच बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में नाम बदले की परंपरा की शुरुआत कर दी है। इस कड़ी में बुधवार 29 अप्रैल 2026 को आयोजित कैबिनेट बैठक में राजधानी के दो प्रमुख संस्थानों के नाम बदलने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई थी। इस फैसले के तहत अब संजय गांधी जैविक उद्यान को आधिकारिक रूप से पटना जू के नाम से जाना जाएगा। वहीं संजय गांधी डेरी प्रौद्योगिकी संस्थान का नाम बदलकर अब बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेरी टेक्नोलॉजी कर दिया गया है।
नाम बदलने की वजह?
कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन संस्थानों की स्थानीय पहचान और लोकप्रियता को प्राथमिकता दी। संजय गांधी जैविक उद्यान, जो कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के नाम पर था। आम जनता के बीच हमेशा से पटना जू के नाम से ही मशहूर रहा है। सरकार का मानना है कि इस नाम परिवर्तन से इसकी क्षेत्रीय पहचान और अधिक मजबूत होगी।
पटना जू के बनने की कहानी काफी दिलचस्प है। इसकी शुरुआत 1969 में बिहार के तत्कालीन गवर्नर नित्यानंद कानूनगो की कोशिशों से हुई थी। उन्होंने राजभवन परिसर की करीब 34 एकड़ जमीन एक बोटैनिकल गार्डन विकसित करने के लिए दान दी थी। साल 1970 में बिहार वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर इस उद्यान का काम शुरू किया। बाद में इसमें लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग की जमीनें जोड़ी गईं। जिससे इसका क्षेत्रफल बढ़कर लगभग 153 एकड़ हो गया। 1972 में इसे बायोलॉजिकल पार्क का नाम दिया गया। 1973 में इसे पहली बार आम जनता के लिए खोल दिया गया। 1980 में संजय गांधी की आकस्मिक मृत्यु के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उनके सम्मान में इस जैविक उद्यान का नाम बदलकर संजय गांधी बायोलॉजिकल पार्क कर दिया था। साथ ही 1980 में ही स्थापित डेरी प्रौद्योगिकी संस्थान का नाम भी उनके नाम पर रखा गया। अब लगभग 46 साल बाद मौजूदा कैबिनेट ने इस पुराने फैसले को पलटते हुए इसके मूल और लोकप्रिय नाम पटना जू को आधिकारिक दर्जा दे दिया है।

