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बंगाल में भाजपा की जीत और तृणमूल की हार के बीच कांग्रेस के लिए क्या बड़ी गुड न्यूज है?

बंगाल में भाजपा की जीत जाहिर तौर पर तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। इन सबके बीच ये बड़ा राजनीतिक बदलाव कांग्रेस के लिए भी अहम हो जाता है।

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए ऐतिहासिक लम्हा लेकर आए हैं। ये लगभग स्पष्ट हो चला है कि राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का 15 साल का शासन खत्म होने जा रहा है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार दोपहर 1.15 बजे तक भाजपा 188 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, तृणमूल 92 सीटों पर आगे है।

बंगाल में भाजपा की मिलती नजर आ रही ये जीत जाहिर तौर पर तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। इन सबके बीच ये बदलाव कांग्रेस के लिए भी अहम हो जाता है। कांग्रेस की स्थिति मौजूदा समय में भले ही बंगाल में न तीन में न तेरह वाली है, लेकिन अब जो राजनीतिक समीकरण राज्य में बनेंगे, उससे संभवत: सबसे बड़ा फायदा उसे राष्ट्रीय स्तर पर होगा। साथ ही कांग्रेस के लिए बंगाल में भी भविष्य को लेकर कुछ उम्मीदें जगेंगी।

ममता दीदी की हार कांग्रेस के लिए गुड न्यूज क्यों?

कांग्रेस हालांकि दशकों से बंगाल में सत्ता में नहीं है, फिर भी यह तो है कि उसके कार्यकर्ता कई निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय हैं। ये भी गौर करना चाहिए कि खुद ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी और काफी समय तक पार्टी से जुड़ी रहीं। यही वजह है कांग्रेस के पारंपरिक मतदाता वर्ग का एक हिस्सा अभी भी उनके (ममता बनर्जी) सपोर्ट बेस से मेल खाता हुआ माना जाता है।

कांग्रेस के लिए राज्य में तृणमूल की हार से दो रणनीतिक लाभ होंगे। पहला ये कि इससे ममता की छवि राष्ट्रीय विपक्ष में भी कमजोर होगी। यह डेवलपमेंट कांग्रेस या कह लीजिए कि राहुल गांधी को मिलने वाली सबसे बड़ी चुनौती को खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इंडिया ब्लॉक पर राहुल का दावा और मजबूत होगा। दूसरा ये कि तृणमूल के कमजोरहोने से कांग्रेस को बंगाल में अपनी संगठनात्मक पकड़ फिर से मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

इंडिया ब्लॉक में अभी सबसे बड़ी चुनौती ममता बनर्जी ही रही हैं। इसके अलावा अखिलेश यादव का भी नाम उभरकर आता रहा है लेकिन सपा प्रमुख के सामने अभी खुद ही यूपी में वापसी की चुनौती है। वे 10 साल से सत्ता से बाहर हैं।

क्षेत्रीय पार्टियों की हार…कांग्रेस के लिए फायदा?

तृणमूल की बंगाल में हार एक और लिहाज से कांग्रेस के लिए राहत होगी। दरअसल, व्यापक रूप से देखा जाए तो कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों के धीरे-धीरे कमजोर होने से कांग्रेस को फायदा हो सकता है। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में भाजपा को मजबूती मिली है। यहां क्षेत्रीय पार्टियां का आधार कमजोर हुआ है। बिहार में ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। बिहार में जनयू ने भाजपा के साथ गठबंधन किया है। वहीं, मजबूत माने जाने लाली लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल को लगातार चुनावी हार का सामना करना पड़ा है।

पंजाब का भी उदाहरण ले सकते हैं। हाल में जो उठापटक राज्य सभा सांसदों को लेकर देखने को मिली, इससे आम आदमी पार्टी (आप) की सेहत पर असर पड़ेगा। ये सीधे-सीधे पंजाब सहित दिल्ली में भी कांग्रेस के लिए जमीन तलाशने का मौका मिलने जैसा है। हालांकि भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनी हुई है, लेकिन क्षेत्रीय और छोटे दलों का कमजोर होना उसके लिए नए खुलते रास्ते जैसा है।

यह भी पढ़ें- Bengal Result: पीएम मोदी ने जहां खाई थी झालमुड़ी, उस झाड़ग्राम का क्या है हाल?

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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