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इलेक्शन कमीशन है ‘व्हाट्सऐप कमीशन’, बंगाल चुनाव को बना रहे निशाना; सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने दी दलील

सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को लेकर अपना पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने सीजेआई कांत और अन्य जजों के सामने दलील दी।

नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार, 4 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दलील दी। इस दौरान उन्होंने राज्य में जारी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। अपनी दलील में ममता ने चुनाव आयोग को निशाना बनाते हुए ‘व्हाट्सऐप आयोग’ कहा।

सीएम ममता बनर्जी सफेद ड्रेस और गले में काले स्कॉर्फ में नजर आईं। उन्होंने सीजेआई सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वीएम पंचोली की पीठ के सामने जोरदार ढंग से दलील पेश की। वहीं, दूसरी तरफ से उपस्थित हुए वकीलों के हस्तक्षेप का भी जवाब दिया।

ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी?

ममता बनर्जी ने अपनी दलील की शुरुआत में कहा “मैं उसी राज्य से संबंध रखती हूं।”

इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा “इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए, महोदया!”

बनर्जी ने जवाब दिया कि “आपकी कृपा के लिए बहुत आभारी हूं। जस्टिस बागची और जस्टिस पंचोली को मेरा विनम्र प्रणाम।”

अपनी दलीलें प्रस्तुत करते समय मुख्यमंत्री ने कहा “समस्या यह है कि हमारे वकीलों ने शुरू से ही अपना पक्ष रखा लेकिन जब सब कुछ खत्म हो गया है तो हमें न्याय नहीं मिल रहा है। जब न्याय दरवाजों के पीछे से हो रहा है। हमें कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा है। मैंने चुनाव आयोग को छह बार पत्र लिखे हैं जिनमें सारी जानकारी शामिल है, महोदय लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। महोदय, मैं एक बंधुआ मजदूर की तरह हूं। शायद मुझे इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। मैं एक बहुत ही कम महत्वपूर्ण हूं, मुझे इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। मैं एक आम परिवार से हूं लेकिन अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं।”

इस पर सीजेआई ने टोंकते हुए कहा “महोदया, बनर्जी।”

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा “पश्चिम बंगाल राज्य ने अपने अधिकार से याचिका दायर की है…सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए सर्वश्रेष्ठ कानूनी टीम मौजूद है।”

हालांकि, अदालत ने ममता बनर्जी को अपनी दलील देने की अनुमति दी और राज्य में प्रक्रियात्मक खामियों को स्वीकार करते हुए कहा कि सभी को समाधान खोजने की दिशा में काम करना चाहिए।

उन्होंने (सीजेआई कांत) कहा “हर समस्या का समाधान होता है। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए समाधान की दिशा में प्रयास करना चाहिए कि कहीं कोई निर्दोष नागरिक वंचित न रह जाए।”

ममता बनर्जी ने कहा “यदि आप केवल 5 मिनट की अनुमति दें।”

जस्टिस कांत ने आश्वासन देते हुए कहा “हम आपको 5 नहीं, 15 मिनट देंगे।”

बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, जब चुनाव आयोग के वकील ने दखल दिया तो ममता बनर्जी ने हाथ जोड़ते हुए कहा “कृपया मुझे अनुमति दें सर!”

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने में विफल रहा आयोग

पीठ और चुनाव आयोग के वकील के बीच कुछ देर की बातचीत के बाद बनर्जी ने एक बार फिर से जमीनी स्तर पर आ रही परेशानियों पर जोर देकर बताना शुरू किया।

ममता ने कहा, “उनकी एसआईआर प्रक्रिया केवल नाम हटाने के लिए है, नाम जोड़ने के लिए नहीं।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विवाहित महिलाओं को ससुराल जाने या पति का सरनेम इस्तेमाल करने के लिए नोटिस भेजा जा रहा है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि चुनाव आयोग तार्किक विसंगति सूची के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने में विफल रहा है।

बनर्जी ने आगे कहा “बंगाल के लोग इस बात से बहुत खुश हैं कि इस अदालत ने आदेश दिया है कि आधार कार्ड को प्रमाण पत्र के रूप में माना जाएगा लेकिन उन्होंने ‘नहीं’ कहा। दूसरे राज्यों में निवास प्रमाण पत्र, परिवार पंजीकरण कार्ड, सरकारी आवास कार्ड, स्वास्थ्य कार्ड मान्य हैं…उन्होंने चुनाव से पहले सिर्फ बंगाल को निशाना बनाया। इतनी जल्दी क्या थी? जो काम दो साल में होता है, उसे तीन महीनों में किया जा रहा है जबकि त्योहार और फसल कटाई का मौसम चल रहा है। “

उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चुनावी अधिकारियों की मौतों का मुद्दा भी उठाया। ममता ने जोर देकर कहा कि “उत्पीड़न के कारण क्योंकि बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। असम क्यों नहीं, उत्तर पूर्वी राज्य क्यों नहीं?”

ममता की इस दलील पर जब चुनाव आयोग के वकील ने आपत्ति की तो सीजेआई कांत ने कहा “महोदया, बोलने के लिए इतनी दूर से आई हैं।”

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत आधार कार्ड जैसे मुद्दों पर टिप्पणी नहीं कर पाएगा क्योंकि एसआईआर को कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है।

इसके बाद सुनवाई आगे बढ़ी और ममता बनर्जी ने बीच-बीच में अपनी बात रखी। इसी दौरान एक मौके पर ममता ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप आयोग’ कहा, जो स्पष्ट रूप से मैसेजिंग ऐप के माध्यम से चुनावी अधिकारियों को निर्देश भेजने की ओर तैयारी कर रहा था। अदालत ने आश्वासन दिया कि यह हस्तक्षेप करेगी और निर्देश जारी करेगी।

बनर्जी ने हाथ जोड़ते हुए अपनी दलील पूरी की और कहा “हम बहुत आभारी हैं।”

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि हम इसका प्रैक्टिकल हल निकालने की कोशिश करेंगे। मामले में सोमवार को अगली सुनवाई होगी।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम समाधान निकालेंगे। जो असली मतदाता हैं, उनका अधिकार कोई नहीं छीन सकता है। हम जिम्मेदारी से नहीं भागेंगे।

बेंच ने चुनाव आयोग से कहा कि नामों में गड़बड़ी के आधार पर मतदाताओं को नोटिस भेजते समय सावधानी बरतें।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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