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वैश्विक खेल आयोजनों में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए दरवाजे खुले हैं, द्विपक्षीय सीरीज नहीं: भारत

यह अधिसूचना ऐसे महत्वपूर्ण समय पर आई है जब भारत खुद को एक वैश्विक खेल केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। भारत ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी पेश करने में भी जुटा है।

नई दिल्ली: पाकिस्तान के साथ खराब संबंधों के बीच भारत ने दोनों देशों के बीच खेल प्रतियोगिताओं को लेकर अपनी नीति आधिकारिक तौर पर साफ कर दी है। भारत ने कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ी और टीमें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए आ सकते हैं। साथ ही यह नीति भी स्पष्ट की गई है कि दोनों देशों के बीच खेलों में द्विपक्षीय संबंध या सीरीज नहीं होंगे।

खेल मंत्रालय की ओर से 5 मई को जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम में कहा गया है, ‘पाकिस्तानी खिलाड़ी और टीमें भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेंगी।’ साथ ही इसमें खिलाड़ियों, अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय महासंघ के प्रतिनिधियों के लिए अधिक बेहतर वीजा व्यवस्था का भी संकेत दिया गया है।

ज्ञापन में कहा गया है, ‘जहां तक ​​एक-दूसरे के देश में द्विपक्षीय खेल आयोजनों का संबंध है, भारतीय टीमें पाकिस्तान में प्रतियोगिताओं में भाग नहीं लेंगी। न ही हम पाकिस्तानी टीमों को भारत में खेलने की अनुमति देंगे।’ लेकिन साथ ही, इसमें स्पष्ट किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए, ‘हम अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों की प्रथाओं और अपने खिलाड़ियों के हितों का पालन करेंगे।’

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया है कि ‘भारतीय टीमें और खिलाड़ी उन अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेंगे जिनमें पाकिस्तान की टीमें या खिलाड़ी भी शामिल हों।’ इसी प्रकार, पाकिस्तानी खिलाड़ी और टीमें भारत द्वारा आयोजित ऐसे बहुपक्षीय आयोजनों में भाग ले सकेंगी।’

ओलंपिक जैसे खेल आयोजनों की मेजबानी की तैयारी!

भारत की ओर से जो औपचारिक ज्ञापन दिया गया, वह पिछले कुछ सालों से चली आ रही नीतियों के मामले में बहुत अलग नहीं है। हालांकि, फिर भी इसे आधिकारिक तौर पर कहने के मायने अहम है। दरअसल, यह अधिसूचना ऐसे महत्वपूर्ण समय पर आई है जब भारत खुद को एक वैश्विक खेल केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।

भारत 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा और 2036 ओलंपिक और 2038 एशियाई खेलों के लिए जोरशोर से दावेदारी पेश कर रहा है। एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अधिकारी भारत की दावेदारी का मूल्यांकन करने के लिए अहमदाबाद का दौरा करने वाले हैं। भारत 2029 में क्रिकेट चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 में 50 ओवर के विश्व कप की भी मेजबानी करेगा।

इसके अलावा आने वाले महीनों में भारतीय और पाकिस्तान के खिलाड़ी कई बार आमना-सामना होंगे। इसमें जुलाई-अगस्त में राष्ट्रमंडल खेल और सितंबर-अक्टूबर में एशियाई खेल शामिल हैं। इसके अलावा, भारत और पाकिस्तान अगले कुछ महीनों में हॉकी टूर्नामेंट में कम से कम तीन बार एक-दूसरे का सामना करेंगे। इसमें 23 और 26 जून को लंदन में एफआईएच प्रो लीग का मुकाबला और 19 अगस्त को एम्स्टर्डम में विश्व कप का मैच शामिल है।

गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच खेल संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं। पिछले साल एशिया कप और फिर टी20 विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मैचों को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखा गया था।

इसके अलावा पिछले साल अगस्त में बिहार में हुए एशिया कप और दिसंबर 2025 में चेन्नई में जूनियर विश्व कप के लिए पाकिस्तानी हॉकी टीम को वीजा देने पर सरकार को भी आलोचना का सामना करना पड़ा था।

वीजा नियमों को भी आसान बनाने की पहल

सरकार ने वीजा संबंधी लगातार बनी रहने वाली समस्या को भी हल करने के लिए भी कदम उठाए हैं। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा के मुताबिक ही ज्ञापन में कहा गया है कि ‘खिलाड़ियों, टीम अधिकारियों, तकनीकी कर्मियों और अंतरराष्ट्रीय खेल शासी निकायों के पदाधिकारियों’ के लिए वीजा प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।

इसमें यह भी कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय महासंघ के अधिकारियों को ‘उनके आधिकारिक कार्यकाल की अवधि के लिए प्राथमिकता के आधार पर वीजा दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम अवधि पांच वर्ष होगी,’ ताकि ‘अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार सुचारू रूप से आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।’

हाल के वर्षों में पाकिस्तानी या पाकिस्तान मूल के खिलाड़ियों, खेल अधिकारियों के लिए वीजा में देरी और अनिश्चितताओं ने कुछ मौकों पर अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों का ध्यान खींचा है जिससे भारत की मेजबान के दायित्वों पर भी सवाल उठे हैं। माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को तमाम बाधाओं से अलग रखने की घोषणा करके सरकार एक स्पष्ट संदेश खेल की दुनिया को देना चाहती है।

यह भी पढ़ें- राजस्थान रॉयल्स का मालिकाना हक अब मित्तल परिवार के पास, अदार पूनावाला के साथ 15,660 करोड़ रुपये में हुई डील

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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