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पीठ में छुरा घोंपने जैसा…तमिलनाडु में कांग्रेस के TVK को समर्थन पर DMK नाराज

डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने एनडीटीवी से बातचीत में कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यह फैसला न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन के लिए भी गंभीर संकेत देता है।

तमिलनाडु में बड़े सियासी उलटफेर के बाद इंडिया (INDIA) ब्लॉक के दो प्रमुख साथियों, कांग्रेस और डीएमके (DMK) के बीच राज्य में सरकार बनाने को लेकर तलवारें खिंच गई हैं। दरअसल कांग्रेस ने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को सरकार बनाने के लिए समर्थन की पेशकश की है। इस बात को लेकर डीएमके ने नाराजगी जाहिर की है। डीएमके ने कांग्रेस के फैसले को ‘पीठ में छुरा घोंपने वाला’ करार दिया है।

डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने एनडीटीवी से बातचीत में कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यह फैसला न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन के लिए भी गंभीर संकेत देता है। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “कांग्रेस को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में मिली पांच सीटें डीएमके गठबंधन की वजह से मिली हैं। अगर वह हमारे साथ नहीं होती, तो उसका खाता भी नहीं खुलता।”

TVK-BJP नजदीकी का आरोप

डीएमके ने कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाते हुए विजय की पार्टी पर भाजपा के करीब होने का आरोप लगाया। सरवनन ने कहा कि TVK ने कभी भाजपा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुलकर कुछ नहीं कहा।

उन्होंने कहा कि विजय ने अपनी जीत के बाद सबसे पहले जनता या पार्टी कार्यकर्ताओं को नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया। राहुल गांधी ऐसे व्यक्ति का समर्थन कैसे कर सकते हैं? डीएमके का कहना है कि INDIA गठबंधन वैचारिक आधार पर बना है और कांग्रेस का यह कदम उस भावना के खिलाफ है।

कांग्रेस ने क्यों दिया समर्थन?

कांग्रेस ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि तमिलनाडु की जनता ने धर्मनिरपेक्ष सरकार के पक्ष में जनादेश दिया है और पार्टी किसी भी स्थिति में भाजपा या उसके प्रॉक्सी को सत्ता में नहीं आने देना चाहती।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विजय ने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से समर्थन मांगा था। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने तमिलनाडु कांग्रेस इकाई को जनादेश की भावना को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस संविधान और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। तमिलनाडु में भाजपा या उसके सहयोगियों को किसी भी रूप में सत्ता नहीं चलाने दी जाएगी।”

तमिलनाडु में क्या है सीटों का गणित?

2026 विधानसभा चुनाव में दो साल पुरानी विजय की पार्टी TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। हालांकि बहुमत के लिए उसे अभी 10 सीटों की जरूरत है।

स्थिति और जटिल इसलिए है क्योंकि विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है और उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। इससे पार्टी की संख्या घटकर 107 रह जाएगी। साथ ही स्पीकर आमतौर पर विश्वास मत में मतदान नहीं करता, ऐसे में विजय को कम से कम 11-12 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। शपथ के बाद उन्हें तय समय सीमा में विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा।

AIADMK की बैठक पर टिकी निगाहें

उधर, सरकार गठन की संभावनाओं के बीच एआईएडीएमके के नवनिर्वाचित विधायक बुधवार को चेन्नई में बैठक करेंगे।राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी का एक वर्ग TVK को कम से कम एक साल के लिए बाहर से समर्थन देने के पक्ष में है। अगर ऐसा होता है तो विजय के लिए बहुमत हासिल करना आसान हो जाएगा और उनकी सरकार को शुरुआती स्थिरता मिल सकती है।

कांग्रेस पहले ही समर्थन देने को तैयार है। इसके अलावा एआईएडीएमके गठबंधन की सहयोगी पीएमके, जिसने चार सीटें जीती हैं, वह भी समर्थन देने के संकेत दे रही है। चर्चा है कि जल्द ही पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास और विजय की मुलाकात हो सकती है। विजय पहले ही गठबंधन सरकार के लिए सहमति जता चुके हैं, जिससे छोटे दलों को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना बढ़ गई है।

तमिलनाडुः विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया, वेणुगोपाल बोले- कांग्रेस से समर्थन की मांग की

इस बीच चर्चा यह भी है कि कांग्रेस समर्थन के बदले नई कैबिनेट में दो मंत्री पद चाहती है। जब डीएमके प्रवक्ता से पूछा गया कि क्या यह कदम कांग्रेस-डीएमके के दशकों पुराने गठबंधन का अंत साबित होगा, तो उन्होंने कहा कि यह फैसला अब कांग्रेस को करना है। दरअसल, चुनाव से पहले ही तमिलनाडु में सत्ता साझेदारी को लेकर कांग्रेस और डीएमके के बीच तनाव की खबरें थीं। डीएमके ने कांग्रेस की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग ठुकरा दी थी। रिपोर्टों की मानें तो विजय 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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