आयरलैंड के खिलाफ पहली बार टी20 मैच के साथ-साथ सीरीज गंवाने और फिर इंग्लैंड में भी 0-4 से मिली हार ने टीम इंडिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे ज्यादा सवाल रणनीति, प्लेइंग-11, कोचिंग स्टाफ और हेड कोच गौतम गंभीर की सोच पर उठ रहे हैं। ऐसा इसलिए कि यह तो लगभग साफ है कि अभी टी20 मुकाबलों के दौरान टीम में जो कुछ बदलाव, प्लेइंग-11 का चयन वगैरह हुआ, उसमें बड़ी भूमिका में गौतम गंभीर ही रहे होंगे। दो साल बाद टी20 टीम में वापसी करते ही कप्तानी की जिम्मेदारी संभाल रहे श्रेयस अय्यर की क्या भूमिका रही होगी, इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल नहीं है।
यही वजह है कि गंभीर चर्चा में हैं। टी20 के बाद मंगलवार (14 जुलाई) से इंग्लैंड के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज शुरू हो रही है। उस पर भी नजर होगी, लेकिन पिछले 20-25 दिनों में जो हुआ, उसने भारतीय फैंस को बेहद निराश किया है। गौतम गंभीर के भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के तौर पर दो साल से भी ज्यादा का समय हो चला है।
राहुल द्रविड़ के बाद जब बीसीसीआई ने गंभीर को जिम्मेदारी सौंपी थी, तब टीम टी20 विश्व कप 2024 जीतकर आत्मविश्वास से भरी हुई थी। विराट कोहली और रोहित शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। भारतीय क्रिकेट एक नए दौर में प्रवेश कर रहा था।
पिछले दो वर्षों में भारतीय टीम ने एक तरफ कुछ यादगार उपलब्धियां हासिल की तो दूसरी तरफ कई ऐसे रिकॉर्ड भी अपने नाम किए, जिन्हें शायद वह कभी याद नहीं रखना चाहेगी। गंभीर के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि लगातार दो आईसीसी ट्रॉफियां और एशिया कप जीतना रही, लेकिन दूसरी ओर टेस्ट क्रिकेट में आई गिरावट, विदेशी दौरों पर लगातार असफलता और टीम चयन को लेकर उठे सवालों ने उनके कार्यकाल को सवालों में भी ला खड़ा किया है।
टेस्ट क्रिकेट में सबसे बड़ी गिरावट
अगर गंभीर के दो साल के कार्यकाल की सबसे बड़ी कमजोरी खोजी जाए तो वह सीधे तौर पर टेस्ट क्रिकेट है। गंभीर के कोच बनने के बाद भारत की पहली टेस्ट सीरीज न्यूजीलैंड के खिलाफ थी। इस सीरीज में भारत को अपने ही घर में 0-3 से क्लीन स्वीप झेलना पड़ा। यह पहली बार था जब न्यूजीलैंड ने भारतीय जमीन पर टेस्ट सीरीज जीती। इतना ही नहीं, बेंगलुरु टेस्ट में भारत सिर्फ 46 रन पर सिमट गया, जो घरेलू टेस्ट इतिहास का उसका सबसे कम स्कोर था।
इसके बाद ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2024-25 भारतीय क्रिकेट के लिए एक और बड़ा झटका साबित हुई। भारत 1-3 से सीरीज हार गया। इसी दौरे के दौरान ड्रेसिंग रूम में कुछ मतभेद, खिलाड़ियों को लेकर चर्चाएं और रविचंद्रन अश्विन का बीच सीरीज में संन्यास भी खबरों में रहा।
2025 में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को दो टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-0 से हराया। गुवाहाटी टेस्ट में भारत को 408 रन से हार मिली, जो रनों के लिहाज से टीम के इतिहास की सबसे बड़ी टेस्ट हार थी।
2024 में कोई वनडे नहीं जीता भारत!
सीमित ओवरों के क्रिकेट में गंभीर की कहानी कुछ अलग दिखाई देती है। यहां उनकी उपलब्धियां भी हैं और कुछ बेहद निराशाजनक हार भी। 2024 में श्रीलंका ने भारत को 2-0 से वनडे सीरीज हराकर 27 वर्षों बाद पहली बार किसी द्विपक्षीय वनडे सीरीज में मात दी। उसी सीरीज में भारत पहली बार तीन मैचों की वनडे सीरीज में अपने सभी 30 विकेट गंवाने वाली टीम भी बना।
यही नहीं, 2024 ऐसा साल रहा जब भारत 45 वर्षों में पहली बार पूरे कैलेंडर वर्ष में एक भी वनडे मैच नहीं जीत सका। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत 1-2 से वनडे सीरीज हार गया। मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड की तेज गेंदबाजी के सामने भारतीय बल्लेबाजी संघर्ष करती रही, जबकि युवा गेंदबाजों ने भी भारत को परेशान किया।
घर में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी भारत को 1-2 से हार मिली। घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ यह पहली वनडे सीरीज हार थी। निर्णायक मुकाबले में विराट कोहली के शतक को छोड़ दें तो कोई भी बल्लेबाज प्रभाव नहीं छोड़ सका।
आयरलैंड के खिलाफ भी पहली बार हार
इन प्रदर्शनों के बीच अभी हाल में आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से टी20 सीरीज हार भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े झटकों में एक है। पहली बार भारत आयरलैंड से टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच और फिर पूरी द्विपक्षीय सीरीज हार गया।
इसके तुरंत बाद इंग्लैंड के खिलाफ ट्रेंट ब्रिज में भारत सिर्फ 76 रन पर सिमट गया। 125 रन की हार भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रनों के लिहाज से सबसे बड़ी हार बन गई। इंग्लैंड में हार का सिलसिला जारी रहा और पांच मैंचों की सीरीज में भारतीय टीम को 1-4 से मुंह की खानी पड़ी।
ICC टूर्नामेंटों में कैसा रहा प्रदर्शन?
द्विपक्षीय सीरीज में लगातार झटके खाने वाली भारतीय टीम गंभीर की कोचिंग में बड़े टूर्नामेंटों में संभली हुई नजर आई। भारत ने 2025 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती और 12 साल बाद यह खिताब अपने नाम किया। पाकिस्तान और यूएई की संयुक्त मेजबानी वाले इस टूर्नामेंट में सीमा पार तनाव के कारण भारत ने अपने सभी मुकाबले यूएई में खेले।
इसके बाद 2025 में एशिया कप भी भारत ने अपने नाम किया। यूएई की धीमी पिचों पर गंभीर की स्पिन रणनीति और आक्रामक सोच सफल रही।
सबसे बड़ी उपलब्धि 2026 टी20 विश्व कप रही, जहां भारत लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बना। इसके साथ ही गंभीर भारतीय क्रिकेट इतिहास के पहले ऐसे मुख्य कोच बन गए जिन्होंने शुरुआती दो वर्षों में दो अलग-अलग आईसीसी ट्रॉफियां जीत लीं।
गौतम गंभीर की कोचिंग के साथ विवाद भी
सबसे ज्यादा आलोचना टीम चयन को लेकर हुई है। गंभीर के कार्यकाल में शायद ही कोई ऐसी सीरीज रही हो जिसमें प्लेइंग इलेवन या बल्लेबाजी क्रम को लेकर बड़े बदलाव नहीं हुए हों। टेस्ट से लेकर टी20 तक टीम लगातार बदलती रही। इसका असर यह हुआ कि कई खिलाड़ियों को अपनी भूमिका समझने और टीम में स्थायी जगह बनाने का मौका ही नहीं मिला।
हाल के दिनों में सबसे ज्यादा चर्चा 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को लेकर हुई। आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें आयरलैंड दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया, लेकिन दोनों टी20 मैचों में उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली। कप्तान श्रेयस अय्यर ने तब कहा था कि टीम उन खिलाड़ियों पर भरोसा जता रही है जिन्होंने पहले अच्छा प्रदर्शन किया है और वैभव को मौका जरूर मिलेगा।
वैभव को मौका मिला, लेकिन वो मौके से ज्यादा टीम मैनेजमेंट पर दबाव जैसा लगा। आयरलैंड जैसी कमजोर टीम के सामने मौका न देकर इंग्लैंड दौरे पर वैभव को आखिरकार प्लेइंग-11 में शामिल किया गया, वो भी दूसरे मैच में। लेकिन दो मैच खेलने के बाद उन्हें फिर बाहर बैठा दिया गया। इससे यह बहस और तेज हो गई कि क्या टीम प्रबंधन खिलाड़ियों को पर्याप्त भरोसा दे रहा है या लगातार बदलाव की रणनीति टीम को नुकसान पहुंचा रही हैं।
सूर्यकुमार यादव से श्रेयस अय्यर तक
एक और बड़ा फैसला टी20 कप्तानी को लेकर रहा। यह भी कई क्रिकेट फैंस के गले अब तक नहीं उतरा है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने एशिया कप जीता, टी20 वर्ल्ड कप जीता। ये जरूर है लेकिन सूर्यकुमार का खुद का बल्ला नहीं चल रहा था, लेकिन टीम लय में दिख रही थी। टीम ने श्रीलंका और बांग्लादेश को 3-0 से हराया था। दक्षिण अफ्रीका में 3-1 और इंग्लैंड में 4-1 की सीरीज जीत भी उनके नेतृत्व में मिली थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ 4-1 और ऑस्ट्रेलिया में 2-1 की सफलता भी शामिल कर लीजिए।
इसके बावजूद अचानक श्रेयस अय्यर को टी20 टीम की कप्तानी सौंप दी गई। खास बात यह रही कि अय्यर लगभग दो वर्षों तक टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम से बाहर रहे थे और वापसी करते ही कप्तान बना दिए गए। इस फैसले पर भी सवाल उठ ही रहे हैं।
पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने कहा कि नेतृत्व की जिम्मेदारी ऐसे खिलाड़ी को मिलनी चाहिए जिसकी टीम में जगह निर्विवाद हो। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अय्यर और उपकप्तान तिलक वर्मा (उप-कप्तान) ने लगातार प्रदर्शन के आधार पर यह जिम्मेदारी हासिल की थी। इंग्लैंड के खिलाफ 0-4 की टी20 सीरीज हार के बाद कैफ ने टीम मैनेजमेंट को ‘कन्फ्यूज्ड’ बताते हुए कहा कि वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों के इस्तेमाल में स्पष्ट रणनीति दिखाई नहीं दी।
गौतम गंभीर आखिर क्या खोज रहे हैं?
गंभीर के कार्यकाल की सबसे बड़ी आलोचना यही रही है कि दो साल बाद भी भारत की सर्वश्रेष्ठ प्लेइंग इलेवन तय नहीं दिखती। टेस्ट क्रिकेट में लगातार बदलाव दिखे। सीमित ओवरों में कप्तानी बदली। बल्लेबाजी क्रम बदला। विकेटकीपर बदले। खिलाड़ियों को पर्याप्त समय नहीं मिल रहा।
इसके विपरीत कुछ का मानना है कि भारतीय क्रिकेट इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। रोहित शर्मा, विराट कोहली और रविचंद्रन अश्विन जैसे दिग्गजों के बाद नई टीम तैयार करना आसान नहीं है। अगर 2027 के विश्व कप के लिए तैयारी करनी है तो आज प्रयोग करना जरूरी है।
कुल मिलाकर इन दो वर्षों ने गौतम गंभीर की कोचिंग किसी रोलर कॉस्टर राइड की तरह रही है। एक तरफ उनके नाम लगातार टी20 विश्व कप, चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जैसी बड़ी उपलब्धियां हैं। दूसरी तरफ टेस्ट क्रिकेट में ऐतिहासिक गिरावट, कई हैरान करने वाली हार और चयन नीति पर लगातार उठते सवाल भी हैं।
अब 2027 वनडे विश्व कप से पहले उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी स्थिर टीम तैयार करने की है जिस पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। अगर वह ऐसा कर पाए, तो वाहवाही होगी। अगर नहीं, तो दो आईसीसी ट्रॉफियों के बावजूद उनके कार्यकाल पर उठ रहे सवाल शायद और तेज हो जाएंगे। गंभीर पर एक बड़ा आरोप जिद और अपने हिसाब से चीजों को चलाने का लगता रहा है। इससे भी उन्हें खुद ही निपटना होगा। कहीं ऐसा न हो कि इस नई टीम इंडिया को 2005-07 के ग्रेग चैपल वाले दौर से दोबारा गुजरना पड़े।



