नई दिल्ली: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियां ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आयातोल्ला अली खामेनेई के जनाजे में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। बता दें कि खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में 5 से 9 जुलाई तक होंगी। भारतीय पक्ष ने अभी तक निमंत्रण पर कोई फैसला नहीं लिया है।
इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक ईरान की तरफ से मंगलवार (23 जून) को प्रधानमंत्री को निमंत्रण भेजा गया था लेकिन भारतीय पक्ष ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया है।
इजराइल और अमेरिका के हमलों में आयातोल्ला अली खामेनेई की हुई थी मौत
28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य हमलों में आयातोल्ला अली खामेनेई, उनकी बेटी, दामाद और एक पोते/पोती की मौत हो गई। हालांकि इस्लामी कानूनों के अनुसार मरने वालों को मौत के 24 घंटे के भीतर दफनाया जाना चाहिए लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण खामेनेई का अंतिम संस्कार कई बार टालना पड़ा।
भारत ने ईरानी नेता की मौत पर शोक व्यक्त किया। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास का दौरा किया और सरकार की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से बात की।
खबरों के मुताबिक अंतिम संस्कार 5, 6 और 7 जुलाई को तेहरान और कोम में किया जाएगा। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद शहर में होगा।
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तेहरान, मशहद और कोम में होने वाले इस अंतिम संस्कार में लगभग 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई पाकिस्तानी अधिकारी भी शामिल होंगे। अगर यह संख्या सही साबित होती है तो यह 1989 में ईरान के इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी के अंतिम संस्कार के समय बने 1 करोड़ लोगों के रिकॉर्ड को तोड़ सकता है।
मोजतबा खामेनेई संभाल रहे हैं ईरान की कमान
आयातोल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा होसैनी खामेनेई 8 मार्च से देश के सर्वोच्च नेता के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि उनकी सेहत और वे कहां हैं, इसे लेकर सवाल बने हुए हैं। मार्को रुबियो और पीट हेगसेथ समेत अमेरिका के कई वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि वे कोमा में हैं।
ध्यान देने वाली बात है कि महीनों के टकराव के बाद ईरान और अमेरिका एक शांति समझौते पर सहमत हुए हैं। इस टकराव ने पश्चिम एशिया को संकट में डाल दिया था और दुनिया भर में ईंधन और ऊर्जा की कमी पैदा कर दी थी। पेजेशकियां और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग-अलग डिजिटल समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर किए और दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक चलने वाली शांति वार्ता स्विट्जरलैंड में जारी है।
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