IPL-2026 का रोमांच अब अपने चरम पर है। इस सीजन में फाइनल मिलाकर 74 मैच खेले जाने हैं और 50 हो भी चुके हैं। इस आईपीएल में एक अहम बात ये भी नजर आई कि 265 रन तक के टार्गेट भी हासिल किए गए। बात इतनी भर नहीं रह गई है। अब इस लीग में 220-230 तक के स्कोर बनना या ये लक्ष्य भी हासिल करना लगभग तय लग रहा है। हाई स्कोरिंग मैच, चौके-छक्कों की बरसात, ये सब आईपीएल की पहचान पहले से भी रहे हैं, लेकिन पिछले चार पांच सालों में ऐसा लगता है कि ये लीग यही तक सिमट गया है।
कई फैंस और खेल विश्लेषक इसका सीधा संबंध पिच से जोड़कर देख रहे हैं। फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट लगातार विशाल स्कोरों की बढ़ती संख्या से हैरान भी हैं। वहीं कुछ फ्रेंचाइजी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि घरेलू मैदान का मिलने वाला फायदा अब इस लीग में लगभग खत्म हो चुका है।
ऐसा संभवत: बीसीसीआई द्वारा पिच की तैयारी में फ्रेंचाइजी के हस्तक्षेप को रोकने के लिए उठाए गए कड़े कदमों के कारण ऐसा हो रहा है। इसी का जिक्र दिल्ली कैपिटल्स के कोच हेमांग बदानी ने मंगलवार को किया और अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम की पिच की अनिश्चितता के बारे में बात की।
अपने घर में पांच में से 4 मैच हारी दिल्ली कैपिटल्स!
दिल्ली कैपिटल्स इस सीजन में अपने ही मैदान में पांच में से चार मैच हार चुकी है। चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ अपने ही घर में हार के बाद बदानी ने कहा, ‘भले ही हम यह सोचना चाहें कि पिच हमारे नियंत्रण में है, लेकिन बीसीसीआई का स्पष्ट निर्देश है कि पिचों की देखभाल और उनका प्रबंधन वही करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी स्थानीय टीम को पिचों का फायदा न मिले। इसलिए आपको जो पिच मिलती है, उसी पर खेलना पड़ता है। और हां, दिल्ली में, जो हमारा घरेलू मैदान है, हमें क्या मिलेगा, यही समझने में थोड़ी मुश्किल होती रही है।’
बदानी उदाहरण भी देते हैं और कहते हैं, ‘एक मैच ऐसा भी था जिसमें हमने 75 रन बनाए। एक मैच में 265 रनों का पीछा किया गया। फिर से, यह एक ऐसी पिच थी जिस पर गेंद स्पिन हो रही थी। आदर्श रूप से, आप कुछ स्थिरता चाहते हैं। यह हमारे बारे में नहीं है। मुझे लगता है कि पूरी लीग इस हिसाब से न्यूट्रल हो गई है।’
हाई स्कोरिंग मैच चाहता है बीसीसीआई
कई मीडिया रिपोर्ट में यह कहा जा चुका है कि पिचों के लिए बीसीसीआई द्वारा दी गई सिफारिशों में गेंदबाजों को कम से कम सहायता देने की बात कही गई है। इसे सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड का एक क्यूरेटर स्थानीय क्यूरेटर के साथ मैदान पर मौजूद रहता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी फ्रेंचाइजी का ज्यादा हस्तक्षेप न हो। हाई स्कोरिंग मैचों का दबाव प्रसारकों और प्रायजकों की ओर से भी रहता है कि ताकि दर्शकों को खींचा जाए।
करीब-करीब ये तय रहता है कि पिच में कम ही मूवमेंट हो और ज्यादा स्पिन भी नहीं होनी चाहिए। पिचों पर घास की एक समान परत होनी चाहिए, जिससे सूखी पिचें की स्थिति भी खत्म हो जाती।
एक जैसी पिचें…इससे खेल के रोमांच पर असर
मुश्किल ये है कि कुछ टीमें ऐसी हैं जिनका स्पिन-बॉल आक्रमण मजबूत है। वे थोड़ी धीमी और सुस्त पिचें पसंद करेंगी। कुछ टीमों के पास अच्छी तेज गेंदबाजी है और वे नई गेंद के गेंदबाजों के लिए थोड़ी ज्यादा मदद चाहती हैं। लेकिन अब लगभग सभी पिचें एक जैसी हो गई हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई टीम बाहर जा रही है या अपने घर में खेल रही है। खिलाड़ी सभी मैदानों पर एक जैसी परिस्थितियों को ही देख रहे हैं।
यही वजह है कि वे आईपीएल में बल्लेबाज एक माइंडसेट में नजर आते हैं। वो ये है कि मैदान पर उतरना है और बल्ले से बड़े शॉट लगाना शुरू कर देना है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसी मसले पर एक फ्रेंचाइजी के सदस्य से बात की तो उन्होंने बताया कि ‘यही कारण है कि जब भी गेंदबाजों को थोड़ी सी भी मदद मिलती है, तो शर्मनाक हार देखने को मिलती है। बल्लेबाज इस उम्मीद के साथ मैदान में उतरते हैं कि पिच सपाट और सही होगी। लेकिन जब भी गेंदबाजों को पिच से थोड़ी सी भी मदद मिलती है, तो उन्हें तालमेल बिठाने में मुश्किल होती है।’
कई एक्सपर्ट और फ्रेंचाइजी अधिकारियों सहित कमेंटेटरों का मानना है कि आईपीएल में घरेलू टीमों को पिच के चयन में कुछ हद तक दखल देने का अधिकार होना चाहिए, जैसा कि दूसरी टी20 लीगों और द्विपक्षीय सीरीजों में आम बात है।
पिछले ही साल हर्षा भोगले ने इस पर समर्थन जताते हुए कहा था कि अगर टीमें अपने घरेलू मैदान पर खेल रहीं हैं, तो उन्हें ऐसी पिचें मिलनी चाहिए जो उनके गेंदबाजों के लिए उपयुक्त हों। भोगले ने तर्क दिया कि घरेलू मैदान का फायदा टूर्नामेंट को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि इससे दूसरी टीमों के मैदान पर मैच जीतना कठिन हो जाता है, और इससे आईपीएल की गुणवत्ता बढ़ती है।
वैसे, आईपीएल में पिचों को लेकर बहस नई नहीं है। पिछले कुछ सालों में इस पर काफी बातें होती रही हैं। जरूरत है कि बीसीसीआई और फ्रंचाइजी कोई बीच का रास्ता निकाल सकें। इससे घरेलू मैदान का कुछ फायदा खिलाड़ियों को भी मिलेगा।
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