चेन्नईः तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए नतीजे 4 मई को जारी किए गए। हालांकि, नतीजे किसी भी पार्टी या गठबंधन के पक्ष में बहुमत के रूप में नहीं रहे जिससे सरकार बनाने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। गौरतलब है कि राज्य में विजय की पार्टी टीवीके ने सर्वाधिक 108 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
विजय ने हालांकि राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। हालांकि, 6 मई (बुधवार) और 7 मई (गुरुवार) को राज्यपाल द्वारा यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।
विजय को 118 विधायकों का समर्थन प्राप्त करने के बाद आने को कहा
इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि राज्यपाल ने विजय को 118 विधायकों का समर्थन प्राप्त करने के बाद वापस आने को कहा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि राज्यपाल ने विजय को आश्वासन दिया है कि वे सरकार बनाने के लिए किसी अन्य पार्टी को आमंत्रित नहीं करेंगे। टीवीके को अपने बहुमत के समर्थन में हस्ताक्षर प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिसके बाद विजय शपथ लेंगे। एआईएडीएमके नेता एडप्पाडी के पलानीस्वामी (ईपीएस) ने राज्यपाल से मिलने का समय नहीं मांगा है।
तमिलनाडु के राज्यपाल अर्लेकर के पास अभी भी फैसला लेने के लिए कुछ दिन बाकी हैं क्योंकि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 9 मई को समाप्त हो रहा है। इससे पहले 6 मई को भी विजय ने 112 विधायकों के समर्थन से राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था।
हालांकि विजय को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था जिसके पांच विधायक हैं लेकिन सूत्रों के अनुसार उन्होंने राज्यपाल को मौखिक रूप से सूचित किया कि उन्हें पार्टी का समर्थन प्राप्त है और संख्या बढ़ाने के लिए और समय मांगा।

राज्यपाल अर्लेकर ने कथित तौर पर उनसे कहा कि संख्या अपर्याप्त है और उन्हें 118 विधायकों के समर्थन से वापस आने को कहा, जिससे राजनीतिक प्रयासों का एक नया दौर शुरू हो गया। इस बीच विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) के प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने गुरुवार (7 मई) को राज्यपाल अर्लेकर से विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने और उन्हें सदन में अपना बहुमत साबित करने का मौका देने का आग्रह किया।
वीसीके, सीपीआई, डीएमके ने राज्यपाल से किया आग्रह
क्षेत्रीय मीडिया से बात करते हुए थिरुमावलवन ने आरोप लगाया कि भाजपा तमिलनाडु की राजनीति में हस्तक्षेप कर रही है और भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि विजय सबसे बड़ी पार्टी के नेता के रूप में, उन्हें पदभार ग्रहण करने और बाद में विधानसभा में बहुमत साबित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की तमिलनाडु इकाई ने भी राज्यपाल से संविधान के अनुसार कार्य करने का आग्रह किया और कहा कि शपथ ग्रहण समारोह से पहले विजय से अपना बहुमत साबित करने के लिए कहना “अनुचित” है। राजनीति में एकता का उदाहरण तमिलनाडु में देखने को मिल रहा है जब डीएमके, एमएनएम, वीसीके और सीपीआई सहित कई राजनीतिक दलों ने अभिनेता विजय का समर्थन किया है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164(1) राज्यपाल को मुख्यमंत्री नियुक्त करने का अधिकार देता है। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में, संविधान राज्यपाल को मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार का चयन करने का विवेकाधिकार भी देता है। ऐतिहासिक रूप से, कई राज्यों में राज्यपालों ने सबसे बड़ी पार्टी के नेता को अल्पमत सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है।
राज्यपाल के फैसले को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि कर्नाटक में 2018 के विधासभा चुनाव में बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था। तब भाजपा को 224 सीटों में से 104 सीटें मिली थीं। वहीं, कांग्रेस और जेडीएस ने चुनाव के नतीजों के बाद गठबंधन कर सरकार बनाने के दावा किया था। येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली थी लेकिन फ्लोर टेस्ट के दौरान वह बहुमत सिद्ध करने में असफल रहे। इसके बाद कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी थी। ऐसे में इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या राज्यपाल का फैसला दल विशेष को देखकर होता है।
