तिरुवनंतपुरम: केरल के अगले मुख्यमंत्री का चुनाव करना कांग्रेस हाई कमान के लिए पेचीदा मामला साबित हो सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सीएम पद की रेस में कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल का नाम चल रहा है। कई विधायकों और सांसदों का समर्थन भी वेणुगोपाल के लिए है। हालांकि, पार्टी में उनके प्रतिद्वंद्वी जोर दे रहे हैं कि वेणुगोपाल विधायक नहीं हैं और पार्टी ने चुनाव से पहले सांसदों को मैदान में नहीं उतारने का फैसला किया था।
केरल में सीएम पद के लिए मुख्य रूप से अभी तीन प्रमुख दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। इसमें वेणुगोपाल का नाम तो है ही, साथ ही निवर्तमान विधानसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) वीडी सतीशन और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला भी चर्चा में बने हुए हैं।
कांग्रेस विधायक दल के नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू करते हुए नव निर्वाचित विधायकों ने गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में एआईसीसी पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक की उपस्थिति में बैठक की और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को फैसला लेने के लिए प्रस्ताव पारित किया।
इसके बाद माकन और वासनिक ने विधायकों से एक-एक करके मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, 63 विधायकों में से अधिकांश ने वेणुगोपाल को पसंद बताई, जिन्हें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का भी करीबी माना जाता है। कुछ विधायकों ने अपनी पसंद स्पष्ट नहीं की और उन्होंने पर्यवेक्षकों को बताया कि वे हाई कमान के फैसले का पालन करेंगे।
वहीं, ऐसी भी खबरें हैं कि सतीशान ने साफ कर दिया कि उन्हें मुख्यमंत्री पद के अलावा कोई और पद लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है। वहीं, चेन्निथला समेत कुछ नेताओं ने कथित तौर पर हाई कमान के प्रतिनिधियों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में तीनों उम्मीदवारों के समर्थन और विरोध में लग रहे पोस्टरों और बैनरों को रोकने के लिए कहा है। ऐसा इसलिए कि इससे पार्टी के भीतर कलह जैसी बातें उठ रही हैं।
वेणुगोपाल का नाम आने से बढ़ा कंफ्यूजन?
कुछ मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि वेणुगोपाल को जो समर्थन मिल रहा है, उससे हाई कमान के लिए स्थिति दुविधा वाली बन सकती है। दरअसल, देखा जाए तो सतीशन कांग्रेस और यूडीएफ के चुनावी अभियान का चेहरा थे। पिछले पांच वर्षों से विपक्ष के नेता के रूप में वे पिनारयी विजयन सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए थे। कई लोगों का मानना है कि आम राय में मुख्यमंत्री पद के लिए वे ही प्रबल दावेदार हैं।
इसके अलावा, यूडीएफ की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी, आईयूएमएल (जिसके 22 विधायक हैं) भी उनके पक्ष में है। दूसरी ओर, चेन्निथला तीनों में सबसे वरिष्ठ हैं। इन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में यह बात भी याद दिलाई थी कि 2011 में उन्होंने ओमन चांडी के लिए मुख्यमंत्री पद का रास्ता इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि वे तब सबसे वरिष्ठ थे।
कुल मिलाकर वेणुगोपाल विधायकों की पहली पसंद बताए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री बनाना पेचीदा है। पार्टी को जनता की राय और छवि को भी ध्यान में रखना होगा। कांग्रेस हाई कमान का रुख रहा था कि मौजूदा सांसदों को चुनाव लड़ने की जरूरत नहीं है। अब ऐसे में किसी सांसद को मुख्यमंत्री नियुक्त करने के लिए ठोस वजह की जरूरत होगी। इसके अलावा, पार्टी को वेणुगोपाल के लिए एक सुरक्षित विधानसभा सीट ढूंढनी भी होगी जहां से वे चुनाव लड़ सकें और जीत सकें।
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