नई दिल्लीः भारत अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट की स्थिति की परवाह किए बिना रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखेगा। भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी सुजाता शर्मा ने इस संबंध में बयान जारी किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि वैश्विक ईंधन की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने 18 अप्रैल को एक मीडिया ब्रीफिंग की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में बदलाव के बावजूद कच्चे तेल के आयात को लेकर भारत का नजरिया “स्थिर” बना हुआ है।
रूस से जारी रहेगी तेल खरीद
उन्होंने कहा कि “ रूस पर अमेरिकी छूट के संबंध में, मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगी कि हम पहले भी रूस से तेल खरीदते रहे हैं, छूट से पहले भी, छूट के दौरान भी और अब भी। इसलिए, मूल रूप से यह व्यावसायिक औचित्य है जिसके आधार पर तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को रूसी तेल खरीदना चाहिए।”
बता दें कि मार्च, 2026 में अमेरिका ने रूसी तेलों की खरीद के लिए भारत को छूट दी थी। ये छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो गई। इसके बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। लेकिन उनके बयान के ठीक दो दिन बाद अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 17 अप्रैल को छूट एक और महीने के लिए बढ़ा दिया था। अब इस छूट की समय सीमा खत्म होने के बाद अमेरिका की तरफ से अनिश्चितता बनी हुई है। वाशिंगटन की ओर से अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि छूट को आगे बढ़ाया जाएगा या नहीं।
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घरेलू चिंताओं को किया दूर
18 अप्रैल को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान वरिष्ठ अधिकारी ने ऊर्जा की उपलब्धता को लेकर घरेलू चिंताओं को भी दूर किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं विदेशी भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव और वैश्विक समुद्री रास्तों से जुड़ी समस्याओं के बावजूद मजबूत बनी रहेंगी।
सुजाता शर्मा ने आगे कहा, “कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त कच्चे तेल की व्यवस्था बार-बार की जा चुकी है… और इससे (अमेरिका से) छूट मिले या न मिले, कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”
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गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप होने के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। जानकारों का मानना है कि इस साल के अंत में होने वाले मध्यावधि चुनावों को देखते हुए, डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और इसके परिणामस्वरूप अमेरिका में घरेलू ईंधन की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को रोकने का प्रयास कर रहा है।



