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पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, एक हफ्ते में दूसरी बार बढ़े दाम, जानें नई दरें

सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए हैं। इससे पहले 15 मई को भी ईंधन की कीमतों में इजाफा किया गया था। तब पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर तथा सीएनजी की कीमत में 2 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।

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देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की गई। IANS

पेट्रोल और डीजल के दामों में फिर से इजाफा हुआ है। इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल 86 पैसे और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। नई दरों के लागू होने के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।

अन्य महानगरों की बात करें तो कोलकाता में पेट्रोल 109.70 रुपये और डीजल 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 107.59 रुपये और डीजल 94.08 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 104.49 रुपये और डीजल 96.11 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं यूपी के लखनऊ में अब पेट्रोल 98.40 रुपए प्रति लीटर में मिलेगा। डीजल की कीमत 91.72 रुपए प्रति लीटर हो गई है।

एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार बढ़े दाम

सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। इससे पहले 15 मई को भी ईंधन की कीमतों में इजाफा किया गया था। तब पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर तथा सीएनजी की कीमत में 2 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।

तेल मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, पिछली बढ़ोतरी के बावजूद तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन करीब 750 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी दबाव के चलते कीमतों में फिर संशोधन किया गया।

17 मई को इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने भी सीएनजी के दाम बढ़ा दिए थे। 48 घंटे के भीतर आईजीएल की दूसरी बढ़ोतरी थी। क्योंकि 15 मई को ही पेट्रोल-डीजल के साथ ही सीएनजी के दाम में भी प्रति किलो 2 रुपये की बढ़ोतरी की थी। दिल्ली में सीएनजी 80.09 रुपये प्रति किलो मिल रही है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में इसकी कीमत 88.70 रुपये प्रति किलो हो गई है। 

विपक्ष के सवालों पर भाजपा ने क्या कहा था

तेल के दाम बढ़ाए जाने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला था और इसे महंगाई बढ़ाने वाला कदम बताया था। वहीं, भाजपा के नेताओं ने सरकार के फैसले का बचाव किया था। भाजपा नेताओं का कहना था कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़े असर के बावजूद भारत में आम लोगों पर अपेक्षाकृत कम बोझ पड़ा है।

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भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर लिखा था कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद दुनियाभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और आपूर्ति प्रभावित होने के कारण अप्रैल और मई के अधिकांश समय ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, जिसका असर वैश्विक बाजारों में साफ दिखाई दिया।

उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में 44.5 प्रतिशत और डीजल में 48.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि पाकिस्तान में पेट्रोल 54.9 प्रतिशत और डीजल 44.9 प्रतिशत महंगा हुआ। वहीं, ब्रिटेन में पेट्रोल की कीमत 19.2 प्रतिशत और डीजल 34.2 प्रतिशत बढ़ा।

इन देशों की तुलना में भारत का जिक्र करते हुए अमित मालवीय ने कहा था कि यहां पेट्रोल की कीमतों में 3.2 प्रतिशत और डीजल में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी कम है।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती तेल कीमतों के बीच सरकार ने पहले वाणिज्यिक एलपीजी और अब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि इससे महंगाई पर और दबाव बढ़ेगा।

समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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