पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। घरेलू शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। दिन में कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी करीब 2.15 फीसदी टूटकर 76,503.47 पर बंद हुआ।
वहीं एनएसई निफ्टी-50 भी 516.65 अंक यानी 2.12 फीसदी गिरकर 23,882.64 पर आ गया। पिछले दो महीने से अधिक समय में यह बाजार में एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट है। हाल के दिनों में बाजार में आई तेजी से जो बढ़त नजर आने लगी थी, वह लगभग खत्म हो गई है। व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.7 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद बढ़ा तनाव
जानकारों के मुताबिक गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ युद्धविराम को खत्म मानने की बात कही। यह बयान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के बाद आया, जिनके लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिका ने ईरान में कुछ जगहों पर भारी बमबारी भी की है। जवाब में ईरान की ओर से भी इलाके में कुछ अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की खबरें हैं।
इन घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को फिर बढ़ा दिया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हुई हैं। तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 7 फीसदी की तेज बढ़ोतरी हुई, जिसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर देखने को मिल रहा है।
सभी सेक्टरों में बिकवाली
आंकड़ें बता रहे हैं कि बुधवार की गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रही। लगभग सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स नुकसान में बंद हुए। सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं, आईटी, ऑटो, एफएमसीजी, ऑयल एंड गैस, एविएशन और कैपिटल गुड्स सेक्टर के शेयरों पर रहा। बढ़ते वैश्विक जोखिम के बीच निवेशकों ने मुनाफावसूली की और जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई।
पीएसयू बैंकों के शेयरों में 2.56 प्रतिशत की गिरावट आई, इसके बाद निफ्टी बैंक (-2.40 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-2.42 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (-2.39 प्रतिशत) और निफ्टी मीडिया (-2.33 प्रतिशत) में भी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी ऑयल एंड गैस (-2.13 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (-2.06 प्रतिशत) और निफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर (-2.06 प्रतिशत) में भी बिकवाली का दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। हालांकि, निफ्टी फार्मा में 0.87 प्रतिशत और निफ्टी मेटल में 0.68 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जो अन्य सेक्टर्स की तुलना में कम रही।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें क्यों बढ़ा रहीं चिंता?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। विश्लेषकों के मुताबिक तेल की कीमतों में तेजी से आयातित महंगाई बढ़ने, चालू खाते के घाटे के बढ़ने और कंपनियों की उत्पादन लागत में इजाफा होने की आशंका है। इन चिंताओं ने निवेशकों के भरोसे पर असर डाला है।
बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी सतर्क रुख अपनाया। घरेलू निवेशकों ने भी बाजार में बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई। वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी ने भी भारतीय बाजार के निवेशकों का मनोबल कमजोर किया, जिसके चलते लगभग सभी सेक्टरों में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
अब बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा, विदेशी निवेश के प्रवाह और जून तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों पर रहेगी। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर स्पष्टता नहीं आती और यह साफ नहीं होता कि इसका महंगाई, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर कितना असर पड़ेगा, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
इस बीच भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर का रुख किया है। इससे रुपये डॉलर के मुकाबले 58 पैसे गिरकर 95.55 के स्तर पर पहुंच गया है। मजबूत डॉलर का असर कीमती धातुओं पर भी पड़ा। सोने की कीमत में करीब 1.5 फीसदी और चांदी में 2.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)
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