इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ईरान को लेकर फोन पर अहम बातचीत हुई है। इजराइली सरकारी टीवी चैनल कान टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं ने ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू करने की संभावना पर चर्चा की।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने एक वरिष्ठ इजराइली अधिकारी के हवाले से बताया कि अगर ईरान के साथ युद्ध फिर भड़कता है, तो अमेरिका और इजराइल संयुक्त सैन्य अभियान चला सकते हैं। बातचीत के तुरंत बाद नेतन्याहू ने अपने मंत्रिमंडल की सुरक्षा बैठक बुलाई, जिसमें गाजा, लेबनान और ईरान समेत उन सभी मोर्चों पर चर्चा हुई जहां इजरायल इस समय तनाव का सामना कर रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है, जब ट्रंप लगातार ईरान पर दबाव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, “ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है। उन्हें जल्द फैसला लेना होगा, वरना उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा।”
अप्रैल में हुआ था युद्धविराम
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने एक साथ ईरान पर हमले किए थे। यह संघर्ष करीब 40 दिनों तक चला। बाद में 8 अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी। हालांकि, शांति वार्ता अब तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है।
युद्धविराम के बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी। पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान भी हुआ, लेकिन किसी व्यापक समझौते पर सहमति नहीं बन पाई। पेंच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर फंसा रहा।
स्थाई युद्धविराम के लिए अमेरिका-ईरान ने रखीं कड़ी शर्तें
ईरानी न्यूज एजेंसी फार्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए कई कड़े प्रस्ताव रखे हैं। इनमें ईरान से लगभग 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम हटाकर अमेरिका भेजना, सिर्फ एक परमाणु केंद्र चालू रखने की अनुमति देना और ईरान की जमी हुई संपत्तियों का बड़ा हिस्सा जारी न करना शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि संघर्ष विराम और शांति वार्ता एक साथ आगे बढ़ें।
दूसरी तरफ ईरान ने भी बातचीत बहाल करने के लिए अपनी शर्तें रखी हैं। इनमें सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकना, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाना, उसकी जमी हुई संपत्तियां बहाल करना, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देना और होर्मुज स्ट्रेट पर उसकी संप्रभुता को मान्यता देना शामिल है।
लेबनान को लेकर भी दोनों पक्षों में बड़ा मतभेद बना हुआ है। ईरान चाहता है कि लेबनान में उसके समर्थित संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई रोकी जाए, जबकि इजराइल इस मांग को मानने के लिए तैयार नहीं है।
ट्रंप ने फिर क्या चेतावनी दी है
तनाव के बीच ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान अमेरिका के साथ समझौता नहीं करता, तो उसे बहुत मुश्किल हालात का सामना करना पड़ेगा। फ्रांसीसी मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, अगर ईरान डील नहीं करता, तो उसके लिए बेहद कठिन समय आने वाला है। उन्हें जल्द फैसला लेना चाहिए।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एआई से तैयार एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें वह अमेरिकी नौसेना के एक एडमिरल के साथ तूफानी समुद्र के सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर पर लिखा था, “तूफान से पहले का सन्नाटा।” इजराइली मीडिया के मुताबिक, रविवार को नेतन्याहू से बातचीत के दौरान भी ईरान का मुद्दा दोनों नेताओं के एजेंडे में सबसे ऊपर रहा।
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