उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के 26 साल के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले में अन्य चार दोषियों- नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को भी इसमें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अदालत ने कहा कि इस अपराध को सांप्रदायिक हिंसा के दौरान बेहद क्रूर और अमानवीय तरीके से अंजाम दिया गया।
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) प्रवीण सिंह ने सजा सुनाते हुए कहा, ‘यह अपराध सांप्रदायिक हिंसा के दौरान अत्यंत क्रूरता के साथ अंजाम दिया गया। जिस तरह की बर्बरता दिखाई गई, वह घिनौनी और विचलित करने वाली है।’
कोर्ट ने कहा, ‘अंकित शर्मा के शव को जानवर की तरह घसीटकर नाले में फेंक दिया गया।’ जज ने आगे कहा कि सभी दोषियों ने खुद को परिवार का एकमात्र कमाने वाला बताया, लेकिन अपराध की भयावहता के सामने ऐसी दलील नहीं टिक सकती।
अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो कि दोषियों में हिंसक प्रवृत्ति या इस तरह के अपराध करने की कोई स्वाभाविक प्रवृत्ति थी। कोर्ट ने कहा, ‘मृत्युदंड अंतिम विकल्प होता है। दोषियों को अनुशासित किया जा सकता है और कानून के दायरे में रहने के लिए सुधारा जा सकता है।’
फांसी की मांग कर रही थी दिल्ली पुलिस
इसी सप्ताह सोमवार को दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत से दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की थी। वहीं ताहिर हुसैन की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि मृत्युदंड केवल ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों में ही दिया जाना चाहिए।
बचाव पक्ष ने ताहिर हुसैन के जेल में अच्छे आचरण का हवाला देते हुए कहा कि केवल शरीर पर लगी चोटों की संख्या के आधार पर किसी को फांसी नहीं दी जा सकती।
ताहिर हुसैन की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन, नरूला, सोनल सरदा और शिवांगी शर्मा ने यह भी तर्क दिया कि पूरे मुकदमे के दौरान आपराधिक साजिश का कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि दंगे के दौरान पुलिस खुद भी हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने में विफल रही थी।
क्या है पूरा मामला?
अंकित शर्मा की हत्या के करीब छह साल बाद 13 जुलाई, 2026 को दिल्ली की अदालत ने इस मामले में पांच लोगों को दोषी ठहराया था। पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन को हत्या, दंगा भड़काने समेत कई आरोपों में दोषी ठहराया गया। हालांकि अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश रचने के आरोप से बरी कर दिया था।
दरअसल, 25 फरवरी 2020 को अंकित शर्मा अपने घर चांद बाग से कुछ घर का सामान लेने के लिए निकले थे, जिसके बाद वह लापता हो गए। पुलिस ने जांच के मुताबिक दावा किया कि हिंसक भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया, उनकी हत्या कर दी और शव को एक नाले में फेंक दिया।
पुलिस के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर 51 चाकू के घाव पाए गए थे। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी।
इस मामले में 26 फरवरी 2020 को अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत में ताहिर हुसैन को आरोपी नामित करते हुए आरोप लगाया गया था कि उनकी इमारत से काम करने वाले दंगाइयों ने अंकित शर्मा पर हमला कर उनकी हत्या की थी।
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