वाशिंगटन: भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (31 जुलाई) को बताया कि अमेरिका ने 2025 से अब तक 4,800 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया है, जिनमें इस साल जनवरी और जुलाई के बीच वापस भेजे गए 1,273 लोग भी शामिल हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने दुनिया भर से अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की कार्रवाई तेज कर दी है। यह कार्रवाई पिछले साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पद संभालने के तुरंत बाद शुरू हुई थी। सरकार ने 2025 में संसद में जो आंकड़े पेश किए, उनके मुताबिक पिछले साल अमेरिका से वापस भेजे गए भारतीयों की संख्या पिछले 16 सालों में सबसे ज्यादा थी।
अमेरिका ने 2025 से अब तक कितने भारतीय किये डिपोर्ट?
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक नियमित मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि ” 1 जनवरी 2026 से अब तक अमेरिका से भारत वापस भेजे गए भारतीयों की कुल संख्या 1,273 है। 2025 में, कुल 3,567 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से वापस भेजा गया था। “
अमेरिका से वापस भेजे गए भारतीयों की संख्या के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए जायसवाल ने कहा कि भारत डिपोर्टेशन (वापस भेजने) के मामलों पर कई विदेशी सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि ” जब भी ऐसे मामले हमारे पास आते हैं तो हम डिपोर्टेशन के लिए बताए गए व्यक्ति की नागरिकता की पुष्टि करने के लिए अपनी तरफ से पूरी जांच-पड़ताल करते हैं। जब हम पूरी तरह से संतुष्ट हो जाते हैं कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तभी हम उनकी भारत वापसी में मदद करते हैं। “

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले दिसंबर में संसद को बताया था कि सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों से बात की है ताकि यह पक्का किया जा सके कि डिपोर्ट किए जा रहे भारतीय नागरिकों के साथ बुरा बर्ताव न हो और डिपोर्टेशन वाली उड़ानों में महिलाओं और बच्चों को हथकड़ी या जंजीरों से न बांधा जाए।
गौरतलब है कि बीते साल डिपोर्टेशन (देश से निकाले जाने) के दौरान 73 साल की हरजीत कौर के साथ हुए बुरे बर्ताव और पिछले फरवरी में डिपोर्टेशन वाली फ्लाइट में महिलाओं और बच्चों को बेड़ियों में जकड़ने की घटना ने विवाद खड़ा कर दिया था और भारत ने इन घटनाओं पर औपचारिक रूप से विरोध जताया था।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने क्या बताया?
विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अमेरिका से डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या 2009 के बाद सबसे ज्यादा थी। 2009 में वाशिंगटन ने 734 भारतीयों को वापस भेजा था।
रणधीर जायसवाल ने US सीनेट द्वारा मंजूर किए गए एक नए बिल से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भारत स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। इस बिल के तहत ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों – जैसे चीन और भारत के सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा।
जायसवाल ने कहा, “एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) पर हमारा रुख कई बार साफ़ और अच्छी तरह से बताया जा चुका है। यह हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को अलग-अलग स्रोतों (जिनमें अमेरिका भी शामिल है) से पूरा करने पर आधारित है।”
उन्होंने कहा कि ” हम इस मामले पर अमेरिका में संबंधित लोगों और संस्थाओं के साथ अलग-अलग स्तरों पर बातचीत कर रहे हैं। “
बता दें कि इस बिल में कई तरह के कड़े प्रतिबंध शामिल हैं। इसे इस हफ्ते अमेरिकी सीनेट ने 86 के मुकाबले 12 वोटों से आगे बढ़ाया है और अब यह चर्चा के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा। इस बिल के कारण रूसी ऊर्जा खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर भारी टैरिफ लग सकता है। साथ ही, रूसी अधिकारियों, रईस कारोबारियों, वित्तीय संस्थानों और रूसी तेल की ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले “शैडो फ्लीट” (गुप्त जहाजी बेड़े) पर भी प्रतिबंध लग सकते हैं।
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