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असम में बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 80 पहुंचा, 2.12 लाख से अधिक लोग प्रभावित, राज्य सरकार की क्या तैयारियां हैं?

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Flooded village street with people wading in knee- to waist-deep water and a tractor carrying passengers in the background.
Sivasagar: Monsoon floods inundate villages (IANS)

गुवाहाटी: असम में बाढ़ का संकट अभी भी बना हुआ है। राज्य के आठ जिलों में 2.12 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। इस बीच, बाढ़ की वजहों को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकता राहत और पुनर्वास है। नागालैंड में हुई भारी बारिश की भूमिका पर औपचारिक चर्चा राहत कार्य पूरा होने के बाद की जाएगी।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, गोलाघाट, शिवसागर, विश्वनाथ, चराइदेव, कामरूप (मेट्रो), जोरहाट, धेमाजी और नागांव जिले बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन जिलों के 21 राजस्व मंडलों के 437 गांवों में 2,12,441 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ से 17,198.09 हेक्टेयर कृषि भूमि भी प्रभावित हुई है।

एएसडीएमए ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान शिवसागर जिले में दो और लोगों की मौत हुई है। इसके साथ ही इस वर्ष बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है।

राज्य सरकार ने विस्थापित परिवारों के लिए 21 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि, कामरूप (मेट्रो) जिले के कुछ शहरी इलाकों में अब भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास बना हुआ है, जिससे प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।

इस बीच, एएसडीएमए ने गुरुवार रात एक सार्वजनिक एडवाइजरी जारी कर गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ क्षेत्र में धनसिरी (दक्षिण) नदी से दूर रहने की अपील की है। प्राधिकरण ने कहा कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

बाढ़ का कारण नागालैंड?, हिमंत बिस्वा सरमा ने क्या कहा था

हालिया बाढ़ के लिए नागालैंड में हुई भारी बारिश को जिम्मेदार ठहराए जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस समय किसी पर जिम्मेदारी तय करने का उचित समय नहीं है।

शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उन्होंने कहा कि नागालैंड भी बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित है और वहां भी लोगों को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में अभी राहत और पुनर्वास के कार्यों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

सरमा ने कहा, “संभव है कि सितंबर या अक्टूबर में हम नागालैंड के मुख्यमंत्री से मुलाकात करें और इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करें। तब तक सैटेलाइट तस्वीरों और वैज्ञानिक अध्ययनों से यह स्पष्ट हो जाएगा कि बाढ़ की वास्तविक वजह क्या थी, भविष्य में इसके क्या प्रभाव हो सकते हैं और इससे निपटने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि कई शिक्षाविद और विशेषज्ञ पहले से ही बाढ़ के कारणों का अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन सरकार फिलहाल प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नागालैंड के मोन और मोकोकचुंग जैसे जिले भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसलिए इस समय सभी राज्यों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और देश के अन्य बाढ़ प्रभावित राज्यों के लोगों के प्रति भी सहानुभूति रखनी चाहिए। यह प्रकृति से जुड़ी स्थिति है। कारणों और समाधान पर चर्चा होगी, लेकिन उसका भी एक उचित समय होगा।

गौरतलब है कि हाल ही में असम सरकार ने अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम को बताया था कि चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट में आई बाढ़ अभूतपूर्व थी और इसके पीछे पड़ोसी नागालैंड में हुई अत्यधिक वर्षा एक प्रमुख कारण रही। इसके साथ ही राज्य सरकार ने केंद्र से सात सूत्रीय पुनर्वास योजना को मंजूरी देने और इस बाढ़ को अत्यधिक तीव्रता वाली असामान्य प्राकृतिक आपदा के रूप में मान्यता देने की मांग भी की है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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