पिछले सप्ताह बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पत्नी ममता जी ने मुंगेर जिला में एक सरकारी डिग्री कॉलेज का उद्घाटन किया। साथ ही एक अन्य कॉलेज का निरीक्षण करने गईं। उनके साथ मुंगेर के जिला मजिस्ट्रेट, एसपी और अन्य अधिकारी भी रहे। इस पर विपक्ष के नेताओं ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि श्रीमती चौधरी को भी मुख्यमंत्री के बराबर का आदर सत्कार दिया गया।
वैसे, यह प्रथा अन्य राज्यों में भी प्रचलित है। बिहार में तो मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को अपना उत्तराधिकारी ही बनाया था और वे अभी विधान परिषद में विपक्ष की नेता भी है। एक अन्य मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह की पत्नी मनोरमा देवी उसी लोक सभा क्षेत्र से सदस्य बनी जहाँ से साहेब चुने गए थे। ऐसे ही डॉ जगन्नाथ मिश्र की पत्नी स्वर्गीय वीणा मिश्र को एमए की परीक्षा दिलाने के लिए राज्य सरकार का जहा बिहार विश्वविद्यालय के मुख्यालय मुजफ्फरपुर जाता था। राज्य के कैबिनेट मंत्री के नाम बुकिंग होती थी। मुजफ्फरपुर हवाई अड्डे पर कुलपति, कमिश्नर और डीएम भी उपस्थित रहते थे।
छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी डॉ रेनू जोगी एक सरकारी डाक्टर थी और आँख वाले विभाग की विभाग अध्यक्ष भी। छुट्टी के दिनों में वे ग्रामीण इलाको में आती, रिलीफ कैंप लगातीं और जरूरत के अनुसार चश्मा और दवा निःशुल्क वितरित करती थी। उन्हें पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी राजकीय अतिथि का दर्जा दिया गया था।
पत्नी को विधायक बनाने के लिए विधायक का लिया गया इस्तीफा!
बिहार से सटे झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गांडेय क्षेत्र से अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को विधायक बनाया। इसके लिए तत्कालीन विधायक सरफराज अहमद से इस्तीफा दिलाया गया। इसके बाद उपचुनाव हुए और पत्नी को विधायक बनावाया गया।
अहमद को बाद में राज्य सभा में भेजा गया। अब सभी सरकारी समारोह में पति और पत्नी साथ ही रहते हैं। ओडिशा में जानकी बल्लभ पटनायक ने श्रीमती जयंती पटनायक को भी सांसद बनाया। पति पत्नि का राज्य कांग्रेस पर एकाधिकार था। इसके विपरीत बीजू पटनायक थे।
ऑल इंडिया विमेन कांफ्रेंस का भुवनेश्वर अधिवेशन के उद्घाटन पर उन्होंने कहा था, ‘मेरी पत्नी ज्ञान से मेरा चरित्र जान लेते तो आप मुझे मुख्य अतिथि के रूप में यहाँ नहीं बुलाते।’ उनकी पत्नी कभी भी सार्वजनिक समारोह में मुख्यमंत्री के साथ नहीं रही।
बीजू पटनायक ने श्रीमती पटनायक के बारे में एक कहानी बताई थी। उनके अनुसार, ‘एक बार मेरा पालतू कुत्ता घर से गायब हो गया, उसने मुझे दिल्ली फोन किया तो मैने सुझाव दिया कि नौकर से बोलो खोजने जाय, फिर भी तीन दिन बीत गए, पालतू कुत्ता नहीं आया, तब हमारी श्रीमती ने कमेंट किया- जैसा मालिक वैसा उसका कुत्ता।’ यह बात ऑल इंडिया विमेन कांफ्रेंस में कहीं गई थी।
‘डॉक्टर साहब को कुछ नहीं आता…’
छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के बारे में उनकी पत्नी श्रीमती वीणा सिंह ने धमतरी में पत्रकारों से कह दिया, ‘डॉक्टर साहब को कुछ नहीं आता है, कैसे शासन किया जाता है।’
अगले दिन गोवा के पार्टी सम्मेलन में तत्कालीन अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने डॉक्टर साहब को बुलाकर समझाया, ‘अपनी पत्नी को समझाया करो, क्या बोल दी हैं.’ रमण सिंह ने बताया वह घरेलू महिला है। श्रीमती वीणा सिंह बहुत ही अच्छी होस्ट थी और उनका बनाया खीर बहुत ही स्वादिष्ट होता था।
गुजरात में चिमन भाई पटेल जब मुख्यमंत्री थे, उन्होंने अपनी पत्नी ऊर्मिला बेन पटेल को कांग्रेस की राजनीति में काफी आगे बढ़ाया और श्रीमती पटेल केन्द्र सरकार में राज्य मंत्री बनी थीं। 1998 में मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव हो रहा था, बीजेपी के विधान सभा में प्रतिपक्ष नेता विक्रम वर्मा ने अपनी पत्नी को भी चुनाव लड़ाया। मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से पत्रकारों ने पूछा आप भी अपनी पत्नी को चुनाव में खड़ा करना चाहते है। उनका जवाब था, ‘आशा (उनकी तब की पत्नी) घर में ही ठीक है, वह राजनीति में नहीं आएगी।’
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