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स्पेन के सेउटा में करीब 50,000 प्रवासी घुसे, मोरक्को सीमा पार करते समय 18 की मौत; हालात काबू करने के लिए भेजी गई सेना

Large crowd lined up along a concrete sea wall at the shore, with people standing in the water and on the steps by the beach.
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

मैड्रिड: स्पेन के सेउटा में भारी संख्या में मोरक्को के प्रवासियों ने घुसने की कोशिश की और सफल रहे। इस बीच हालात काबू करने के लिए स्पेन ने सेना भेजी है। हाल के वर्षों में यह सबसे बड़ा सीमा का उल्लंघन देखा जा रहा है। स्पेन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटों में करीब 50,000 प्रवासी सीमा पार करके सेउटा पहुंचे हैं। इस दौरान 18 लोगों की मौत हो गई।

ऐसे में भारी संख्या में प्रवासियों के आने से अधिकारी पूरी तरह बेबस हो गए हैं। इस हालात को देखते हुए सीमा सुरक्षा और स्पेन-मोरक्को के संबंधों पर चर्चा तेज हो गई है। सीमा पार करते समय कम से कम 18 लोगों की सीमा पर लगे अवरोधों को पार करते समय डूबने से मौत हो गई। इन दृश्यों ने यूरोप के देशों के बीच ओपेन बॉर्डर को लेकर भी चिंता खड़ी की है। इन दृश्यों ने 2015 के माइग्रेशन सेंटर की भी यादें ताजा कर दी हैं।

स्पेन में उपजे संकट के चलते बढ़ा राजनीतिक तनाव

स्पेन में उपजे इस संकट के चलते देश के बाहर भी राजनीतिक तनाव को जन्म दे दिया है। इटली ने भी इसको लेकर चिंता जाहिर की है। बता दें कि सेउटा उत्तरी अफ्रीका में है लेकिन इस पर स्पेन का कंट्रोल है और इसकी सीमा मोरक्को से लगती है। इनमें ज्यादातर युवा पुरुष थे लेकिन महिलाओं और बच्चों वाले परिवार भी शामिल थे।

प्रवासियों के शेल्टर में बहुत ज्यादा भीड़ हो जाने के कारण झड़पें भी हुईं। तस्वीरों में सैकड़ों लोगों को सड़कों पर सोते हुए देखा गया।

समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने स्पेन के बॉर्डर गार्ड्स के प्रमुख रशीद स्बिही के हवाले से लिखा कि ” सीमा पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है… हालात पूरी तरह से अराजक हैं। “

बड़े पैमाने पर प्रवासियों के संकट का क्या कारण है?

स्पेन में बड़े पैमाने पर प्रवासियों के आने के संभावित कारणों पर बात करने से पहले हमें सेउटा की भौगोलिक स्थिति को समझना होगा। सेउटा और मेलिला स्पेन के दो स्वायत्त शहर हैं जो अफ्रीका में स्थित हैं। मोरक्को के उत्तरी तट पर बसा सेउटा, जिब्राल्टर जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) के जरिए मुख्य स्पेन से अलग होता है। असल में, सेउटा ही यूरोप और अफ्रीका के बीच जमीन से जुड़ी एकमात्र सीमा है। इसी वजह से यूरोप पहुंचने का सपना देखने वाले प्रवासियों के लिए यह प्रवेश का एक आकर्षक जरिया बन गया है।

बताते चलें कि प्रवास का मुद्दा लंबे समय से मोरक्को और स्पेन के बीच विवाद की वजह रहा है। सेउटा की आबादी मुश्किल से 80,000 है। यह 1580 से स्पेन के शासन में है। हालांकि, मोरक्को सेउटा और मेलिला को स्पेन के कब्जे वाले इलाके मानता है।

स्पेन में भारी संख्या में प्रवास की मुख्य वजह क्या है? अक्सर बेहतर नौकरी के मौकों और रहने-सहने की अच्छी स्थितियों का आकर्षण इन प्रवासियों को अफ्रीका और दूसरे देशों से मुश्किल और खतरनाक सफर करने के लिए मजबूर करता है। बहुत से लोगों के लिए यह उनके अपने देशों में हिंसा और गरीबी से बचने का एक जरिया है।

हालांकि, बीते गुरुवार (30 जुलाई) को इस बड़े पैमाने पर प्रवासियों की संख्या देखने के बाद स्पेन सरकार सवालों के घेरे में है। आलोचकों और विपक्ष ने प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की वामपंथी सरकार पर सीमा नियंत्रण में ढिलाई और आव्रजन नीति में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए बार-बार हमले किए हैं।

स्पेन के सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने तनाव और बढ़ा दिया है। इस महीने की शुरुआत में कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सेउटा या मेलिला पहुंचने की कोशिश के दौरान समुद्र में रोके गए प्रवासियों को तुरंत मोरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता। स्पेन ने आरोप लगाया है कि मानव तस्करी करने वाले नेटवर्क इस आदेश का फायदा उठाकर प्रवासियों को सेउटा के रास्ते यूरोप में घुसने की कोशिश करने के लिए उकसा रहे हैं।

स्पेन में पहले भी गहराया है प्रवास संकट

ऐसा पहली बार नहीं है जब स्पेन को इस तरह के संकट का सामना करना पड़ा है। प्रवासियों, खासकर लैटिन अमेरिकियों को अपनाने की उसकी दशकों पुरानी नीति पिछले कुछ सालों में कई बार उसके लिए मुसीबत बन चुकी है।

स्पेन में प्रवास का संकट 2021 में अपने चरम पर था जब दो दिनों के भीतर 10,000 से ज्यादा लोग सेउटा की सीमा पर पहुंच गए थे। 2022 में, मेलिला (Melilla) में घुसने की कोशिश कर रहे प्रवासियों की भगदड़ में 23 लोगों की मौत हो गई थी। पिछले कुछ सालों में, मोरक्को के फनिदेक (Fnideq) या बेल्यूनेच (Belyounech) कस्बों से – जो लगभग 5-6 किलोमीटर दूर हैं – तैरकर आने की कोशिश में समुद्र में अनगिनत लोगों की जान जा चुकी है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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