नई दिल्ली: कोई भी खेल केवल हार-जीत नहीं होती, कई बार भावनाओं का समंदर समेटे होती है। कुछ ऐसा ही फुटबॉल के साथ है, और इसका उदाहरण चल रहे फीफा वर्ल्ड कप-2026 में देखने को मिला। कई खिलाड़ियों के लिए इतना बड़ा मंच कभी-कभी अधूरे सपनों के सच होने जैसा भी होता है। सपने पूरे भी होते हैं लेकिन कई बार कुछ कसक रह जाती है। फीफा वर्ल्ड कप में सोमवार रात ऐसी ही एक कहानी लिखी गई, जिसने दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों को भावुक कर दिया।
अमेरिका के अटलांटा में जब मुकाबला शुरू हुआ, तो मैदान के एक ओर थी दुनिया की दिग्गज टीम स्पेन। दूसरी ओर था अफ्रीका के पश्चिमी तट के पास स्थित एक छोटा-सा द्वीपीय देश- केप वर्डे। आबादी महज कुछ लाख और फुटबॉल की दुनिया में अपेक्षाकृत अनजान यह देश पहली बार फीफा वर्ल्ड कप खेल रहा था। बहुत से लोगों ने इस देश का नाम भी पहली बार सुना होगा। लेकिन 90 मिनट बाद फुटबॉल की पूरी दुनिया उसे जान चुकी थी।
स्पेन को बराबरी पर रोका…
केप वर्डे ने अपने पहले ही विश्व कप मुकाबले में स्पेन जैसी ताकतवर टीम को 0-0 की बराबरी पर रोक दिया। जबकि माना ये जा रहा था कि स्पेन के सामने केप वर्डे की हार तय है।
दिलचस्प बात ये भी रही इस ऐतिहासिक नतीजे का सबसे बड़ा नायक 40 वर्षीय गोलकीपर वोजिनिया (Vozinha) रहे। स्पेन के लगातार हमलों के बीच उन्होंने सात शानदार बचाव किए। हर बार जब लगा कि गेंद जाल में समा जाएगी, वोजिनिया दीवार बनकर सामने खड़े हो गए। मैच खत्म हुआ तो स्पेन स्तब्ध था और केप वर्डे जश्न मना रहा था।
हालांकि, अंतिम सीटी बजते ही वोजिनिया की आंखों से आंसू बह निकले। ये आंसू एक अधूरेपन के थे। उनकी मां, ऐना कैंडिडा एवोरा उस पल को अपनी आंखों से स्टेडियम में मौजूद रहकर नहीं देख सकी थी।
‘काश मां यहां होती…’
वोजिनिया की मां केप वर्डे के साओ विसेंटे द्वीप पर रहती हैं। वह अमेरिका आकर अपने बेटे को विश्व कप के मंच पर खेलते देखना. चाहती थीं, लेकिन अमेरिकी वीजा प्रक्रिया की आर्थिक बाधाएं उनके रास्ते में खड़ी हो गई थी।
ट्रंप प्रशासन द्वारा जनवरी में लागू किए गए नियमों के तहत केप वर्डे के नागरिकों के अमेरिकी वीजा आवेदन पर विचार किए जाने से पहले 15 हजार डॉलर तक का बॉन्ड जमा करना पड़ता था। हालांकि बाद में विश्व कप टिकट धारकों के लिए इस शर्त में छूट दी गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
मैच के बाद वोजिनिया ने शानदार प्रदर्शन के बावजूद रोने की बात पर कहा, ‘हम समय पर वीजा के लिए जरूरी पैसे का इंतजाम नहीं कर पाए। मैं चाहता था कि मेरी मां यहां होतीं।’ यह बयान दुनिया भर में फैल गया और अब उनकी मां को अमेरिका बुलाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
अगले मैच से पहले मां को अमेरिका बुलाने की तैयारी
अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वोजिनिया की मां को मियामी में उरुग्वे के खिलाफ होने वाला अगला मैच देखने की अनुमति दिलाई जाए। उन्होंने लिखा, ‘कोई भी मां अपने बच्चे को इतिहास रचते देखने का मौका न गंवाए।’
इसी बीच एक क्राउडफंडिंग अभियान भी शुरू हो गया और कुछ ही घंटे में मंगलवार शाम तक इसने जरूरी पैसे जुटाने का अपना लक्ष्य भी पार कर लिया।
अमेरिकी विदेश विभाग कहा है कि उनके पास एवोरा के लिए वीजा आवेदन दाखिल किए जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही विभाग ने पुष्टि की है कि वे मदद के लिए परिवार से सक्रिय रूप से संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के सभी रिश्तेदार वीजा बॉन्ड वेवर (छूट) के लिए पात्र हैं।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार हालांकि एक नई चुनौती यह है कि वोजिनिया की मां के पास फिलहाल वैध सक्रिय पासपोर्ट नहीं है और वह नया पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में हैं।
सोशल मीडिया पर छा गए वोजिनिया
इस पूरी कहानी का एक और दिलचस्प पहलू है, जो बताता है कि खेल किस तरह रातों-रात किसी को दुनिया का चहेता बना सकता है। मैच खत्म होने तक वोजिनिया इंस्टाग्राम पर कम चर्चित खिलाड़ी थे। उनके करीब 40 हजार फॉलोअर थे। स्पेन के खिलाफ उनके शानदार प्रदर्शन और मां से जुड़ी भावुक कहानी ने दुनिया भर के लोगों का दिल जीत लिया। कुछ ही घंटों में उनके फॉलोअर्स की संख्या बढ़कर करीब 60 लाख तक पहुंच गई।
वोजिनिया की अपनी यात्रा भी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। कुछ समय पहले तक वह संन्यास लेने का मन बना चुके थे। लेकिन उनके साथियों ने वर्ल्ड कप तक उन्हें टीम के साथ बने रहने के लिए मनाया। टूर्नामेंट शुरू होने से करीब एक सप्ताह पहले उन्होंने अपना 40वां जन्मदिन मनाया था। अब दुनिया की नजरें मियामी पर हैं, जहां केप वर्डे को उरुग्वे के खिलाफ खेलवा है। ये भी देखना होगा कि क्या इस बार स्टैंड्स में उनकी मां बैठी नजर आएंगी।
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