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शर्मिला जालान समकालीन हिंदी कथाकार हैं। उनके उपन्यास शादी से पेशतर और उन्नीसवीं बारिश तथा कहानी-संग्रह बूढ़ा चाँद, राग-विराग और अन्य कहानियाँ, माँ, मार्च और मृत्यु और साख चर्चित हैं। वे समय-समय पर पुस्तकों पर समीक्षाएँ भी लिखती हैं। उन्हें 2004 में भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार और 2017 में कन्हैयालाल सेठिया सारस्वत सम्मान प्राप्त हुआ।