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मीना झा हिंदी और मैथिली की सक्रिय लेखिका हैं, जो वर्तमान में स्वतंत्र लेखन कर रही हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में हिंदी यात्रा संस्मरण ‘कैदी, क्रिकेट और कंगारुओं के स्वर्णिम देश में’, कथा-संग्रह ‘उत्तरवाहिनी’ और उपन्यास ‘शिलाक्षर बन मेरे मन’ शामिल हैं। उन्होंने प्रसिद्ध लेखिका उषाकिरण खान के महत्वपूर्ण मैथिली उपन्यास ‘पोखरि रजोखरि’ का हिंदी में ‘कथा रजोखर’ नाम से अनुवाद भी किया है। इसके अलावा उनकी कृतियों में ‘मन-माटी की अल्पनाएँ’ (रेखाचित्र), ‘प्रकृतिक सुन्दरतम हस्ताक्षर’ और ‘ईश्वरक शिकार समय’ (दोनों मैथिली कविता-संग्रह) प्रमुख हैं। उनकी हिंदी कहानियाँ और संस्मरण देश की चर्चित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं, वहीं मैथिली की प्रमुख पत्रिकाओं में भी उनकी कई कविताएँ, कहानियाँ, लेख और अनुवाद प्रकाशित हुए हैं।