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इंडिगो संकट के बाद DGCA की कार्रवाई विवादों में, चार अधिकारियों को हटाने पर उठे सवाल

हटाए गए अधिकारियों में ऋष राज चटर्जी (डिप्टी चीफ ऑपरेशंस इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत कंसल्टेंट), सीमा झमनानी (सीनियर FOI), अनिल कुमार पोखरियाल और प्रियाम कौशिक (दोनों कंसल्टेंट FOI) शामिल हैं।

नई दिल्लीः इंडिगो एयरलाइंस में हालिया अव्यवस्था के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा चार फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर्स (FOIs) को हटाने का फैसला अब विवादों में घिर गया है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उड्डयन क्षेत्र के एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने इसे निचले स्तर के अधिकारियों को बलि का बकरा बनाने की कार्रवाई बताया है और पूरे मामले की केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से जांच की मांग की है। हालांकि डीजीसीए का कहना है कि ये अधिकारी एयरलाइंस की निगरानी में विफल रहे।

डीजीसीए के उप निदेशक (प्रशासन) सुनील सिंह रावत द्वारा 11 दिसंबर को जारी आदेश में संविदा पर नियुक्त चार फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर्स को तत्काल प्रभाव से महानिदेशालय से मुक्त कर उनके मूल संगठनों में लौटने को कहा गया। आदेश में यह भी कहा गया कि उन्हें डीजीसीए से जुड़े सभी सिस्टम और आधिकारिक सामग्री लौटानी होगी और उनके आधिकारिक ईमेल आईडी बंद कर दी गई हैं।

हटाए गए अधिकारियों में ऋष राज चटर्जी (डिप्टी चीफ ऑपरेशंस इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत कंसल्टेंट), सीमा झमनानी (सीनियर FOI), अनिल कुमार पोखरियाल और प्रियाम कौशिक (दोनों कंसल्टेंट FOI) शामिल हैं। 1 से 9 दिसंबर के बीच लाखों इंडिगो यात्रियों को हुई परेशानी के बाद यह पहली बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है, जब 1 से 9 दिसंबर के बीच उड़ानों के बड़े पैमाने पर रद्द और विलंबित होने से लाखों इंडिगो यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। इसे संकट के बाद डीजीसीए की पहली ठोस प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है।

एविएशन एक्सपर्ट ने डीजीसीए की कार्रवाई पर उठाए सवाल

हालांकि, इस फैसले पर उड्डयन उद्योग में 40 वर्षों का अनुभव रखने वाले संजय लाजर ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि इंडिगो की वजह से यात्रियों को जो परेशानी झेलनी पड़ी, उसकी असली जिम्मेदारी तय करने के बजाय रेगुलेटर ने निचले स्तर के अधिकारियों को निशाना बनाया है। डीजीसीए ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हटाए गए अधिकारी लंबे समय से इंडिगो की निगरानी के जिम्मेदार थे और वे अपने दायित्व निभाने में विफल रहे।

संजय लाजर ने कहा कि शुरुआत में उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि कार्रवाई की गई है, लेकिन बाद में समझ आया कि ये अधिकारी लो-हैंगिंग फ्रूट हैं और इन्हें जानबूझकर बलि का बकरा बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि अनिल कुमार पोखरियाल ने कुछ महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया था और वह कैंसर से पीड़ित होकर अस्पताल में भर्ती भी रहे हैं।

लाजर ने 2016 की एक घटना का जिक्र करते हुए कैप्टन प्रियाम कौशिक को हीरो बताया। उन्होंने कहा कि 9 साल पहले जब बेंगलुरु से मंगलुरु जा रही जेट एयरवेज की उड़ान में हवा में आग लग गई थी और कौशिक ने एक इंजन में आग के बावजूद विमान को सुरक्षित उतारकर 65 लोगों की जान बचाई थी। उन्होंने यह भी बताया कि कैप्टन कौशिक 2023 में सूडान से चेन्नई तक कावेरी रिपैट्रिएशन ऑपरेशन का भी नेतृत्व कर चुके हैं।

लाजर के मुताबिक, कैप्टन कौशिक ने उनसे कहा कि वह इस मामले में सीधे तौर पर शामिल ही नहीं थे, क्योंकि वह ‘ऑल्टरनेट इंस्पेक्टर’ थे और नियमित इंस्पेक्टर की अनुपस्थिति में ही तैनात किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि वह केवल 6–8 महीने से डीजीसीए में थे और न तो उन्हें इंडिगो से जुड़ा कोई विशेष काम सौंपा गया, न ही कभी बुलाया गया। लाजर ने यह भी कहा कि नाम सार्वजनिक होने के बाद कैप्टन के परिवार को सामाजिक दबाव झेलना पड़ रहा है और उनके बच्चों के लिए घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है।

ऋष राज चटर्जी को लेकर लाजर ने कहा कि वह पहले विस्तारा में डिप्टी चीफ पायलट रह चुके हैं और उनका रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग है। उन्होंने 787 विमान उड़ाए हैं और इंडिगो में खामियों को लेकर डीजीसए को ईमेल के जरिए पहले ही चेताया था। नवंबर में 1,200 उड़ानों के संचालन न होने की जानकारी भी सबसे पहले उन्होंने ही दी थी।

लाजर ने आरोप लगाया कि इन सभी अधिकारियों को बिना किसी औपचारिक पत्र, जांच, कारण बताओ नोटिस या आंतरिक जांच के हटा दिया गया। उन्होंने इसे मनमाना फैसला बताते हुए कहा कि असल जिम्मेदारी दो-तीन शीर्ष अधिकारियों की है, जिनमें संयुक्त महानिदेशक और एक सहायक निदेशक शामिल हैं। उनके अनुसार, डीजीसीए की जांच एक कवर-अप है और जिन अधिकारियों पर इंडिगो को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने के आरोप हैं, वही जांच पैनल में शामिल हैं।

डीजीसीए ने क्या कहा?

इस पूरे विवाद पर डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ये चारों अधिकारी एयरलाइंस की निगरानी और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए ही नियुक्त किए गए थे। अधिकारी के मुताबिक, पोखरियाल नवंबर के आखिर में ही कैंसर के इलाज के लिए मेडिकल लीव पर गए थे और वह अभी भी एलायंस एयर के पायलट हैं।

अधिकारी ने कहा कि कैप्टन कौशिक फरवरी 2025 से डीजीसीए की निगरानी भूमिका में थे, यानी फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों के पहले चरण के लागू होने से काफी पहले। ऋष राज चटर्जी मई 2024 से डीजीसीए में थे और सीमा झमनानी को एक साल से अधिक समय से इंडिगो पर नजर रखने को कहा गया था। अधिकारी ने कहा, “सेलेब्रिटी पायलट होने से कोई अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाता।”

उधर, नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने शुक्रवार को शीतकालीन-कोहरे की अवधि के लिए एयरलाइन की तैयारियों की व्यापक समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी हितधारकों को जवाबदेही तय करने और कोहरे के परिचालन के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रियाएं लागू करने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा, “हर एक यात्री महत्वपूर्ण है और असुविधा के किसी भी उदाहरण को स्पष्ट जवाबदेही के साथ संबोधित किया जाएगा।”

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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