नई दिल्ली: भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक और उपभोक्ता देश है। दूध लाखों भारतीय परिवारों की रोजमर्रा की थाली का अहम हिस्सा है, लेकिन सवाल यह है कि जो दूध हमारे घरों तक पहुंच रहा है, वह कितना शुद्ध है? आज दुनिया विश्व दूध दिवस (World Milk Day-1 जून) मना रही है। इस मौके पर यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि दूध में मिलावट और नकली (सिंथेटिक) दूध का कारोबार समय-समय पर देशभर में सामने आता रहा है। कुछ मौकों पर तो इस मिलावट और नकली दूध के परिणाम बेहद ही भयावह नजर आए हैं।
उदाहरण के लिए इसी साल फरवरी (2026) में आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में लोगों को अचानक उल्टी होने लगी। पेट दर्द, पेशाब पर नियंत्रण न होना और अन्य समस्याएं आने लगी। कई मरीजों में किडनी की खराबी के गंभीर लक्षण दिखने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने जांच शुरू की। एक महीने में 20 लोगों को इन लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनमें से 16 को बचाया नहीं जा सका।
बाद में आधिकारिक प्रेस रिलीज में लेबोरेट्री टेस्ट के रिजल्ट साझा किए गए। इससे पता चला कि 16 मरीजों की मौत एथिलीन ग्लाइकॉल नाम के विषैले पदार्थ से युक्त मिलावटी दूध के सेवन से हुई। इस दूध के सेवन से गुर्दे को गंभीर क्षति पहुंची और कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया।
ऐसी मिलती-जुलती घटनाएं कई और मिल जाएंगी। भारत जाहिर तौर पर दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है। खपत भी वैसी ही है लेकिन इसके साथ मिलावट ने चीजों को और उलझा दिया है। भारत में वैसे दूध ही नहीं अन्य खाद्य पदार्थों में भी मिलावट की समस्या है।
भारत में दूध का उत्पादन सबसे अधिक
केंद्र सरकार के अनुसार भारत में 2025 में दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन (24787 करोड़ किलो) रहा। इस लिहाज से इसके पिछले साल यानी 2024 की तुलना में ये 3.58 प्रतिशत अधिक है। साथ ही प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 485 ग्राम प्रतिदिन रही। वहीं, 2023-24 में उत्पादन लगभग 231 मिलियन टन तक पहुंच गया था। यह दुनिया के कुल दूध उत्पादन का करीब एक-चौथाई है।
ये आंकड़े दिखा रहे हैं कि साल दर साल भारत में दूध का उत्पादन बढ़ ही रहा है। सरकार कहती है कि ये दिनों-दिन हो रही वृद्धि राष्ट्रीय गोकुल मिशन और श्वेत क्रांति 2.0 का नतीजा है। आंकड़े ये भी बताते हैं कि लगभग 60% दूध का सेवन तरल रूप में होता है, जबकि शेष 40% का उपयोग मक्खन, देसी घी, पनीर, दही, आइसक्रीम, डेयरी उत्पाद और पारंपरिक मिठाइयों के रूप में किया जाता है।
भारत में इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन के बावजूद विडंबना ये है कि दूध की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। भारत में हम और आप जो दूध पी रहे हैं, दूध से बने जिन डेयरी प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो कितना शुद्ध है…इसे लेकर शंकाए बराबर बनी रहती हैं। कई शिकायतें आती हैं, कुछ कार्रवाई भी होती है पर समस्या का पूरी तरह निदान नहीं हो सका है।
भारत में कितना दूध मिलावटी है?
भारत सरकार या भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ऐसा कोई अनुमान जारी नहीं करती कि देश में कुल बिकने वाले दूध का कितना प्रतिशत हिस्सा मिलवटी है। इसकी बजाय सरकार नमूनों की जांच जरूर करती हैं और बताती हैं कि जब्त नमूनों में कितने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
अगर सबसे ताजा आंकड़े की बात करें तो लोकसभा में फरवरी 2026 में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में दूध और दुग्ध उत्पादों के 33,405 नमूनों की जांच की गई। इनमें 12,780 नमूने मानकों के अनुरूप (non-conforming) नहीं पाए गए। इसका मतलब हुआ कि लगभग 38.3% नमूने किसी न किसी रूप में मानकों के अनुरूप नहीं थे। इसके आधार पर 12,057 मामले दर्ज हुए।
यहां ये भी जानना जरूरी है कि non-conforming का मतलब केवल खतरनाक मिलावट नहीं है। इसमें सब-स्टैंडर्ड गुणवत्ता, गलत लेबलिंग और असुरक्षित उत्पाद भी शामिल हैं। FSSAI यह भी मानता है कि दूध में मिलावट और गुणवत्ता संबंधी कमियां एक वास्तविक समस्या हैं, इसलिए लगातार निगरानी और विशेष अभियान चलाए जाते हैं।
पिछले साल 2025 में FSSAI ने दूध, पनीर और खोया में मिलावट के खिलाफ देशव्यापी विशेष अभियान शुरू किया था। कई राज्यों में नकली पनीर, सिंथेटिक दूध और गैर-दुग्ध पदार्थों से बने उत्पाद पकड़े गए। मसलन नोएडा में दिवाली से पहले 500 किलोग्राम नकली पनीर पकड़ा गया। गुजरात और अन्य राज्यों में सिंथेटिक दूध तथा नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ बड़े अभियान चलाए गए। सूरत में 2025 के दौरान जब्त किए गए नकली और मिलावटी डेयरी उत्पादों की मात्रा 2024 की तुलना में 13 गुना बढ़ी हुई पाई गई। कुल मिलाकर आंकड़े ठोस रूप से भले ही सामने नहीं आते हैं लेकिन समस्या है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
दूध में क्या-क्या मिलाया जाता है?
विशेषज्ञों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार दूध में सबसे आम मिलावट पानी की होती है। इसके अलावा कई मामलों में निम्न पदार्थ पाए गए हैं-
- डिटर्जेंट
- यूरिया
- स्टार्च
- हाइड्रोजन पेरॉक्साइड
- सिंथेटिक रसायन
- सस्ते वनस्पति तेल
- न्यूट्रलाइजर और अन्य रसायन
इनका उद्देश्य दूध की मात्रा बढ़ाना, गाढ़ापन बनाए रखना या खराब हो चुके दूध को ताजा दिखाना होता है। दूध में मिलावट के मामलों में समय-समय पर ऐसे पदार्थ मिले हैं जो सीधे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। FSSAI के 2018 सर्वे में डिटर्जेंट, यूरिया और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड मिले थे। हाल के वर्षों में कई राज्यों में सिंथेटिक दूध बनाने वाली फैक्ट्रियों पर कार्रवाई हुई, जहां रसायनों के मिश्रण से दूध जैसा पदार्थ तैयार किया जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे रसायन पेट, किडनी और लीवर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं, जबकि दूषित पानी मिलाने से संक्रमण और खाद्य जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
घर पर कैसे पहचानें मिलावटी दूध?
FSSAI और खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ कुछ सरल घरेलू तरीके सुझाते हैं जिसकी मदद से कई बार नकली या मिलवटी दूध की पहचान की जा सकती है।
पानी की मिलावट- एक चिकनी सतह पर दूध की बूंद गिराएं। शुद्ध दूध धीरे-धीरे सफेद निशान छोड़ते हुए बहेगा, जबकि अधिक पानी मिला दूध तेजी से फैल जाएगा।
डिटर्जेंट की जांच- दूध को बोतल में डालकर जोर से हिलाएं। यदि लंबे समय तक झाग बना रहे तो डिटर्जेंट की आशंका हो सकती है।
स्टार्च की जांच- दूध को ठंडा कर उसमें आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। नीला रंग आने पर स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।
सिंथेटिक दूध की पहचान- सिंथेटिक दूध में साबुन जैसी गंध आ सकती है और उंगलियों के बीच रगड़ने पर असामान्य चिकनाहट महसूस हो सकती है।
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