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उत्तराखंड के उत्तरकाशी में कश्मीरी शॉल विक्रेता से मारपीट, JKSA ने कार्रवाई की मांग को लेकर डीजीपी को लिखा पत्र

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक शॉल बेचने वाले कश्मीरी विक्रेता से मारपीट का मामला सामने आया है। जेकेएसए ने इस पर कार्रवाई की मांग की है।

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फोटोः सोशल मीडिया

देहरादूनः उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के उत्तरकाशी में एक कश्मीर शॉल विक्रेता से कथित तौर पर दक्षिणपंथी समूह से जुडे़ लोगों ने मारपीट, लूटपाट की। इसके बाद विक्रेता को निष्कासित करने की धमकी दी। इस घटना पर जम्मू-कश्मीर छात्र संगठन (JKSA) कार्रवाई की मांग की है।

घटना के संबंध में जेकेएसए ने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखा है और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

कश्मीरी व्यापारियों के लिए पैदा की चिंता

राज्य में हुई इस घटना ने उत्तराखंड में मौसमी व्यापार करने वाले विक्रेताओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। इससे विक्रेताओं के बीच सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

पीड़ित की पहचान कश्मीर के कुपवाड़ा निवासी बिलाल अहमद गनी के रूप में हुई है, जो ठंड के दिनों में उधम सिंह नगर में शॉल बेच रहे थे। वह यहां करीब आठ सालों से इस मौसम में आते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, यह घटना सामने तब आई जब अंकुर सिंह नाम के एक व्यक्ति ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह कुपवाड़ा के बिलाल गनी को “भारत माता की जय” का नारा लगाने के लिए कहते हुए पीटता हुआ दिख रहा है।

इस वीडियो में पांच लोगों का एक समूह गनी पर हमला करता दिख रहा है, जो उनके नारे दोहराने से इनकार करने पर उन्हें गालियां देते हैं। यह वीडियो उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से हटा दिया गया है।

गनी का कहना है कि उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन उन्होंने समूह से प्रतिशोध के डर से मामले को आगे न बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मैं इस कृत्य के लिए न्याय और निंदा तो चाहता हूं लेकिन इसके परिणामों से डरता हूं। मुझे दो महीने में कश्मीर वापस जाना है और यह मामला मुझे उत्तराखंड से बांध देगा।”

28 वर्षीय गनी कुपवाड़ा जिले के रहने वाले हैं। उनका परिवार लकड़ी का काम करता है। उन्होंने कहा कि ठंड के दिनों में काम बहुत कम होता है जिससे उन्हें यात्रा करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि वह घर-घर जाकर शॉल बेचने का काम करते हैं और इन तीन महीनों में करीब 60 हजार रुपये कमाते हैं।

पुलिस ने क्या कहा?

इस मामले में काशीपुर के सर्किल ऑफिसर दीपक सिंह ने कहा कि एफआईआर दर्ज नहीं की गई है क्योंकि जांच जारी है। उन्होंने कहा कि आरोपी ने एक माफीनामा दिया है और कहा कि वे दोबारा ऐसा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वीडियो हमारे संज्ञान में आया लेकिन मामला दर्ज करने से पहले हमें एक प्रक्रिया का पालन करना होता है।

वहीं इस मामले में जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने राज्य के डीजीपी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उनसे मामले में कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। पत्र में कहा गया “ऐसे कृत्यों ने न सिर्फ उस पर बल्कि क्षेत्र में मौसमी काम पर निर्भर रहने वाले अन्य कश्मीरी विक्रेताओं के लिए भी भय और आतंक का माहौल तैयार किया है।”

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी के हवाले से लिखा “लंबे समय से वहां मौजूद रहने और शांतिपूर्ण आचरण के बावजूद, बिलाल अहमद पर बेरहमी से हमला किया गया, उनके शॉल लूट लिए गए, उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और उन्हें तुरंत इलाका खाली करके राज्य छोड़ने का निर्देश दिया गया।”

खुएहामी ने आगे बातचीत में कहा “कश्मीरी भारत में परदेसी नहीं बल्कि समान नागरिक हैं। निर्दोष कश्मीरी व्यापारियों को निशाना बनाना और उन्हें शहरों से बाहर निकालना केवल अलगाव और अविश्वास को गहराता है और भारत के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश कर रही शत्रुतापूर्ण ताकतों के हाथों में खेलने जैसा है।”

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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