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चुनाव से पहले जातीय समीकरण साधने की कोशिश, योगी मंत्रिमंडल में किन नए चेहरों को मिली जगह?

उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार हुआ है। इसमें दलित और ओबीसी चेहरों को प्रमुखता दी गई है।

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फोटोः आईएएनएस

लखनऊः उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले रणनीतियां बननी शुरू हो गई हैं। इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने रविवार (10 मई) को योगी मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। इनमें छह नए चेहरों को जगह मिली है। योगी कैबिनेट में इन नए चेहरों को मिली जगह जातीय गणित को ध्यान में रखकर की गई है। मंत्रिमंडल विस्तार में जिन नए चेहरों को जगह मिली है, उनमें कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर, मनोज पांडे, भूपेंद्र चौधरी, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं। इस कैबिनेट विस्तार को समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले की काट के रूप में देखा जा रहा है।

ऐसे में इन चेहरों में जातीय समीकरण को ध्यान में रखा गया है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, दलित, ओबीसी, जाट चेहरों को मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिली है।

योगी मंत्रिमंडल विस्तार से जातीय समीकरण साधने की कोशिश

कैलाश राजपूत कन्नौज की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक हैं। वहीं, सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ के खैर से विधायक हैं। दिलेर वाल्मीकि समुदाय से आते हैं। ऐसे में उन्हें पार्टी के लिए दलित वोटर्स तक पहुंच बनाने के लिए अहम चेहरा माना जा रहा है। कैलाश राजपूत लोधी समुदाय से आते हैं। उन्हें समुदाय को भाजपा के साथ जोड़ना और जनाधार को मजबूत करने की उम्मीद के साथ जगह दी गई है।

रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे का भाजपा में शामिल होना लगभग तय था। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के पूर्व करीबी सहयोगी और सपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे पांडे लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए थे। उन्हें पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण ब्राह्मण चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने 2012 और 2017 में ऊंचाहार सीट जीती थी। 2022 में भी पांडे ने सीट से जीत दर्ज की थी।

भूपेंद्र सिंह चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख जाट नेता हैं। चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत आरएसएस से की और 1989 में भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सहित कई संगठनात्मक भूमिकाएं निभाई हैं और इससे पहले योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

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फतेहपुर के खागा से कृष्णा पासवान पासी समुदाय की एक वरिष्ठ दलित नेता हैं। उन्होंने कई चुनाव जीते हैं और उन्हें भाजपा के दलित वोट बैंक को बरकरार रखने के प्रयासों का हिस्सा माना जाता है।

एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा वाराणसी से ताल्लुक रखते हैं। वह विश्वकर्मा समुदाय के एक प्रमुख नेता हैं। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। उनकी नियुक्ति से पूर्वी उत्तर प्रदेश के गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं तक भाजपा की पहुंच मजबूत होने की उम्मीद है।

मंत्रिमंडल में सीएम, डीसीएम समेत 54 सदस्य

वर्तमान में उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक सहित 54 सदस्य हैं। राज्य में अधिकतम 60 मंत्रियों की अनुमति है। 2027 चुनाव से पहले यह मंत्रिमंडल विस्तार एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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फोटोः आईएएनएस

समाजवादी पार्टी जहां एक ओर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर काम कर रही है। वहीं, भाजपा ने उसकी काट के लिए मंत्रिमंडल विस्तार में ओबीसी और दलित चेहरों को प्रमुखता दी है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी ने उत्तर प्रदेश समेत अन्य चुनावी राज्यों के लिए रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।

योगी कैबिनेट का विस्तार इसी कड़ी में अहम माना जा रहा है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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