Home विश्व अमेरिका नए वीजा नियमों के तहत विदेशी छात्रों के लिए सीमित करेगा...

अमेरिका नए वीजा नियमों के तहत विदेशी छात्रों के लिए सीमित करेगा 4 साल की अवधि, भारतीय छात्रों पर होगा असर

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन बदलावों का मकसद वीजा सिस्टम की निगरानी को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है। हालांकि, यूनिवर्सिटी और शिक्षा से जुड़े समूहों ने चेतावनी दी है कि इस नियम से हजारों ऐसे विदेशी छात्रों के लिए अनिश्चितता पैदा हो सकती है, जिनके एकेडमिक प्रोग्राम चार साल से ज्यादा समय के हैं।

US to limit 4-year duration for foreign students under new visa rules Indian students to be affected, अमेरिका, वीजा
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस/ ग्रोक

वाशिंगटन: अमेरिका में 3.3 लाख से ज्यादा भारतीयों समेत विदेशी छात्रों को जल्द ही सख्त इमिग्रेशन नियमों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने एक नियम को अंतिम रूप दिया है, जो लंबे समय से चले आ रहे “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” (स्टेटस की अवधि) सिस्टम की जगह रहने की एक निश्चित अवधि तय करेगा।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार (16 जुलाई) को जारी नए नियम के तहत F-1 वीजा वाले छात्रों को आम तौर पर चार साल तक अमेरिका में रहने की अनुमति होगी। जिन छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए ज्यादा समय चाहिए, उन्हें अपनी अधिकृत रहने की अवधि खत्म होने से पहले DHS से समय बढ़ाने (एक्सटेंशन) की अनुमति लेनी होगी।

अमेरिका के नए वीजा नियमों से भारतीय छात्रों पर क्या होगा असर?

इस नियम में J-1 एक्सचेंज विजिटर और विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों को जारी होने वाले I वीजा के लिए रहने की तय अवधि भी तय की गई है। लागू होने से पहले इस कदम की कांग्रेस द्वारा समीक्षा की जाएगी।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन बदलावों का मकसद वीजा सिस्टम की निगरानी को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है। हालांकि, यूनिवर्सिटी और शिक्षा से जुड़े समूहों ने चेतावनी दी है कि इस नियम से हजारों ऐसे विदेशी छात्रों के लिए अनिश्चितता पैदा हो सकती है, जिनके एकेडमिक प्रोग्राम चार साल से ज्यादा समय के हैं।

ड्युरेशन ऑफ स्टेटस होगा समाप्त

दशकों से एफ-1 वीजा पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों को “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” नामक प्रणाली के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश दिया जाता रहा है। एक निश्चित समाप्ति तिथि मिलने के बजाय छात्रों को तब तक देश में रहने की अनुमति थी जब तक वे पूर्णकालिक नामांकन बनाए रखते थे और वीजा आवश्यकताओं का पालन करते थे।

डीएचएस का नया नियम इस व्यवस्था को समाप्त करता है। नई व्यवस्था के तहत चार साल का एडमिशन पीरियड खत्म होने के बाद छात्र अपने-आप अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाएंगे। इसके बजाय अगर उनकी डिग्री या रिसर्च प्रोग्राम अभी भी चल रहा है तो उन्हें अपने कानूनी स्टेटस को बढ़ाने के लिए DHS में अप्लाई करना होगा।

यही नियम J-1 एक्सचेंज विजिटर्स पर भी लागू होगा। इनमें अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में काम करने वाले कई विदेशी रिसर्चर और स्कॉलर, साथ ही I वीजा वाले पत्रकार भी शामिल हैं।

DHS के मुताबिक, इस बदलाव का मकसद टेम्पररी वीजा होल्डर्स पर निगरानी बेहतर करना और राष्ट्रीय सुरक्षा के उपायों को मजबूत करना है।

डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीति में बदलाव

यह नया नियम ट्रंप प्रशासन द्वारा लाया गया इमिग्रेशन से जुड़ा सबसे नया कदम है। इसका सीधा असर विदेशी छात्रों पर पड़ता है। पिछले एक साल में, DHS ने स्टूडेंट वीजा की निगरानी को सख्त करने के लिए कई कदम उठाए हैं। एजेंसी ने अपनी “स्टूडेंट क्रिमिनल एलियन इनिशिएटिव” के तहत हजारों छात्रों का कानूनी स्टेटस खत्म कर दिया और F-1 वीजा से जुड़े कथित फ्रॉड के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की।

ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा लॉटरी सिस्टम में भी बदलाव किया है जिससे ग्रेजुएशन के बाद नौकरी चाहने वाले शुरुआती करियर वाले कई प्रोफेशनल्स के चुने जाने की संभावना कम हो गई है।

ट्रंप प्रशासन की इस नई नीति से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे लगभग 12 लाख इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के सामने अनिश्चितता और बढ़ गई है।

यह भी पढ़ें – ब्रिटेन में हिंदू मंदिर वाले कॉम्प्लेक्स को इस्लामिक ग्रुप को बेचा गया, अस्तित्व के खतरे से जूझ रहा 40 साल पुराना मंदिर

भारतीय छात्रों पर भी पड़ेगा असर

इस नियम का भारतीय छात्रों पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है, जो अब अमेरिका में सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय हैं। ‘ओपन डोर्स 2024’ रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 एकेडमिक ईयर में 3,31,000 से ज्यादा भारतीय छात्र अमेरिका के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में एनरोल्ड थे। देश में मौजूद सभी इंटरनेशनल स्टूडेंट्स में से लगभग 30 प्रतिशत भारतीय छात्र हैं।

कई भारतीय छात्र ऐसे प्रोग्राम्स में पढ़ाई करते हैं जिन्हें पूरा होने में चार साल से ज्यादा का समय लगता है। इनमें डॉक्टोरल डिग्री, रिसर्च-बेस्ड मास्टर्स प्रोग्राम, मेडिकल ट्रेनिंग, इंजीनियरिंग रिसर्च और दूसरे खास प्रोफेशनल कोर्स शामिल हैं।

इस नई व्यवस्था के तहत, अगर ये छात्र कानूनी तौर पर अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं तो उन्हें अपने अधिकृत प्रवास की अवधि समाप्त होने से पहले DHS से समय-सीमा बढ़ाने की अनुमति लेनी होगी।

यह भी पढ़ें – ‘मुस्लिम हो?’, अमेरिका में भारतीय युवक से धर्म पूछकर 15 बार चाकू से किया हमला

author avatar
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version