वाशिंगटनः अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो 23 मई को भारत आ रहे हैं। अपनी चार दिवसीय यात्रा के दौरान वे दिल्ली समेत कोलकाता, आगरा और जयपुर का भी दौरा करेंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र, समुद्री सुरक्षा और चीन से जुड़े रणनीतिक मुद्दों पर भारत-अमेरिका सहयोग को नई दिशा देने की कोशिशें तेज हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार को रूबियो की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम जारी किया। विभाग के मुताबिक, भारत आने से पहले 22 मई को वे स्वीडन के हेलसिंगबोर्ग में आयोजित नाटो विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा
विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि भारत यात्रा के दौरान रूबियो भारतीय नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठकों के अलावा, रूबियो के क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेने की संभावना है। इस मंच में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। माना जा रहा है कि बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आपूर्ति शृंखला से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
संयुक्त राज्य अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच के अध्यक्ष मुकेश अघी ने इस यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए महत्वपूर्ण और सही समय पर होने वाला दौरा बताया है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए क्वाड को फिर से सक्रिय और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।
होर्मुज स्ट्रेट पर भी होगी चर्चा
अघी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। उनके मुताबिक, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मजबूत नौसैनिक मौजूदगी दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को और अहम बनाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत, चीन के साथ अमेरिका की हालिया कूटनीतिक बातचीत और उसके क्षेत्रीय प्रभावों को लेकर स्पष्टता चाहता है। अघी के अनुसार, इन चर्चाओं का असर भारत की रणनीतिक और सुरक्षा प्राथमिकताओं पर भी पड़ सकता है।
आईएएनएस इनपुट के साथ



