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ईरान थक चुका है…समझौते के लिए बेताब, बोले ट्रंप- अब ज्यादा समय नहीं दूगा

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि बातचीत के लिए ज्यादा लंबा समय नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा, मैं कह रहा हूं दो या तीन दिन, शायद शुक्रवार, शनिवार, रविवार या अगले हफ्ते की शुरुआत तक। बहुत सीमित समय।

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Man in a navy suit and red tie stands outdoors, holding a stack of papers, with American flags in the background and a serious expression.
खाड़ी देशों के अनुरोध पर ट्रंप ने टाला ईरान पर हमला

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद ईरान समझौते के लिए बेहद बेताब हो गया है। ट्रंप ने कहा कि वह इससे थक चुका है। उसकी सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने इस दौरान दोहराया कि किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

व्हाइट हाउस में आयोजित सालाना कांग्रेसनल पिकनिक और बाद में नए बॉलरूम एवं सुरक्षा परिसर के निर्माण स्थल के दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर बड़े सैन्य हमले से सिर्फ एक घंटे दूर था, लेकिन खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों के आग्रह पर कार्रवाई को कुछ समय के लिए रोक दिया गया।

‘हमले के लिए सब तैयारी हो चुकी थी’

ट्रंप ने कहा, हम पूरी तरह तैयार थे। जहाज, नौकाएं और हथियार सब तैनात थे, लेकिन क्षेत्रीय नेताओं ने फोन कर कहा कि ईरान अब बातचीत में समझदारी दिखा रहा है। उन्होंने कहा, क्या आप हमें दो-तीन दिन और दे सकते हैं? हमें लगता है कि वे अब ठीक तरीके से बात कर रहे हैं।

ट्रंप ने कहा कि बातचीत के लिए ज्यादा लंबा समय नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा, मैं कह रहा हूं दो या तीन दिन, शायद शुक्रवार, शनिवार, रविवार या अगले हफ्ते की शुरुआत तक। बहुत सीमित समय। उन्होंने संकेत दिया कि यह समयसीमा बहुत सीमित है और अगर बातचीत विफल रही तो अमेरिका फिर सख्त कदम उठा सकता है। ट्रंप ने कहा कि हम उन्हें परमाणु हथियार रखने नहीं दे सकते। यह पूरे मध्य पूर्व के लिए बड़ा खतरा होगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य ताकत लगभग पंगु हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान की 82 प्रतिशत मिसाइलें नष्ट हो चुकी हैं, नौसेना लगभग खत्म हो गई है और वायुसेना भी गंभीर रूप से कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य निर्माण केंद्रों को निशाना बनाया है, जिससे उसकी दोबारा युद्ध क्षमता विकसित करने की ताकत कमजोर पड़ गई है।

ट्रंप ने यहां तक कहा कि ईरान के पास युद्ध में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश संसाधन खत्म हो चुके हैं। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर ईरानी नेतृत्व को लेकर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि मैं यह नहीं कहना चाहता कि उनके नेता खत्म हो गए हैं, लेकिन सच यही है कि उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ट्रंप ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने दावा किया कि अगर तेहरान को परमाणु हथियार मिल गया तो सबसे पहले खतरा इजराइल को होगा और उसके बाद सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर जैसे देशों पर भी संकट मंडरा सकता है। ट्रंप ने कहा कि इससे परमाणु तबाही जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

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‘चीन ईरान को हथियार सप्लाई नहीं करेगा’

इस दौरान ट्रंप ने शी जिनपिंग शी जिनपिंग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि चीन ईरान को हथियार सप्लाई नहीं कर रहा है। ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रपति शी ने मुझसे वादा किया है कि वे ईरान को हथियार नहीं भेज रहे। मैं उनकी बात पर भरोसा करता हूं।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन मध्य पूर्व में स्थिरता चाहता है, क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतें बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि ईरान वर्षों से समुद्री मार्गों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करता रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, बहरीन समेत कई खाड़ी देश ईरान से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। उन्होंने इजरायल को भी बेहद मजबूत साझेदार बताया।

विदेश नीति के अलावा ट्रंप ने घरेलू मुद्दों पर भी अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में शेयर बाजार ने 67 बार नया रिकॉर्ड बनाया और महंगाई दर घटकर 1.6 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। हालांकि उन्होंने माना कि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद ऊर्जा कीमतों पर असर पड़ा है।

ट्रंप ने अपने प्रस्तावित ग्रेट ब्यूटीफुल बिल का भी उल्लेख किया, जिसमें टिप्स और ओवरटाइम आय पर टैक्स राहत, किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए टैक्स सुधार जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। उन्होंने फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप की भी तारीफ की, जिन्होंने फोस्टर केयर और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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