दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सरकार ने रूस के उस तेल को बेचने और दूसरे देशों तक पहुँचाने की समयसीमा बढ़ा दी है, जिस पर पहले पाबंदी लगाई गई थी। अब यह काम 16 मई तक किया जा सकेगा।
दरअसल रूस और यूक्रेन के युद्ध के कारण अमेरिका ने रूसी तेल पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हुई हैं। लेकिन हाल ही में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव की वजह से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई थीं। ऐसे में बाजार को संभालने के लिए अमेरिका ने अपनी पुरानी पाबंदियों में थोड़ी ढील दी है।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने क्या कहा?
आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, 17 अप्रैल 2026 तक जहाजों पर लदे रूसी कच्चे तेल या पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री, डिलीवरी या अनलोडिंग से जुड़े जरूरी लेनदेन 16 मई 2026 तक अधिकृत रहेंगे। इसमें वे जहाज भी शामिल हैं, जिन पर पहले प्रतिबंध लगाए गए थे।
हालांकि, इस छूट के साथ सख्त शर्तें भी लागू हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ईरान, उत्तरी कोरिया, क्यूबा और यूक्रेन के कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों से जुड़े किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ इस तरह के लेनदेन की अनुमति नहीं होगी।
यह कदम चौंकाने वाला भी है। क्योंकि मात्र दो दिन पहले अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने कहा था कि रूसी तेल पर किसी भी प्रकार की छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि मार्च 11 से पहले समुद्र में मौजूद तेल के लिए ही यह व्यवस्था लागू थी और आगे इसे बढ़ाने का इरादा नहीं है।
गौरतलब बात है कि अमेरिका ने यह राहत केवल रूसी तेल के लिए दी है। ईरान से होने वाले तेल के लेनदेन पर लगी पाबंदियों में कोई ढील नहीं दी गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बीते बुधवार को बयान जारी कर कहा था कि ईरानी तेल पर लगी पाबंदियों में दी गई अस्थायी छूट को अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। अमेरिका ने सप्लाई चेन की रुकावटों को देखते हुए 21 मार्च को ईरान के कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर लगी पाबंदियों में थोड़ी ढील दी थी जो 19 अप्रैल को खत्म हो रही है।
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कच्चे तेल की कीमत में गिरावट
इस फैसले का असर बाजार पर तुरंत देखने को मिला है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत गिरकर अब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार, दुनिया इस वक्त ऊर्जा के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है, क्योंकि पिछले दो महीनों से चल रहे युद्ध के कारण खाड़ी देशों में तेल और गैस की करीब 80 फैक्ट्रियों को भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में अगर रूसी तेल को बाजार में आने का रास्ता नहीं मिलता, तो ईंधन की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती थीं।
वहीं दूसरी ओर, रूस का मानना है कि इस छूट से बाजार में इतना कच्चा तेल पहुंच सकेगा जिससे पूरी दुनिया की करीब एक दिन की जरूरत पूरी हो सकती है। हालांकि, तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है क्योंकि ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर समुद्र में उसके जहाजों को रोका गया, तो वह तेल सप्लाई के सबसे मुख्य रास्ते को फिर से बंद कर सकता है।

