वॉशिंगटनः शांति वार्ता विफल रहने के बीच अमेरिकी वित्त मंत्रालय अब तेहरान की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र की कमर तोड़ने के लिए ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ (आर्थिक प्रहार) नाम की रणनीति पर काम कर रहा है। मंत्रालय ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि ईरानी तेल पर लगी पाबंदियों में दी गई अस्थायी छूट को अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वह ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अपने पास मौजूद सभी कानूनी हथियारों और ताकतों का इस्तेमाल करेगा। मंत्रालय ने कहा कि जो विदेशी कंपनियां या वित्तीय संस्थान ईरान के साथ कारोबार जारी रखेंगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें सेकेंडरी प्रतिबंध भी शामिल हैं।
इससे पहले अमेरिका ने सप्लाई चेन की रुकावटों को देखते हुए 21 मार्च को ईरान के कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर लगी पाबंदियों में थोड़ी ढील दी थी जो कुछ ही दिनों में खत्म होने वाली है।अमेरिका ने साफ कर दिया है कि इसे दोबारा लागू नहीं किया जाएगा। पाबंदियों में ढील के इसके तहत जहाजों पर लोड हो चुके तेल को 19 अप्रैल 2026 तक बेचने या उतारने की मंजूरी दी गई थी।
19 अप्रैल को खत्म हो रही अमेरिका की डेडलाइन
अब अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (OFAC) ने स्पष्ट कर दिया है कि समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री के लिए दिया गया यह शॉर्ट-टर्म लाइसेंस कुछ ही दिनों में खत्म हो रहा है और इस छूट को किसी भी कीमत पर रिन्यू नहीं किया जाएगा। 19 अप्रैल की समय सीमा के बाद ईरानी तेल का आयात या बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होगी।
चूंकि ईरान के साथ संघर्ष अभी भी जारी है, इसलिए पश्चिम एशिया के रणनीतिक जलमार्ग ज्यादातर समुद्री ट्रैफिक के लिए असल में बंद हैं। अमेरिका के इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और कूटनीतिक रिश्तों पर दबाव और बढ़ना तय माना जा रहा है।
ईरान-अमेरिका में दूसरे दौर की होगी बातचीत?
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच एक बार फिर बातचीत की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सीधी वार्ता का दूसरा दौर अगले दो दिनों में हो सकता है और इसके लिए पाकिस्तान एक संभावित स्थान हो सकता है।
न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि बातचीत जल्द शुरू हो सकती है। उन्होंने इस्लामाबाद का जिक्र करते हुए कहा, “अगले दो दिनों में कुछ हो सकता है और हम वहां जाने के लिए तैयार हैं।” इससे पहले वार्ता के लिए यूरोप पर विचार किया जा रहा था, लेकिन अब फोकस पाकिस्तान की ओर शिफ्ट होता दिख रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत कई घंटों तक चली, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका था।
खाड़ी में तनाव, नौसैनिक दबाव जारी
उधर, खाड़ी क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ब्लॉकेड के पहले 24 घंटों में ईरानी बंदरगाहों से कोई जहाज बाहर नहीं निकला। छह व्यापारी जहाजों ने अमेरिकी निर्देशों का पालन करते हुए ओमान की खाड़ी की ओर रुख कर लिया।
हालांकि, शिपिंग डेटा एक अलग तस्वीर भी दिखाता है। ब्लॉकेड के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 20 से ज्यादा कमर्शियल जहाज, जिनमें टैंकर और मालवाहक शामिल हैं, गुजरे। ये जहाज ईरानी बंदरगाहों से नहीं निकले थे, जिससे साफ है कि मुख्य समुद्री मार्ग पूरी तरह बाधित नहीं हुआ है।
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