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ट्रंप का दावा- रविवार हो सकता है अमेरिका-ईरान शांति समझौता, तेहरान का क्या रुख है?

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान अब परमाणु हथियार हासिल नहीं करना चाहता है। अमेरिका उचित समय पर ईरान के संवर्धित यूरेनियम को हटाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि समझौते के बाद दोनों देशों के संबंध एक नए और बेहतर दौर में प्रवेश करेंगे।

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फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

वॉशिंगटन/तेहरानः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने वाले हैं। ट्रंप ने कहा कि समझौता होते ही दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को सभी देशों के लिए खोल दिया जाएगा।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “समझौते पर कल हस्ताक्षर होने वाले हैं और जैसे ही यह समझौता साइन होगा, होर्मुज स्ट्रेट सभी के लिए खुल जाएगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान अब परमाणु हथियार हासिल नहीं करना चाहता है। अमेरिका उचित समय पर ईरान के संवर्धित यूरेनियम को हटाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि समझौते के बाद दोनों देशों के संबंध एक नए और बेहतर दौर में प्रवेश करेंगे। हालांकि ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि यदि बातचीत की प्रक्रिया तेजी से, आसानी से और बिना किसी परेशानी के आगे नहीं बढ़ी तो अमेरिका के पास अंतिम विकल्प भी मौजूद है।

ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित समझौता पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में हुए परमाणु समझौते से पूरी तरह अलग होगा। उन्होंने दावा किया कि इस बार ईरान को किसी प्रकार की वित्तीय सहायता या नकद भुगतान नहीं किया जाएगा।

उन्होंने लिखा, “ओबामा प्रशासन की तरह उन्हें सैकड़ों अरब डॉलर का भुगतान नहीं किया जाएगा, जिसमें 1.7 अरब डॉलर नकद भी शामिल थे। इस बार कोई पैसा हाथ नहीं बदलेगा।” ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान में मौजूद बची हुई परमाणु सामग्री को बाद में हटाकर नष्ट किया जा सकता है।

ईरान ने समझौते को लेकर दिखाई सतर्कता

जहां ट्रंप समझौते को लगभग तय बता रहे हैं, वहीं ईरान की ओर से अपेक्षाकृत सतर्क प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच किसी अंतिम समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की बात कही गई थी।

बाकेई ने कहा कि यदि कोई एमओयू होता भी है तो वह केवल आगे की वार्ताओं के लिए एक रूपरेखा होगा, न कि अंतिम समझौता। उन्होंने संकेत दिया कि परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत अगले 60 दिनों तक जारी रह सकती है।

11 जून को बाकेई ने स्पष्ट कहा था कि ईरान अभी किसी समझौते को लेकर अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा था, ईरानी संस्थाओं की ओर से समझौते की समीक्षा पूरी होने के बाद ही कोई औपचारिक घोषणा की जाएगी।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने समझौते का पूरा मसौदा सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन कहा है कि हाल के दिनों में प्रसारित किए गए कई दस्तावेजों को गलत तरीके से अंतिम मसौदा बताया जा रहा है। इससे पहले अर्द्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से 14 बिंदुओं वाले प्रस्तावित मेमोरेंडम का विवरण प्रकाशित किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, मसौदे में सभी मोर्चों पर युद्धविराम, लेबनान में संघर्ष समाप्त करने, 30 दिनों के भीतर ईरानी निगरानी में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने तथा ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने जैसी शर्तें शामिल हैं।

इसके अलावा, अगले 60 दिनों तक केवल परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों में राहत, युद्ध के बाद मुआवजे और पुनर्निर्माण से जुड़े विषयों पर बातचीत जारी रखने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल बताया गया है।

आईआरएनए के मुताबिक प्रस्तावित समझौता दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त किया जाएगा। इसके बाद 60 दिनों तक केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और युद्ध से हुए नुकसान के मुआवजे पर बातचीत होगी।

एजेंसी ने यह भी कहा था कि शुरुआती मेमोरेंडम के तहत ईरान कोई नई परमाणु प्रतिबद्धता स्वीकार नहीं करेगा। यदि समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तब भी ईरान का शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेगा।

आईआरएनए के अनुसार, आगे की वार्ताएं भी ईरान के मूल सिद्धांतों के दायरे में ही होंगी। इनमें यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) का अधिकार और संवर्धित परमाणु सामग्री को अपने पास रखने का अधिकार शामिल है।

समझौते को लेकर ईरान में विरोध

इस बीच, ईरान के मशहद शहर में विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि कार्यालय के बाहर प्रस्तावित समझौते के विरोध में प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में प्रदर्शनकारी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ नारेबाजी करते दिखाई दिए। बताया गया कि प्रदर्शनकारियों ने अराघची पर अमेरिका के साथ समझौते को लेकर अत्यधिक नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा था कि संभावित समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाने का प्रावधान शामिल है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में होर्मुज के प्रबंधन का स्वरूप बदल सकता है, लेकिन इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में ईरान की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी। अराघची ने इसे ईरान के मुख्य प्रतिरोध और प्रतिरोधक क्षमता के साधनों में से एक बताया।

शनिवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर किए गए एक पोस्ट में अराघची ने कहा कि प्रस्तावित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन अब तक के किसी भी समय की तुलना में अंतिम रूप के सबसे करीब पहुंच चुका है। हालांकि उन्होंने मीडिया और विश्लेषकों से अपील की कि आधिकारिक घोषणा से पहले समझौते की संभावित शर्तों को लेकर अटकलों से बचा जाए।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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