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वाहनों के लिए 100% एथेनॉल ईंधन को मिली कानूनी मंजूरी, गडकरी बोले- 6 हफ्ते में टोयोटा, सुजुकी और हुंडई लॉन्च करेंगी गाड़ियां

शनिवार को नागपुर में एनडीए सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर नितिन गडकरी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शुक्रवार रात 8 बजे उन्होंने उस फाइल पर हस्ताक्षर किए, जिससे 100 फीसदी एथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई।

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Man in an olive kurta speaks into a microphone at a panel or event, with two men seated behind him.
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में कानूनी मंजूरी देने वाले नियमों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

नई दिल्ली/नागपुरः भारत में अब 100 फीसदी एथेनॉल (E100) से चलने वाले वाहनों का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में कानूनी मंजूरी देने वाले नियमों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

शनिवार को नागपुर में एनडीए सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर गडकरी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शुक्रवार रात 8 बजे उन्होंने उस फाइल पर हस्ताक्षर किए, जिससे 100 फीसदी एथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई।

गडकरी ने कहा कि एथेनॉल पेट्रोल का एक अच्छा विकल्प बन सकता है। इससे भारत का तेल आयात कम होगा और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। गडकरी के मुताबिक, कई वाहन कंपनियां एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं।

गडकरी ने कहा कि मुझे यह साझा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि मुझे और हरदीप सिंह पुरी को मारुति सुजुकी की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार- वैगनआर (WagonR) का 100% इथेनॉल-अनुकूल वर्जन लॉन्च करने का अवसर मिला। मोटरसाइकिल की बात करें तो, बिकने वाली हर पांच में से तीन मोटरसाइकिलों पर कब्जा रखने वाली कंपनी हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) ने दो फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च किए हैं जो 100% इथेनॉल पर चलने में सक्षम हैं। इसके बाद, टोयोटा, सुजुकी, एमजी और हुंडई जैसी कंपनियां अगले डेढ़ महीने के भीतर 100% इथेनॉल-अनुकूल वाहन लॉन्च करेंगी। इस प्रकार, इथेनॉल पेट्रोल के एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में काम करेगा।

गडकरी ने बताया कि जब उन्होंने वर्षों पहले एथेनॉल आधारित वाहनों की बात शुरू की थी, तब लोग इस पर हंसते थे। लेकिन अब यह योजना हकीकत बन रही है। उन्होंने कहा, जल्द ही हम नागपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेंगे जिसमें एक हाइड्रोजन पंप और दो हाइड्रोजन से चलने वाली बसें शामिल होंगी। जनता इन हाइड्रोजन बसों में सफर कर सकेगी, जो इलेक्ट्रोलाइज़र का उपयोग करके पानी से निकाली गई ग्रीन हाइड्रोजन से चलेंगी। वह दिन अब बेहद करीब है।”

तेल आयात पर निर्भरता घटेगी

सरकार का मानना है कि E100 नीति भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और हर साल ईंधन आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करता है।

नई व्यवस्था केवल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी तरह एथेनॉल से चलने वाले वाहनों के लिए कानूनी ढांचा तैयार करती है। इससे वाहन निर्माता कंपनियों को फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) और ऐसे इंजन विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जो पूरी तरह जैव ईंधन पर चल सकें।

सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर ऑटोमोबाइल उद्योग पर पड़ने की उम्मीद है। भारत पहले ही 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब E100 को मंजूरी मिलने से विशेष रूप से डिजाइन किए गए हाई-कंप्रेशन फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों के विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन का रास्ता खुल जाएगा।

गडकरी ने बताया कि कई प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां पहले से ही एथेनॉल आधारित तकनीक पर काम कर रही हैं। उनके अनुसार टोयोटा, सुजुकी, एमजी और हुंडई जैसी कंपनियां अगले छह सप्ताह के भीतर 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलने वाले या उसके अनुकूल वाहन बाजार में उतार सकती हैं।

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने वर्षों पहले एथेनॉल आधारित परिवहन की बात शुरू की थी, तब कई लोग इस विचार पर हंसते थे और इसकी आलोचना करते थे। लेकिन अब यह सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।

किसानों को भी होगा सीधा फायदा, प्रदूषण भी होगा कम

सरकार का मानना है कि इस नीति से कृषि क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा। विशेष रूप से गन्ना किसानों और अनाज उत्पादकों के लिए यह अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है।

नई व्यवस्था के तहत अतिरिक्त गन्ना, मक्का और क्षतिग्रस्त खाद्यान्न का उपयोग बायो-रिफाइनरियों में एथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा सकेगा। इससे किसानों की उपज के लिए नया बाजार तैयार होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सरकार के अनुसार, घरेलू स्तर पर एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से देश का तेल आयात बिल हजारों करोड़ रुपये तक कम हो सकता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी कम होगा।

यह कदम परिवहन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की रणनीति का भी हिस्सा है। हाल ही में सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन भी पेश किया था, जिसमें 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण की अनुमति है।

विशेषज्ञों का मानना है कि E100 को मंजूरी मिलने के बाद भारत जैव ईंधन आधारित परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जो ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने जैसे कई लक्ष्यों को एक साथ साध सकता है।

E20 से E100 तक… क्या एथेनॉल पर दौड़ने को तैयार है भारत?

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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