कोलकाता: ममता बनर्जी की टीएमसी में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। रविवार (14 जून) को तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह संकट और गहरा गया जब 20 बागी सांसदों ने अपने गुट का विलय त्रिपुरा की ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑ इंडिया’ (NPCI) के साथ करने और NDA को समर्थन देने का फैसला किया।
पार्टी के बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और एक पत्र सौंपकर पार्टी में विलय करने और बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने के अपने फैसले की जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, बागी TMC सांसदों ने अलग संसदीय गुट बनाने में आ रही कानूनी दिक्कतों की वजह से ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ के साथ जुड़ने का फैसला किया।
TMC के बागी सांसद NCP में होंगे शामिल
TMC के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि “हमने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी जॉइन कर ली है। यह एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी है। हमने इसमें विलय कर लिया है। असली TMC कौन है, यह कोर्ट तय करेगा।”
यह हालिया राजनीतिक घटनाक्रम केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक के बाद नई दिल्ली में स्पीकर के आवास पर बागी गुट के फिर से एकजुट होने के कुछ घंटों बाद सामने आया है। इस घटना के बाद TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर आग्रह किया कि TMC को एक ही राजनीतिक पार्टी माना जाए और किसी अलग गुट को मान्यता या सुविधाएं न दी जाएं।
समाचार एजेंसी आईएएनएस की खबर के मुताबिक, सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 सांसदों ने स्पीकर से मिलकर यह अनुरोध किया कि उन्हें सदन में अलग बैठने की व्यवस्था दी जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि ये सांसद अब एक नई राजनीतिक संरचना की ओर बढ़ रहे हैं और उन्होंने कथित तौर पर ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ में विलय करने का निर्णय लिया है। हालांकि, इस दावे पर आधिकारिक राजनीतिक दलों की ओर से तत्काल कोई पुष्टि सामने नहीं आई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि ये सभी सांसद प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ मिलकर काम करने की इच्छा रखते हैं। उनके पास दो-तिहाई से अधिक सांसदों का समर्थन है, जिससे यह बदलाव वैधानिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही टीएमसी नेतृत्व के खिलाफ शिकायतें भी स्पीकर को सौंपी गई हैं।
इससे पहले इन बैठकों को इस संकेत के तौर पर देखा जा रहा था कि बागी सांसद संसद में “असली TMC” के तौर पर मान्यता की मांग करेंगे।
इस बीच बागी गुट को तब बड़ी मजबूती मिली जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी बंदोपाध्याय ने शनिवार (13 जून) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ मुलाकातों के बाद इस गुट का समर्थन किया।
बंद्योपाध्याय ने कहा कि बागी सांसदों और विधायकों की अपील के बाद वे बागी खेमे में शामिल हो गए। समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री के जल्द ही पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी से मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि ” ज्यादातर सांसद और विधायक चाहते थे कि यह पहल सफल हो। वे चाहते थे कि पार्टी ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में चलती रहे और वे मुख्य सलाहकार और पार्टी नेता जैसी भूमिका निभाएं। उनकी अपील ने सचमुच मेरा दिल छू लिया। “
पार्टी में फूट के बीच संगठन में फेरबदल
बंद्योपाध्याय के पार्टी छोड़ने के कुछ ही घंटों बाद TMC ने संगठन में फिर से फेरबदल किया और बागी नेताओं सयोनी घोष, माला रॉय और बंद्योपाध्याय को पार्टी के अहम पदों से हटा दिया। अर्नब बनर्जी को घोष की जगह तृणमूल युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया जबकि कालीगंज की विधायक अलीफा अहमद ने रॉय की जगह पार्टी की महिला विंग की प्रमुख का पद संभाला।
एक और अहम बदलाव में टीएमसी नेता कुणाल घोष को पार्टी के उत्तरी कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाया गया है; उन्होंने बंद्योपाध्याय की जगह ली है। इसके साथ ही पार्टी ने सांसद सौगत रॉय को अपनी लोकसभा विंग का मुख्य सलाहकार भी नियुक्त किया है। इस विंग में अब वे सांसद शामिल हैं जो ममता बनर्जी के प्रति वफादार हैं।
यह भी पढ़ें – काकोली घोष के बेटे ने ममता बनर्जी को भेजा कानूनी नोटिस, टिकट विवाद संबंधी टिप्पणी पर माफी की रखी मांग
पार्टी में फूट के बीच ममता के नेतृत्व वाले गुट का कहना है कि दलबदल विरोधी कानून संसद के भीतर एक अलग समूह बनाने की इजाजत नहीं देता है। राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने कहा कि अलग गुट बनाने का “कोई कानूनी प्रावधान” नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर सांसदों की मूल पार्टी दसवीं अनुसूची के तहत किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं करती है, तो उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है।
उन्होंने रविवार को X पर एक पोस्ट में कहा, “सबसे जरूरी शर्त यह है कि मूल पार्टी को किसी दूसरी पार्टी में विलय करना होगा। मूल पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीती हुई सीट पर रहते हुए संसद या विधानसभा के भीतर ‘अलग गुट’ बनाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।”



