तेहरान/वाशिंगटन: करीब 107 दिनों तक चले संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने की खबर सामने आई है। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते के तहत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा।
ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका और ईरान 19 जून को स्विट्जरलैंड में शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतिम मसौदे पर हस्ताक्षर करेंगे। ईरानी अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, हस्ताक्षर समारोह के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा।
गरीबाबादी ने सरकारी प्रसारक आईआरआईबी से कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने के मुद्दे पर अमेरिका के साथ 60 दिनों की बातचीत प्रक्रिया में तभी पूरी तरह शामिल होगा, जब अमेरिका अपने शुरुआती वादों को पूरा करेगा। तेहरान हस्ताक्षर समारोह तक इन वादों की पुष्टि करेगा।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि अमेरिका-ईरान शांति समझौता पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी शुल्क और बाधा के खोलने तथा ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तत्काल हटाने की अनुमति दे दी है।
ट्रंप ने लिखा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू करें, तेल को बहने दें।” हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट का औपचारिक उद्घाटन समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद शुक्रवार को किया जाएगा।
पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता
सूत्रों के अनुसार, इस समझौते को अंतिम रूप देने में पाकिस्तान और कतर ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए कहा कि गहन वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान शांति समझौते पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमति जताई है।
ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोमवार को ईरानी सरकारी मीडिया को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए कतर के मध्यस्थों ने तेहरान में करीब 14 से 15 घंटे तक लंबी बातचीत की। उन्होंने कहा कि रविवार को कतर का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान में मौजूद था, जिसने दोनों पक्षों के बीच मसौदे पर सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गरीबाबादी के अनुसार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित हस्ताक्षर के बाद अगले 60 दिनों तक व्यापक समझौते पर बातचीत जारी रहेगी। इस दौरान ईरान कई अहम मुद्दों को उठाएगा, जिनमें उस पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
ईरानी सरकारी टेलीविजन पर समझौते की पुष्टि करते हुए गरीबाबादी ने कहा कि वार्ता प्रक्रिया लंबी और जटिल रही है। वहीं, ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने इस समझौते को देश की कूटनीतिक जीत करार दिया है।
गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। शुरुआती हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक नेता मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया तथा वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज को बंद कर दिया था। इसके कारण दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई और तेल-गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया।
समझौते के मसौदे में क्या-क्या शामिल है?
इस बीच, ईरानी सरकारी मीडिया और अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने अमेरिका और ईरान के बीच तैयार किए गए 14 बिंदुओं वाले समझौता ज्ञापन (एमओयू) के मसौदे का विवरण प्रकाशित करने का दावा किया है। हालांकि इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि अभी तक न तो वाशिंगटन और न ही तेहरान ने की है।
मसौदे के प्रमुख प्रस्तावित बिंदु
| प्रस्तावित बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थायी युद्धविराम | लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई का स्थायी अंत |
| गैर-हस्तक्षेप की गारंटी | अमेरिका की ओर से ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की प्रतिबद्धता |
| नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त | 30 दिनों के भीतर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का प्रस्ताव |
| होर्मुज जलडमरूमध्य | 30 दिनों के भीतर ईरानी व्यवस्था के तहत फिर से खोलने की योजना |
| पुनर्निर्माण सहायता | अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की सहायता |
| तेल प्रतिबंधों में राहत | ईरानी तेल और ऊर्जा उत्पादों पर लगे प्रतिबंध समाप्त करने का प्रस्ताव |
| परमाणु कार्यक्रम | ईरान की ओर से परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता |
| सैन्य गतिविधियां | अमेरिका की ओर से क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी नहीं बढ़ाने और नए प्रतिबंध नहीं लगाने का आश्वासन |
मेहर की रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम और व्यापक वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी जब तक ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों का कम से कम आधा हिस्सा जारी नहीं कर दिया जाता, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध निलंबित नहीं किए जाते और नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त नहीं कर दी जाती।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अंतिम शांति समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय वैधता प्रदान की जा सकती है। हालांकि इन सभी बिंदुओं की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
यूरोपीय देशों ने फैसले का किया स्वागत
इस बीच ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान, कतर और अन्य मध्यस्थ देशों को इस कूटनीतिक सफलता के लिए बधाई दी। यूरोपीय देशों ने कहा कि वे अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर इस अवसर का उपयोग स्थायी शांति और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में करेंगे।
यूरोपीय देशों ने यह भी दोहराया कि ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे अमेरिका, ईरान तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ काम करने को तैयार हैं।
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने समझौते का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता टिकाऊ शांति और क्षेत्रीय तथा वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद करेगा। तुर्की ने भी इस फैसले का स्वागत किया। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने भी इसे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण विकास बताया।
हालांकि इस समझौते पर सभी पक्ष पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहे हैं। इजराइली समाचार वेबसाइट मारिव की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बातचीत में स्पष्ट किया कि इजराइल, अमेरिका-ईरान समझौते में लेबनान से संबंधित किसी भी शर्त को अपने ऊपर बाध्यकारी नहीं मानता।
समझौते की घोषणा के बाद अमेरिका में कुछ आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। पूर्व बाइडेन प्रशासन के विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने युद्ध से पहले की स्थिति बहाल करने के लिए ईरान को महत्वपूर्ण रियायतें दी हैं, जबकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दीर्घकालिक समाधान निकलेगा या नहीं।
तेल की कीमतों में गिरावट
समझौते की घोषणा के बाद एशियाई बाजारों में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि होर्मुज के फिर से खुलने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होगी और बाजारों पर बना दबाव कम होगा। सोमवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल 4.6 प्रतिशत से अधिक फिसल गया। एशियाई शेयर बाजारों में भी तेजी देखी गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज के सामान्य रूप से खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति को राहत मिलेगी, क्योंकि दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है।
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