नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार (14 जून) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया। यह हमला खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद अमेरिका के बयानों को लेकर किया गया। गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री एक “आज्ञाकारी सेवक” की तरह व्यवहार करते हैं जो “आदेशों” का पालन करता है।
राहुल गांधी ने इस बाबत एक्स पर एक पोस्ट भी की। इस पोस्ट में लिखा “कमजोर PM” भारत के सम्मान की रक्षा नहीं कर पाएगा क्योंकि वह उन लोगों का एहसानमंद है जो देश का अपमान करते हैं।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लेकर क्या टिप्पणी की?
यह टिप्पणी उस घटना के एक दिन बाद आई है जब अमेरिका ने भारत से कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उसके नाकेबंदी के किसी भी उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार (12 जून) को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही।
अपनी पोस्ट में गांधी ने कहा कि “अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के कुछ ही दिनों बाद न तो कोई पछतावा है और न ही कोई माफी। इसके उलट अमेरिका लगातार आदेश जारी कर रहा है।”
राहुल ने कहा कि “उनके शब्द पढ़िए: ‘अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करें।’ किसी भी तरह का उल्लंघन ‘बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’।”
उन्होंने आगे कहा “कोई भी संप्रभु देश ऐसी भाषा कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। लेकिन हमारे समझौतावादी प्रधानमंत्री? वे चुप हैं। वे एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं और आदेशों का पालन करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “एक कमजोर स्थिति वाले प्रधानमंत्री देश के सम्मान की रक्षा नहीं कर पाएंगे क्योंकि वह उन लोगों के एहसानमंद हैं जो देश का अपमान करते हैं।”
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के मुताबिक, रुबियो ने जयशंकर से कहा कि इस इलाके में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिशों के तहत सभी कमर्शियल जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी सेना के निर्देशों का तुरंत पालन करना होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की गैर-कानूनी ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अमेरिका ने 13 अप्रैल से होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर रखी है जिससे तेहरान की तेल से होने वाली कमाई को सीमित करने की कोशिशों के तहत ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही रुक गई है। 8 अप्रैल से लागू कमजोर संघर्ष-विराम (ceasefire) के बावजूद यह रुकावट जारी है।
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इस हफ्ते ओमान के तट के पास भारतीय क्रू वाले तीन जहाजों पर हमले हुए। इनमें से एक घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। बाद में जयशंकर ने रुबियो को फोन करके भारत की ओर से कड़ा विरोध जताया और कहा कि कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ ऐसी जानलेवा कार्रवाई सही नहीं है।
भारत ने अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए नई दिल्ली में अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को भी तलब किया और भारतीय क्रू वाले मर्चेंट जहाजों पर हुए हमलों को “अस्वीकार्य” बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया और इसे “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया जबकि ईरान ने इस आरोप को सख्ती से खारिज कर दिया। भारत में ईरानी दूतावास ने इस दावे को “बेबुनियाद” बताया और कहा कि यह भारतीय क्रू वाले जहाजों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई से ध्यान हटाने की कोशिश थी।
अप्रैल की शुरुआत में हुए कमजोर संघर्ष-विराम के बावजूद अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और क्षेत्र में हमलों के कारण फरवरी के आखिर से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुई है।



