कोलकाताः पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) की हत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने रविवार (10 मई) को इस हत्या से जुड़े दो संबंध पाए हैं। इनमें एक तो हमले में इस्तेमाल किए गए वाहन के माध्यम से उत्तर प्रदेश से संबंधित और दूसरा टोल प्लाजा पर यूपीआई भुगतान से संबंधित है।
सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या चार दिनों पहले हुई थी। हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
पुलिस कर रही है यूपीआई भुगतान की जांच
रविवार को आई खबरों के मुताबिक पुलिस निसान माइक्रा (वही हैचबैक कार जिसका इस्तेमाल रथ की एसयूवी को रोकने के लिए किया गया था) में सवार लोगों द्वारा कोलकाता के पास बल्ली के एक टोल बूथ पर किए गए यूपीआई भुगतान की जांच कर रही है।
विशेष जांच दल (SIT) कार के नंबर का पता लगाने के बाद उत्तर प्रदेश गया। यह नंबर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी निवासी का था जिसने कार बेचने का विज्ञापन दिया था और उत्तर प्रदेश के लोगों ने उससे संपर्क करके कार खरीदने में रुचि दिखाई थी।
6 मई को जब रथ उत्तरी 24 परगना जिले के मध्यग्राम में दोहरिया क्रॉसिंग के पास अपने घर से लगभग 200 मीटर दूर थे तब चांदी के रंग की माइक्रा ने उनकी एसयूवी (महिंद्रा स्कॉर्पियो) का पीछा किया और उसे रोक दिया।
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रथ आगे की सीट पर बैठे थे। बाइक सवार हमलावरों ने बेहद करीब से रथ को गोली मारी। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावर माइक्रा कार को वहीं छोड़कर एक लाल रंग की गाड़ी और मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करके फरार हो गए। यह पूरा हमला महज 45 से 50 सेकंड तक चला। माइक्रा कार को जब्त कर लिया गया है।
पुलिस को शक है कि हमलावरों ने वाहन की असली पहचान छिपाने और पकड़े जाने से बचने के लिए नंबर प्लेट को क्लोन किया या जाली बनाया। एसआईटी ने कथित तौर पर उत्तर प्रदेश स्थित संपर्कों से जुड़े संचार रिकॉर्ड, कॉल विवरण और डिजिटल लेनदेन की जांच की। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने बंगाल के टीम के दौरे की पुष्टि की।
सुवेंदु अधिकारी के पीए की हत्या मामले की पुलिस कर रही जांच
जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए टोल प्लाजा तक कार का पता लगाया और फिर डिजिटल भुगतान के तरीकों का अनुसरण किया जिससे वाहन में सवार लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
एसआईटी ने यह भी पता लगाया है कि हमलावरों को रथ के वाहन में बैठने की सटीक स्थिति की पहले से जानकारी थी। पुलिस का मानना है कि कम से कम आठ लोग इस साजिश में शामिल थे, जिनमें दो शार्पशूटर और स्थानीय आपराधिक सहयोगी शामिल थे जिन्होंने रसद संबंधी सहायता प्रदान की। जांचकर्ताओं ने पीटीआई को बताया कि समूह ने कथित तौर पर व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से वास्तविक समय में समन्वय किया।
इस मामले में अब तक दो मोटरसाइकिल बरामद की जा चुकी हैं। एक को घटना स्थल से बरामद किया गया है। वहीं दूसरी बाइक शुक्रवार (8 मई) सुबह बारासत से बरामद की गई है। प्रारंभिक निष्कर्षों में पता चला है कि लाल कार और मोटरसाइकिल पहले चोरी की गईं थीं।
गौरतलब है कि रथ भारतीय वायु सेना के पूर्व कर्मचारी थे। वह सुवेंदु अधिकारी के काफी करीबी थे। अधिकारी ने शनिवार (9 मई) को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। ज्ञात हो कि 4 मई को आए नतीजों में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, टीएमसी को महज 80 सीटें ही मिल पाईं।



